पंद्रह साल पहले। 13 मार्च, 2001 का बहुचर्चित स्टिंग `ऑपरेशन वेस्ट एंड'। सीडी में फर्जी हथियार डीलर बनकर गए एक व्यक्ति से एक लाख रुपए लेते दिखाए गए थे भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण। तब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल थी तृणमूल कांग्रेस और इस पार्टी की सुप्रीमो ममता बनर्जी अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार में रेल मंत्री थीं। उस वक्त ममता बनर्जी ने बंगारू लक्ष्मण और तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस के इस्तीफे की मांग उठाई थी। इस्तीफा न होने पर समर्थन वापसी की धमकी दी थी।
‘पोरिबोर्तोन’ (बदलाब) का जो नारा लेकर ममता बनर्जी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंची थीं, वही नारा अब विपक्षी वाममोर्चा और कांग्रेस के लिए धारदार हथियार बनने लगा है। ऐसे में सवाल उठता है कि वे आगे क्या लाइन लेंगी? पेश है ममता बनर्जी से दीपक रस्तोगी की कुछ समय पूर्व हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन राजपाल सिंह कहलों के खिलाफ हवाला लेनदेन के मामले में जांच शुरू कर दी गई है। दूसरी और, केन्द्रीय जहाजरानी परिवहन मंत्रालय के निर्देश पर कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने कहलों के खिलाफ साजिश के एंगल से आंतरिक जांच शुरू कर दी है। कहलों ने दावा किया है कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी एक उद्योगपति ने साजिशन उन्हें फंसाया है। उनके और कहलों के बीच कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की जमीन को लेकर ठन गई थी। उद्योगपति श्रीकांत मोहता की टेलिफल्म कंपनी के दखल वाली उस जमीन को कोलकाता पोर्ट ने हाईकोर्ट की दखल से कुछ अरसा पहले छुड़ा लिया था।
महिला विधायकों, सांसदों, नेत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन में जोरदार तालियां बजी, हंसी-खुशी दिखाई दी, राष्ट्रपति-अपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सहित मंत्रियों, मुख्यमत्रियों, विशेषज्ञों के शानदार भाषण हुए। महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न स्तरों पर महिला नेताओं द्वारा अपने अधिकारों के दृढ़तापूर्वक उपयोग एवं समाज में व्यापक बदलाव में अहम भूमिका निभाने की अपील की गई।
राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई की मांग को लेकर राजनीति तेज होती जा रही है। अब तमिलनाडु में कांग्रेस की सहयोगी डीएमके के नेता एम करुणानीधि ने केंद्र और राज्य से राजीव गांधी के हत्यारों को रिहा करने की मांग की है।
बंगाल में चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक गरमाहट बढ़ने लगी है। सत्ताधारी और विपक्षी दल एक दूसरे के खिलाफ नई रणनीति ढूंढने में जुटे तो हैं ही, पार्टियों में असंतुष्टों की कतार भी बढ़ रही है। यह स्थिति चौंकाने वाली मानी जा रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को धर्मनिरपेक्षता को जिंदा रखने की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि कुछ नौजवानों की नारेबाजी से नहीं बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की ओर से विवाद पैदा करने से देश टूटता है।