प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी जी सी मुर्मू को केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय का निदेशक बनाए जाने के किसी भी प्रयास का विरोध शुरू हो गया है।
हार्दिक पटेल के अपहरण के दावे को चुनौती देते हुए गुजरात सरकार ने आज उच्च न्यायालय से कहा कि जब पिछले महीने वह कथित तौर पर लापता हो गए थे तब पटेल आंदोलन के नेता के नजदीकी लोग उनसे लगातार संपर्क में थे।
परमाणु ऊर्जा विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि सन 2009 से लेकर 2013 के बीच अब तक 11 भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों की संदिग्ध स्थितियों में या अस्वाभाविक मौत हुई है। हरियाणा के राहुल सहरावत ने आरटीआई के जरिये 21 सितंबर को यह जानकारी मांगी थी।
पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा एजेंसी (पीएमएसए) ने गुजरात तट के पास आज करीब 65 मछुआरों को पकड़ा और उनकी 12 नावों को जब्त कर लिया। नेशनल फिशवर्कर्स फोरम (एनएफएफ) के अधिकारियों ने आज यह जानकारी दी। इस वर्ष जनवरी से भारतीय मछुआरों को पीएमएसए द्वारा पकड़े जाने की यह चौथी सबसे बड़ी घटना है।
पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल कल पुलिस को चकमा देकर निकल भागने के बाद आज गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के धरांगधारा कस्बे से गुजरने वाले राजमार्ग पर रहस्यमय परिस्थितियों में सामने आ गए और दावा किया कि उन्हें अगवा कर लिया गया था।
पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हार्दिक पटेल को हिरासत में लिए जाने के बाद गुजरात सरकार ने कानून व्यवस्था से निबटने और किसी अफवाह को फैलने से रोकने के लिए समूचे गुजरात में मोबाइल इंटरनेट सेवा पर आज रोक लगा दी।
गुजरात में पटेल समुदाय के आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन के इस हफ्ते हिंसक रूप लेने के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और पिछले दो दिनों में हिंसा की कोई बड़ी घटना ना होने के बाद सभी प्रभावित हिस्सों से आज कर्फ्यू हटा लिया गया।
'अमिताभ बच्चन की बातों पर न जाएं। गुजरात से जुड़े उनके विज्ञापन झूठे हैं। कुछ दिन बिताओ हमारे गुजरात के देहातों में तो असलियत पता चल जाएगी। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। युवक सड़कों पर बेकार घूम रहे हैं। तलाटी तक की नौकरी के लिए लाखों रुपये की घूस देनी पड़ती है। क्या यही है गुजरात का विकास मॉडल ?’
पिछले साल भारतीय जनता पार्टी केंद्र में सत्ता में क्या आई 1990 के दशक के मजहबी और जातिगत टकराव के गड़े मुर्दे मानो फिर से उखाड़े जाने लगे। एक तरफ जनगणना में धार्मिक समुदायों की जनसंख्या वृद्धि के चुनिंदा आंकड़े पूर्वाग्रह के रंग में रंगकर धीरे-धीरे सामाजिक और मुख्यधारा मीडिया में टपकाए जाने लगे और दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल और उसके परिवार के तरह-तरह के गेरुआधारी ‘पूतों फलों’ और ‘घर वापसी’ के भड़काऊ भाषणों के जरिये बहुसंख्यक समुदाय का भयादोहन कर अल्पसंख्यकों के विरुद्ध उन्माद पैदा करने की कोशिश करने लगे। नतीजतन देश में कई जगह अल्प तीव्रता वाले सांप्रदायिक उपद्रव होने लग गए, खासकर उन राज्यों में जहां विपक्ष की सरकारें थीं और आगे चुनाव होने थे।