पठानकोट आतंकवादी हमले को लेकर देश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने पाकिस्तान मामलों से निपटने में मोदी सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए जबकि भाजपा ने पलटवार करते हुए उस पर आरोप लगाया कि वह घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। वहीं, राजग में शामिल शिवसेना ने मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की है।
शिवेसना ने पिछले दिनों अचानक पाकिस्तान की यात्रा करने पर पीएम मोदी पर करारा हमला किया है। पीएम की औचक लाहौर यात्रा पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा कि भारतीय खून से सनी पाकिस्तानी भूमि को चूमना उनके लिए महंगा साबित होगा।
रूस यात्रा के बाद अफगानिस्तान पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति अशरफ गनी से मुलाकात की। काबुल में प्रधानमंत्री ने अफगान संसद के नए भवन का उद्घाटन भी किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस की दो दिवसीय यात्रा पर आज रवाना हो गए। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत सामरिक साझेदारी को नई उंचाई पर ले जाना है।
सोमवार को एक तरफ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अपनी पाकिस्तान यात्रा और दोनों देशो के बीच वार्ता शुरू करने के मुद्दे पर संसद में बयान दे रही थीं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के भारत में उच्चायुक्त हुर्रियत नेताओं को बातचीत के लिए दिल्ली बुला चुके थे। गौरतलब है कि हुर्रियत नेताओं से बातचीत के मुद्दे पर ही अगस्त में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वार्ता टूट गई थी।
पहले युद्ध और प्रेम में सबकुछ जायज ठहराया जाता था। अब आर्थिक-व्यापारिक हित शायद सबकुछ जायज कर देते हैं, यहां तक कि युद्ध और प्रेम को भी। बल्कि इनके बारे में यू-टर्न को भी। अच्छा हुआ कि अपने घरेलू जनाधारों में उबाल भरने के लिए दिखावे के जंगी स्वांग में भड़काऊ बयानबाजी के घोड़ों पर सवार भारत और पाकिस्तान की हुकूमतों ने अपनी भड़काऊ बयानबाजी के ऊंचे घोड़ों से उतरकर एक-दूसरे से पहले पेरिस में प्रधानमंत्री के स्तर पर, फिर क्रमश: बैंकॉक और इस्लामाबाद में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और विदेशी मंत्रियों के जरिये एक-दूसरे से बातचीत शुरू करने के लिए हाथ मिलाया।
दुनिया को जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने के लिए विश्व के 196 देशों के बीच पेरिस में ऐतिहासिक हो गया है। लंबी खींचतान और विचार-विमर्श के बाद भारत, चीन, अमेरिका समेत छोटे-बड़े तमाम देश इस समझौते पर राजी हुए। इसमें धरती के तापमान में बढ़ोतरी को 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखने का लक्ष्य रखा गया है।
जलवायु परिवर्तन पर एेतिहासिक समझौते की समय सीमा से दो दिन पहले वार्ताकारों ने एक नया और छोटा मसौदा जारी किया है जिसमें सभी महत्वपूर्ण प्रगतियों और मतभेदों को शामिल किया गया है। हालांकि यह मसौदा भी जटिल मुद्दों पर मतभेदों को दूर करने में नाकाम रहा है।