भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कांग्रेस और बिहार दो प्रमुख एजेंडा उभर कर सामने आया। वैसे तो कार्यकारिणी की बैठक में कई मुददों पर चर्चा होनी है लेकिन भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और बिहार में जंगलराज पर जमकर निशाना साधा।
केंद्र सरकार नौ राज्यों में खाली पड़े राज्यपालों के पदों पर जल्द नियुक्तियों को लेकर विचार कर रही है क्योंकि एक राज्यपाल के पास चार राज्यों का प्रभार है जबकि पांच अन्य के पास कम से कम दो दो राज्यों की जिम्मेदारी है।
एनडीए सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव की समाधि बनाने के प्रस्ताव को सियासी नजरिए से देखा जा रहा है। कांग्रेस द्वारा उपेक्षित रहे नरसिंहाराव की मृत्यु के बाद भी यूपीए सरकार ने उनकी समाधि स्थल नहीं बनाया। अब एनडीए सरकार ने यमुना नदी के तट पर एकता स्थल पर राव का एक स्मारक बनाने का प्रस्ताव बनाया है।
बिहार में विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार होने लगी है। सभी सियासी दलों का जोर दलित वोट को अपने पाले में करने पर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय जनता पार्टी को खासतौर पर निर्देश दिया है कि अगर दलित वोट उसके पाले में आ जाए तो प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता।
मधेपुरा से राजद सांसद पप्पू यादव पार्टी प्रमुख लालू यादव से नाराज हैं। पप्पू यादव पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को समर्थन दे रहे हैं और चाहते हैं कि राजद भी समर्थन दे ताकि राज्य में सामाजिक न्याय का नारा बुलंद हो सके। पप्पू यादव से आउटलुक की बातचीत के प्रमुख अंश-
राजनीतिक दुश्मनी छोड़ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिला ही लिया। इससे पहले बिहार में राजनीतिक समीकरण के चलते नीतीश मोदी से मिलना नहीं चाहते थे। 34 महीनों बाद मोदी और नीतीश की मुलाकात में बिहार के विकास को लेकर चर्चाएं हुई।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंन्द्र सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर सियासत नहीं होनी चाहिए। उन्होने कहा कि सरकार भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विपक्षी पार्टियों के साथ आम सहमति बनाने की एक और कोशिश कर सकती है और फिर से अध्यादेश भी जारी कर सकती है।
बिहार में मैट्रिक परीक्षा में कदाचार के राष्ट्रव्यापी निंदा के बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा कि अगर उनकी सरकार होती तो वे परीक्षार्थियों को परीक्षा में उत्तर देने के लिए किताब ले जाने की अनुमति प्रदान कर देते।
नक्सल प्रभावित इलाकों में ज्यादातर जवानों की मौत सांप काटने, बाढ़ संकट से निपटने तथा बाढ़ संबंधी आपदाओं एवं रोगों के कारण होती है। गृह मंत्रालय इस बात को लेकर चिंतित है कि हाल के दिनों में नक्सली हमलों के बगैर सीआरपीएफ के जवान शहीद हो रहे हैं।