एक धर्मनिरपेक्ष देश के सरकार संचालित संस्थान में किसी कार्यक्रम से पहले यज्ञ के आयोजन को लेकर आलोचना स्वाभाविक है मगर इस आलोचना का भारतीय जनसंचार संस्थान के मुखिया पर कोई असर नहीं है।
फेसबुक पोस्ट के जरिए बस्तर के हालात और सुरक्षा बलों के तौर-तरीकों पर गंभीर वाल उठाने वाली रायपुर सेंट्रल जेल की डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे को छत्तीसगढ़ सरकार ने निलंबित कर दिया है। हालांकि राज्य सरकार ने वर्षा डोंगरे के निलंबन की वजह छुट्टियों को बताया है।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात सीआरपीएफ के जवानों को लेकर कई चिंताजनक बातें सामने आ रही हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा में लंबे समय से तैनात सीआरपीएफ के जवानों में थकावट के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के बस्तर में 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध दशहरा के लिए इन दिनों लगभग 34 गांवों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यहां रथ खींचने का अधिकार केवल किलेपाल के माड़िया लोगों को ही है। रथ खींचने के लिए जाति का कोई बंधन नहीं है। हर गांव से परिवार के एक सदस्य को रथ खींचना ही पड़ता है। इसकी अवहेलना करने पर परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए जुर्माना लगाया जाता है।
लोगों की छोटी-छोटी जरूरतों की पूर्ति छत्तीसगढ़ में बड़ा फर्क ला रही है- नक्सल समस्या से लेकर राजनीतिक समीकरण तक में। पढ़ें सरगुजा (छत्तीसगढ़) से आउटलुक की ग्राउंड रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और माओवादियों से संबंध का आरोप लगाकर उनकी गिरफ्तारी को लेकर `एडिटर्स गिल्ड’ ने गहरी चिन्ता जताई है। `एडिटर्स गिल्ड’ की जांच टीम ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर, बस्तर, रायपुर और केन्द्रीय कारागार का दौरा कर पत्रकारों के उत्पीड़न की खबरों को सही पाया। जांच टीम के प्रकाश दुबे और विनोद वर्मा ने 13 से 15 मार्च के बीच इन इलाकों का दौरा किया। पीड़ित पत्रकारों, वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों से बात की। जगदलपुर और रायपुर में कई सरकारी अफसरों से मिले और रायपुर में मुख्यमंत्री रमन सिंह से मुलाकात की।
बस्तर के अबूझमाड़ में 16 ग्रामीणों की कथित हत्या की खबरों से एक बार फिर देश और दुनिया के मीडिया की निगाहें बस्तर के नक्सलवाद पर टिक गई हैं। दरअसल इस खबर के जन्मदाता बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते नक्सली बौखला गए हैं और निर्दोष ग्रामीणो को मार रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की गोलियों का सामना कर रही पुलिस अब इन्हीं नक्सलियों का घर बसाने जा रही है। राज्य का बस्तर जिला शनिवार को माओवादी जोड़े के विवाह का गवाह बनेगा। राज्य के अति नक्सल प्रभावित बस्तर जिले की पुलिस इन दिनों जिले के दरभा क्षेत्र की निवासी कोसी मरकाम और बीजापुर जिले के पोडियामी लक्ष्मण के विवाह की तैयारी में है। विवाह के लिए जिला मुख्यालय जगदलपुर के गांधी मैदान को तैयार किया गया है और समारोह के लिए मेहमानों को निमंत्रण पत्र भी भेजा जा चुका है।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र के सुकमा जिले में 15 महिलाओं सहित 70 नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के अनुसार माओवादी आंदोलन और हिंसा से निराश होकर इन लोगों ने अपने हथियार डालने का फैसला किया।
‘ एक आदमी के लिए सात किलो चावल और दो किलो चना, क्या इससे गरीबी दूर होती है?’ कोंडागांव के नगरी संभाग के गांव उमर का सुखदेव यह सवाल करते हुए रुआंसा हो जाता है। उसकी पत्नी और तीन बच्चे खेत में मजदूरी करने गए हैं। सौ रुपये दिहाड़ी मिलती है और जंगल से मिलने वाली साग-भाजी तो अब पहले जैसी नहीं रही। सुखदेव का कहना है कि वह अपने बच्चों को पढ़ाना चाहता है। लेकिन सरकार ने सिर्फ साइकिल देकर अपनी जिम्मेदारी खत्म कर दी। उसकी छोटी बेटी नौवीं कक्षा में दो बार फेल हो गई थी तो स्कूल वालों ने तीसरी बार एडमिशन देने से इनकार कर दिया।