मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद ने स्वराज संस्थान के सौजन्य से मुंशी प्रेमचंद जयंती पर निरंतर श्रृंखला में कथाकार स्वाति तिवारी का रचना पाठ आयोजित किया गया।
दिल्ली पुस्तक मेले के 21वें सत्र की थीम कौशल विकास पर आधारित है। भारतीय प्रकाशक संघ और भारतीय व्यापार प्रोत्साहन संघ की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित इस पुस्तक मेले की थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में शुरू किए गए स्किल इंडिया अभियान से प्रेरित है।
शीना बोरा की हत्या के तीन साल बाद एक ऐसे रिश्ते और अपराध की परत खुली है कि इसकी गहराई में जाने के बाद ही अनैतिक संबंध, लालच, धोखा और फिर हत्या की गुत्थी को समझा जा सकता है। पीटर मुखर्जी जब स्टार इंडिया के सीईओ थे, तभी उसकी घनिष्ठता एचआर कंसल्टेंट इंद्राणी मुखर्जी से बढ़ते हुए शादी तक पहुंची थी। पीटर की यह दूसरी शादी थी जबकि इंद्राणी की तीसरी। पीटर की पहली शादी से पैदा हुए बेटे राहुल मुखर्जी और इंद्राणी की पहली शादी से पैदा बेटी शीना बोरा के बीच प्रेम-संबंध ही शीना की हत्या का मुक्चय कारण बन गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो हत्या का दूसरा कारण मां-बेटी के बीच पैसों का भी विवाद था। पुलिस को हत्याकांड में सबसे बड़ी सफलता इंद्राणी के ड्राइवर श्यामवर राय के अपराध कबूलने से मिली है और उसने इंद्राणी और संजीव खन्ना (इंद्राणी के पूर्व पति) के भी इस हत्या में शामिल होने की बात कही है।
मुंबई पुलिस ने शीना बोरा हत्याकांड से जुड़े पेचीदा केस की गुत्थी सुलझाने के लिए मीडिया दिग्गज पीटर मुखर्जी के बेटे राहुल मुखर्जी से पिछले 12 घंटों में दूसरी बार पूछताछ की है। राहुल और शीना के बीच प्रेम संबंधों की बात सामने आई है। यह बात भी अब तकरीबन साफ हो गई है कि शीना बोरा इंंद्राणी की बहन नहीं बल्कि बेटी थी। पुलिस इस मामले में राहुल और शीना के प्रेम संबंधों के अलावा प्रॉपर्टी विवाद का कोण भी तलाश रही है। कहा जा रहा है कि शीना इंद्राणी से प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी मांग रही थी, जिसके चलते दोनों में अनबन हुई।
सच्ची घटनाओं को परदे पर उतारना अपने आप में मुश्किल काम है। वास्तविक चरित्र के बारे में दर्शकों की जानकारी कुछ ज्यादा ही होती है और वे फिल्म देखते वक्त भूल जाते हैं कि घटनाओं को परदे पर उतारने के लिए नाटकीयता का सहारा लेना जरूरी होता है। मांझी- द माउंटेन मैन इसी का उदाहरण है।
अभिव्यक्ति की आजादी के लिए यह वर्ष नाटकीय रहा है। यह इंडियाज डॉटर पर सेंसरशिप से लेकर श्रेया सिंघल फैसले के उत्साह और फिर गुपचुप तरीके से इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी को ब्लॉक करने की सरकारी कोशिश के बीच झूलता रहा। हालांकि हर घटना ने अलग-अलग नाराजगी पैदा की मगर सच यही है कि ये सभी जुड़ी हुई हैं। ये सभी अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरे को दूर रखने वाले संवैधानिक सुरक्षा उपायों में मौजूद खामियों को बताने वाले चेतावनी संकेत हैं।
किसानों की खुदकुशी के मुद्दे पर कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के एक जवाब ने हंगामा खड़ा कर दिया है। कृषि मंत्री की मानें तो हर साल हजारों किसान प्रेम संबंध और नामर्दी जैसी वजहों से खुदकुशी कर रहे हैं।
वर्ष 1975 की 25 जून को इंदिरा गांधी सरकार ने आंतरिक आपातकाल की घोषणा की और भारतीय राजनीति के इस काले अध्याय से जुड़ी घटनाओं को तब अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एमसीडी बीट कवर करने वाली पत्रकार कूमी कपूर ने किताब की शक्ल दी है। यहां हम इस पुस्तक के कुछ अंशों को पाठकों के सामने ला रहे हैं जिनमें आपातकाल से ठीक पहले की घटनाओं का जिक्र है।