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अण्णा हो सकते हैं केजरीवाल के लिए संकट

अण्णा हो सकते हैं केजरीवाल के लिए संकट

अण्णा हजारे दिल्ली में एक बार फिर अनशन करने जा रहे हैं केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ। संसद के बजट सत्र के दौरान अण्णा के प्रस्तावित अनशन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को संकट में डाल दिया है।
जद यू की मांग से संकट में भाजपा

जद यू की मांग से संकट में भाजपा

बिहार में भारतीय जनता पार्टी को झटका देते हुए जनता दल यूनाइटेड ने विपक्ष के नेता का पद मांग लिया है। जद यू की इस मांग से विपक्षी पार्टी भाजपा मुश्किल में पड़ गई। क्योंकि अब बिहार विधानसभा में जद यू सबसे बड़ी पार्टी हो गई।
सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से नहीं रुकेगा संकट: आरबीआइ

सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से नहीं रुकेगा संकट: आरबीआइ

विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले सप्ताह छह अरब डालर की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का कोई स्तर पर्याप्त नहीं होता है।
प्रवासी पक्षी , सियासी दाने

प्रवासी पक्षी , सियासी दाने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र में सत्ता संभालने के बाद से प्रवासी भारतीयों पर खास ध्यान रखे हुए हैं। इसकी झलक सात से नौ जनवरी तक गुजरात के गांधीनगर में हुए भव्य प्रवासी सम्मेलन में दिखाई दी। घोषणाएं तो खूब हुईं लेकिन इसके जवाब में प्रवासी निवेश कितना आएगा, इसे लेकर दुविधा ज्यों की-त्यों बरकरार है।
सुरक्षा पर मूंदी आंख

सुरक्षा पर मूंदी आंख

संवेदनशील रक्षा सामग्री का उत्पादन करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की पूर्व कंपनी भारत एल्युमिनियम कंपनी लि. (बालको) को पूरी तरह से एक विदेशी कंपनी वेदांता के हाथों में देने की तैयारी चल रही है।
सियासी चौराहे पर अकेले ही ठिठके

सियासी चौराहे पर अकेले ही ठिठके

क्या कारण है कि जिस आडवाणी ने पहली बार जनसंघ का अध्यक्ष बनने पर 1973 में एक झटके में बलराज मधोक जैसी मजबूत शख्सियत को पार्टी से जड़ से उखाड़ फेंका, 1974 में जयप्रकाश आंदोलन के उड़ते तीर को पार्टी के लिए पकड़ बाद की इमरजेंसी के प्लावन मं सांप्रदायिकता की अस्पृश्यता धोने में गजब की फुर्ती दिखाई, संघ परिवार के संगठनों द्वारा आजादी के वक्त से ईंट-बैठाकर सुलगाए जा रहे बाबरी-मस्जिद रामजन्म भूमि के मसले को गरमाने के अवसरवादी क्षण को 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार के संकट में अचूक पहचाना, 1996 में भाजपा की सत्ता के लिए अन्य दलों के साथ जरूरी गठजोड़ बनाने के वास्ते खुद पीछे हटकर वाजपेयी को आगे करने की उस्तादी दिखाई, आज वही अपने नेतृत्व में न सहयोगी गठबंधन को उत्साहित कर पाए न अपनी पार्टी की दूसरी प्रांत के नेताओं को?
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