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चीनी मिलों को 6000 करोड़ का कर्ज, दालों के आयात की नौबत

चीनी मिलों को 6000 करोड़ का कर्ज, दालों के आयात की नौबत

दालों की बढ़ती महंगाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने दालों के आयात का फैसला किया है जबकि चीनी मिलों को 6 हजार करोड़ रुपये के ब्‍याज मुक्‍त कर्ज दिया जाएगा। इससे पहले भी केंद्र और राज्‍य सरकारें चीनी मिलों को कई राहत पैकेज दे चुकी हैं। इसके बावजूद गन्‍ना किसानों को करीब 21 हजार करोड़ रुपये का भुगतान चीनी मिलों के पास अटका हुआ है।
सस्‍ते कर्ज की आस, रेपो रेट 0.25% घटा

सस्‍ते कर्ज की आस, रेपो रेट 0.25% घटा

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की है, जिससे कर्ज सस्‍ता होने की उम्‍मीद बढ़ गई है। फिलहाल बैंकाें को आरबीआई से सस्‍ता कर्ज मिलेगा। माना जा रहा है कि जल्‍द ही बैंक इस राहत को ग्राहकों तक भी पहुंचाएंगे।
बिहार में शिक्षा के लिए विश्‍व बैंक देगा 25 करोड़ डॉलर का कर्ज

बिहार में शिक्षा के लिए विश्‍व बैंक देगा 25 करोड़ डॉलर का कर्ज

विश्व बैंक बिहार में प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों को अधिक योग्य, जवाबदेह एवं जिम्मेदार बनाने के लिए एक कार्यक्रम चलाएगा। इसके तहत राज्य सरकार को 25 करोड़ डॉलर का ऋण देने का प्रस्‍ताव है।
मंगोलिया पर फिदा मोदी, 1 अरब डॉलर के कर्ज का ऐलान

मंगोलिया पर फिदा मोदी, 1 अरब डॉलर के कर्ज का ऐलान

चीन दौरे के बाद शनिवार को मंगोलिया पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों का ऐलान किया है। इसके तरह भारत की ओर से मंगोलिया को 100 करोड़ डॉलर (करीब 6300 करोड़ रुपए) का ऋण दिया जाएगा। रविवार को मोदी ने मंगोलिया की संसद को भी संबोधित किया।
ऐसी नीतियों से कतई नहीं मिलेगा किसान को मुआवजा

ऐसी नीतियों से कतई नहीं मिलेगा किसान को मुआवजा

केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किसानों की मदद के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। फसलों को हुए नुकसान के सर्वे की रस्म अदायगी भी जारी है। लेकिन मेहनत की कमाई लुटा चुके किसानों के हाथ से मुआवजा अभी दूर है। दरअसल, फसलों के बीमा और मुआवजे की प्रक्रिया में इतने झोल हैं कि किसान तक सिर्फ आश्‍वासन ही पहुंच पाते हैं।
किसान की मौत और व्यवस्था का तिलिस्म

किसान की मौत और व्यवस्था का तिलिस्म

23 अप्रैल 2015 को दौसा के गजेंद्र सिंह के रूप में देश के हाहाकार ने जंतर-मंतर पर दम तोड़ दिया। उसकी चीखती खामोशी को सत्‍ता और मीडिया की धडक़नों में एक और हाहाकार के रूप में धड़कना चाहिए था।
गजेंद्र सिंहः राजनीति और साफा कारोबार से आत्महत्या तक

गजेंद्र सिंहः राजनीति और साफा कारोबार से आत्महत्या तक

जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की रैली में राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह कल्याणवत की खुदकुशी ने संसद से लेकर देश भर में बहस छेड़ दी है। गजेंद्र राजस्थान के दौसा जिले के एक गांव के रहने वाले थे। उन्हें किसान बताया तो जा रहा है लेकिन वह सिर्फ किसान नहीं थे बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय और जागरुक नागरिक भी थे। इस वर्ष उनकी सारी फसल बरबाद हो गई थी जिस वजह से वह आहत थे।
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