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राजस्थान के गांव में दलितों की हत्या, बलात्कार से तनाव

राजस्थान के गांव में दलितों की हत्या, बलात्कार से तनाव

राजस्‍थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में दबंग जाट जाति के एक व्यक्ति की हत्या के बाद में तीन दलितों को ट्रैक्टर से रौंद कर मार डालने की घटना के बाद सामाजिक तनाव गहरा गया है।
अदालत में पेश हुए सलमान

अदालत में पेश हुए सलमान

अभिनेता सलमान खान काले हिरणों के शिकार के संबंध में शस्त्र अधिनियम से जुड़े मामले में बुधवार को एक स्थानीय अदालत में पेश हुए।
महाराष्ट्र करेगा कूड़ा निपटान की ऑनलाइन निगरानी

महाराष्ट्र करेगा कूड़ा निपटान की ऑनलाइन निगरानी

महाराष्ट्र पर्यावरण विभाग उद्योगों और उनके खतरनाक अपशिष्ट के निपटान की जल्द ही ऑनलाइन निगरानी शुरू करेगा जिसके आधार पर इन इकाइयों के लाइसेंस के नवीकरण का निर्णय लिया जाएगा।
आयकर विभाग ने 18 बड़े ‌डिफाल्टरों के नाम बताए

आयकर विभाग ने 18 बड़े ‌डिफाल्टरों के नाम बताए

सरकार ने उन व्यक्तिगत और संस्‍थागत करदाताओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है जो आयकर विभाग का करोड़ों रुपया दबाकर बैठे हैं। पहले दौर में ऐसे 18 नाम सार्वजनिक किए गए हैं। आयकर विभाग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के निर्देश पर इन बकायेदारों के नाम का खुलासा किया है ताकि इनसे वसूली में मदद मिल सके।
जनता एक्सप्रेस पटरी से उतरी

जनता एक्सप्रेस पटरी से उतरी

देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस के दो डिब्बे पटरी से उतर जाने के कारण 15 लोगों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए।
बेमौसम बारिश पर राज्यसभा में चिंता

बेमौसम बारिश पर राज्यसभा में चिंता

देश के विभिन्न भागों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं, तिलहन एवं बागवानी फसलों को हुई भारी क्षति पर गुरूवार को विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरी चिंता जताते हुए प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा एवं फौरी राहत दिलाने के लिए विभिन्न सुझाव दिए।
अच्छे मॉनसून से फिरेंगे किसानों के दिन

अच्छे मॉनसून से फिरेंगे किसानों के दिन

‌पिछले दिनों बेमौसम बारिश से बेशक लाखों टन अनाज बर्बाद हो गए हों लेकिन मौसम विभाग की मानें तो इस बार बंपर मॉनसून की भविष्यवाणी की गई है जिससे जल्द ही किसानों के दिन फिरने वाले हैं।
न्यायिक देर से भी अंधेर हो सकता है

न्यायिक देर से भी अंधेर हो सकता है

भारतीय संविधान के तहत उपलब्ध न्यायिक सुनवाई के अधिकार और संस्थाबद्ध प्रणालियों में त्वरित न्याययिक सुनवाई के अधिकार की ज्यादा गुंजाइश नहीं बनाई गई है, यह हाल में 40 साल बाद ललित नारायण मिश्र हत्याकांड में आए फैसले से साबित है।
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