देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए उनके बेटे सुनील शास्त्री ने संबंधित फाइलों के खुलासे की मांग की है। इससे पहले मनमोहन सिंह सरकार उनकी इस मांग का अनसुना कर चुकी है।
उपराज्यपाल की ओर से नियुक्त भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख मुकेश कुमार मीणा के दफ्तर आने और कामकाज में दखल पर रोक लगाने की दिल्ली सरकार की मांग पर हाईकोर्ट ने कोई आदेश जारी नहीं किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मीणा कानून के मुताबिक काम करते रहेंगे।
दिल्ली में उपराज्यपाल द्वारा नियुक्त एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के प्रमुख मुकेश मीणा की नियुक्ति को दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसके बाद दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच विवाद और गहरा गया है।
दूरदर्शन द्वारा संस्कृत-समाचार प्रसारण की अवधि बढ़ाने के निर्णय पर कोई खास आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि संस्कृत मोदी सरकार के एजेंडे में है। इस निर्णय का निहितार्थ भी आसानी से समझ में आने वाला है, इसलिए इस पर सवाल भी उठेंगे ही। इस ऐलान के बाद लोगों के जेहन में सबसे पहला सवाल तो यह है कि संस्कृत में न्यूज बुलेटिनों और समाचार-चर्चा के कार्यक्रमों का दर्शक या श्रोता वर्ग कौन है? दूसरा सवाल यह है कि देश में कितने लोग ऐसे होंगे जो वास्तव में संस्कृत माध्यमों से इन कार्यक्रमों की बाट जोह रहे हैं? ये महज शोशा है या इसकी कोई ठोस जरूरत है?
दिल्ली के एंटी करप्शन ब्यूरो पर कब्जे की जंग तेज होती जा रही है। दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से नियुक्त एसीबी के चीफ एमके मीणा को दिल्ली सरकार ने यह कहते हुए चार्ज लेने से रोक दिया कि एसीबी में संयुक्त आयुक्त का कोई पद नहीं और एसीबी में पहले से एक प्रमुख मौजूद है। दिल्ली सरकार ने एसीबी में मीणा की नियुक्ति का आदेश जारी करने वाले राज्य के गृह सचिव धर्म पाल को भी हटाने का फैसला किया है। हालांकि, उपराज्यपाल नजीब जंग ने गृह सचिव को हटाने से इन्कार कर दिया है जबकि एमके मीणा का कहना है कि वह एसीबी प्रमुख का चार्ज ले चुके हैं। इस बीच, दिल्ली सरकार ने एसीबी में मीणा की नियुक्ति के आदेश को भी गृह विभाग से रद्द करवा दिया है।
हरियाणा के अटाली गांव में हुई हिंसा के लिए आप आदमी पार्टी के जांच दल ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की इलाके में कुछ दिनों पहले हुई एक रैली को जिम्मेदार ठहराया है।
टेंटी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पाया जाने वाला फल है, इसके पेड़ को करील कहा जाता है। इसको राजस्थान में कैर के नाम से जानते है। यह अचार बहुत पसन्द किया जाता है। आपको भी यह अचार बहुत पसन्द आयेगा।
राजस्थान में पिछले डेढ़-दो साल में दलित और सामाजिक तौर पर उपेक्षित वर्गों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले छह माह में दलित अत्याचारों की लहर सी आ गई है।
5 मई को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आधिकारिक तौर पर माना कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परिवार के सदस्यों की 20 सालों तक कथित जासूसी की जांच वह नहीं करवाने जा रही है। गृहराज्यमंत्री हरिभाई पारथी भाई चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में यह भी माना कि नेताजी से संबंधित और कोई दस्तावेज सरकार सार्वजनिक नहीं करेगी।