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70 साल के कबीर बेदी ने रचाई चौथी शादी, बेटी पूजा नाखुश

70 साल के कबीर बेदी ने रचाई चौथी शादी, बेटी पूजा नाखुश

मशहूर अभिनेता कबीर बेदी चौथी बार शादी के बंधन में बंध गए हैं। वरिष्ठ अभिनेता ने ब्रिटेन में जन्मी परवीन दुसाज से अपने 70वें जन्मदिन पर शादी की। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड की फिल्मों में काम कर चुके बेदी की यह चौथी शादी है। बेदी की चौथी शादी से उनकी बेटी पूजा बेदी नाखुश बताई जा रही हैं।
लालू 9वीं बार बने राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीएम पर साधा निशाना

लालू 9वीं बार बने राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीएम पर साधा निशाना

लालू प्रसाद को रविवार को लगातार 9वीं बार राष्ट्रीय जनता दल का अध्यक्ष चुन लिया गया। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित राजद की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। इस अवसर पर लालू प्रसाद ने भाजपा और नरेंद्र मोदी की सरकार में देश के सुरक्षित नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार की जीत के बाद अब वह सांप्रदायिक ताकतों को कुचलने और हस्तिनापुर (दिल्ली) से भाजपा को उखाड़ फेकने के लिए देश में धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट करेंगे।
सत्ता और जनता के बीच सेतु का काम करुंगी- डॉ. मीसा भारती

सत्ता और जनता के बीच सेतु का काम करुंगी- डॉ. मीसा भारती

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव की बेटी डॉ. मीसा भारती भले ही लोकसभा का चुनाव हार गई हों लेकिन राजनीतिक सक्रियता बरकरार है। मीसा जनता के बीच बेहतर संवाद बनाए हुए हैं और भविष्य के लिए रणनीति तैयार कर रही हैं। आने वाले दिनों में मीसा की राजनीतिक भूमिका क्या होगी। इसको लेकर आउटलुक के विशेष संवाददाता ने विस्तार से बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश-
बिहार: सरकारी साइट पर इंदिरा विरोधी लेख को लेकर विवाद

बिहार: सरकारी साइट पर इंदिरा विरोधी लेख को लेकर विवाद

बिहार सरकार की एक वेबसाइट पर इंदिरा गांधी की आलोचना वाले एक लेख ने विवाद खड़ा कर दिया है। सरकारी वोबसाइट पर छपे इस लेख ने विपक्षी भाजपा और उसके सहयोगी दलों को सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों को निशाना बनाने का मौका दे दिया है। हालांकि हंगामा खड़ा होने के बाद वह लेख साइट से हटा लिया गया है।
जंगलराज पार्ट 2: बिहार में फिर दो हत्याएं

जंगलराज पार्ट 2: बिहार में फिर दो हत्याएं

ऐसा लगता है कि बिहार में जंगलराज की वापसी की आशंकाएं सही साबित होने लगी हैं। लालू प्रसाद यादव के 15 वर्ष के शासन के दौरान हत्याओं, अपहरण, रंगदारी, लूटपाट की जो घटनाएं आम थी वह नीतीश के दस वर्ष के शासन के दौरान थम गई थीं मगर सत्ता में पूरी ताकत के साथ लालू प्रसाद की वापसी के साथ एक बार फिर अपराध का पुराना दौर लौटता दिख रहा है।
दादरी कांडः अखलाक के फ्रिज में गोमांस नहीं मटन था

दादरी कांडः अखलाक के फ्रिज में गोमांस नहीं मटन था

उत्तर प्रदेश के दादरी में 28 सितंबर को गोमांस की अफवाह पर अखलाक नामक शख्स की पीट-पीट कर हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। वेटनरी विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि जो मांस का टुकड़ा पाया गया है वह बीफ नहीं बल्कि मटन (बकरे का मांस) था।
पिछड़ा वर्ग आरक्षण सरकार के लिए चुनौती

पिछड़ा वर्ग आरक्षण सरकार के लिए चुनौती

बिहार विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग को मिले आरक्षण के एक मुद्दे ने देश की सियासत ही बदल दी। चुनाव के दौरान जिस तरह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण की समीक्षा के बयान की जो मतदाताओं में प्रतिक्रिया हुई, उसे देखते हुए भाजपा और राजग के साथ खड़े पिछड़े वर्ग के नेता सियासी अहमियत समझ अब इस वर्ग के हितों की बात खुलकर करने लगे हैं। हालांकि भाजपा नेताओं ने बार-बार इस बात को दुहराया कि आरक्षण की समीक्षा नहीं की जाएगी लेकिन इसका खास सियासी असर नहीं पड़ा।
असम, बंगाल में नीतीश रणनीति

असम, बंगाल में नीतीश रणनीति

महागठबंधन बनाकर भाजपा को पटखनी देने वाले मुख्य‍मंत्री नीतीश कुमार अगले साल असम और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में बिहार जैसा खाका खींचने में जुट गए हैं। इसके लिए नीतीश कुमार स्वयं कांग्रेस के अलावा इन राज्यों के क्षेत्रीय दल के नेताओं के संपर्क में हैं।
क्या अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ झूठ बोलने के लिए है: जेटली

क्या अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ झूठ बोलने के लिए है: जेटली

डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अरविंद केजरीवाल के ऊपर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसा लगता है कि वह झूठ और बदनामी में भरोसा करते हैं। जेटली ने केजरीवाल पर प्रहार करते हुए कहा कि वह उन्माद की हदें छूने वाली भाषा बोलते हैं।
कवर स्‍टोरी: डूबा अखबार ले रहा कांग्रेस की खबर

कवर स्‍टोरी: डूबा अखबार ले रहा कांग्रेस की खबर

बताया जाता है कि जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में अपने शुरू किए गए अखबार नेशनल हेराल्ड के कर्मचारियों से एक बार कहा था, हमें बनियागिरी नहीं आई। यदि सुब्रह्मण्यम स्वामी की कोशिशें सिरे चढ़ीं तो माना जाएगा कि शायद नेहरू के उत्तराधिकारी इस कला को सीख चुके हैं।