एक तरफ कई राज्य सरकारें शराबबंदी पर जोर दे रही हैं तो दूसरी तरफ यूपी में जहरीली शराब से हुई मौतों ने सरकार की नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आजमगढ़ व लखनऊ में जहरीली शराब पीने से 23 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम के निर्देश पर डीएम ने थानाध्यक्ष रौनापर, इलाके के सब इंस्पेक्टर समेत तीन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है तथा मजिस्ट्ररियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सवाल यह है कि क्या निलंबन और जांच से मृतकों के परिजनों को न्याय मिल पाएगा और क्या इस तरह का गोरखधंधा बिना पुलिस की मिलीभगत के संभव है। सरकार क्या भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगा पाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने मशहूर वैज्ञानिक पद्म विभूषण डॉ के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर दिया गया है। समिति तत्काल प्रभाव से काम करना शुरू कर देगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय को देश भर से शिक्षा शास्त्रियों, शिक्षकों, विशेषज्ञों, छात्रों से सुझाव मिले थे जिस पर यह फैसला लिया गया है।
उत्तराखंड के चमोली जिले के एक गांव की महिलाओं ने हजारों रुपयों की अंग्रेजी शराब भरी कार और एक तस्कर को पकड़ लिया। तस्कर ने कार के आगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गुरुग्राम हरियाणा का नाम लगा रखा था।
बैंकों से ऋण लेकर विदेश भागने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई की एक अदालत में चार्जशीट दायर की है। यह चार्जशीट आईडीबीआई और केएफए मनी लॉंड्रिंग से जुड़े मामले में दर्ज की गई है.
नीति आयोग ने केंद्र सरकार को एयर इंडिया के निजीकरण का सुझाव दिया है। आयोग ने कहा है कि कर्ज में दबी एयर इंडिया का पूर्ण निजीकरण कर दिया जाना चाहिए। वहीं, नागर विमानन मंत्रालय ने कहा है कि एयर इंडिया को आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक बनाने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में राज्य मंत्री स्वाति सिंह द्वारा लखनऊ में बीयर बार के उद्घाटन किए जाने पर जमकर हंगामा हो रहा है। कांग्रेस ने इसे शराबबंदी के लिए प्रदर्शन कर रही महिलाओं का अपमान करार दिया है। वहीं इस मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रिपोर्ट मांगी है।
नीति आयोग ने कहा है कि देश के समक्ष बेरोजगारी के मुकाबले सबसे बड़ी समस्या अर्ध बेरोजगारी है। आयोग ने बताया कि जिस काम को एक व्यक्ति कर सकता है, उसे प्राय: दो या उससे अधिक कर्मचारी करते हैं।
स्वदेशी जागरण मंच के बाद अब आरआरएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने नीति आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं तथा आयोग को मजदूर व किसान विरोधी करार दिया है। संघ का कहना है कि आयोग में श्रमिकों की समस्याएं जानने वाले कोई सदस्य नहीं है। ज्यादातर कारपोरेट सेक्टर से जुड़े लोग हैं। संघ आयोग के फिर से गठन करने की मांग को लेकर संघ देशभर में 22 व 23 जून को विरोध प्रदर्शन करेगा।