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Search Result : "किसान संवाद"

किसान की लाठी नहीं है अब गन्ना

किसान की लाठी नहीं है अब गन्ना

एक दौर था जब प्रदेश के किसान नकदी फसल गन्ने को अपनी लाठी मानते थे। सूबे की 124 चीनी मिलें सूरसा के मुंह जैसी खेतों की ओर ताकती रहती थीं और दिन रात गन्ने की ही फरमाईश करती थीं मगर अब यह लाठी जैसे टूट गई है और 'सुरसा’ भी न जाने कहां बिला गई है। प्रदेश में गन्ने की फसल को राजनीति का ऐसा घुन लगा है कि खेत, फसल और किसान सब चौपट हो रहे हैं। आलम यह है कि गन्ना उगाने की लागत सवा तीन सौ रुपए क्विंटल आ रही है मगर किसान को मिल रहे हैं मात्र 280 रुपए। वह भी रुला-रुलाकर।
चर्चाः किसान को सरकारी छतरी। आलोक मेहता

चर्चाः किसान को सरकारी छतरी। आलोक मेहता

‘मेरी छतरी के नीचे आ जा’ और ‘नहीं भूलेंगे यह बरसात की रात’ जैसे गीत सिनेमा के पर्दे और रेडियो पर मन मोह लेते हैं। प्रेम-विरह में भी बरसात, पहाड़, रेगिस्तान के दृश्य दिल-दिमाग को द्रवित करते हैं।
चीनी मिलों को राहत और किसानों की मुसीबत

चीनी मिलों को राहत और किसानों की मुसीबत

केंद्र सरकार गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य बढ़ाने की बजाय चीनी मिलों को ब्या‍ज मुक्त‍ कर्ज, एक्स‍पोर्ट ड्यूटी में राहत और एथनॉल पर एक्सा‍इज ड्यूटी में छूट जैसी रियायतें देने वाली केंद्र सरकार ने अब चीनी मिलों को फायदा पहुुंचाने का नया रास्ता निकाला है। अब गन्ना किसानों को सरकार की ओर सीधे सब्सिडी दिए जाने की पहल की जा रही है जो गन्ना किसानों का ध्यान उनके बकाया भुगतान और पिछले कई साल से नहीं बढ़े दाम से हटाने की साजिश है।
इंदिरा जैसा हो सकता है मोदी सरकार का हाल: यशवंत सिन्‍हा

इंदिरा जैसा हो सकता है मोदी सरकार का हाल: यशवंत सिन्‍हा

वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया कि इस सरकार में कोई संवाद नहीं हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस सरकार का हाल इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस की उस सरकार की तरह हो सकता है जिसे आपातकाल के बाद मुंह की खानी पड़ी थी।
आतंकवाद एक कैंसर, तीखी छुरी से करना होगा इलाज: राष्ट्रपति

आतंकवाद एक कैंसर, तीखी छुरी से करना होगा इलाज: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 67वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में आगाह किया कि निर्णय और कार्यान्वयन में विलंब से विकास की प्रक्रिया का ही नुकसान होगा। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने हाल ही में पठानकोट वायु सेना स्टेशन पर हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि असहमति दूर करने का एक सभ्य तरीका संवाद है जो सही तरह से कायम रहना चाहिए लेकिन हम गोलियों की बौछार के बीच शांति पर चर्चा नहीं कर सकते।
राहुल का तंज, किसानों के आंसू भी देख लें मोदीजी

राहुल का तंज, किसानों के आंसू भी देख लें मोदीजी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड इलाके के महोबा में पदयात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को न सिर्फ उद्योगपतियों के बारे में बल्कि भोजन उपलब्ध कराने वाले किसानों और मजदूरों के बारे में भी सोचना चाहिए ।
गन्ना किसानों के मुद्दे पर आंदोलन तेज करेगी भाकियू

गन्ना किसानों के मुद्दे पर आंदोलन तेज करेगी भाकियू

उत्‍तर प्रदेश में गन्‍ना के उचित दाम और किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने राज्‍यव्‍यापी अांदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। कई दिनों के भाकियू के कार्यकर्ता मुजफ्फरनगर समेत यूपी के कई जिलों में धरना-प्रदर्शन पर बैठे हैं।
धन ही नहीं है

धन ही नहीं है

सरकार के सबसे बड़े प्रचार तंत्र दूरदर्शन के पास धन ही नहीं है। खबर है कि तीन महीने से दूरदर्शन सहित कई सरकारी चैनलों के लिए कोई धनराशि नहीं मिली है। यहां तक की दूरदर्शन के महानिदेशक का पद भी खाली पड़ा है।
मंदिर निर्माण के लिए संवाद जरूरी

मंदिर निर्माण के लिए संवाद जरूरी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की चर्चा भर से बुद्धिजीवियों एवं राजनीतिज्ञों का एक वर्ग छद्म आक्रोश व्यक्त करने लगता है। ऐसा ही तब हुआ जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल की श्रद्धांजलि सभा में राम मंदिर निर्माण के संकल्प को दोहराया। फिर क्या था। संघ पर सांप्रदायिकता, ध्रुवीकरण, न्यायालय की अवहेलना जैसे आरोप मढ़ दिए गए।
सरकार से जवाब मांग रही एक यात्रा

सरकार से जवाब मांग रही एक यात्रा

‘जवाबदेही यात्रा जवाब पूछे रे, बोलों क्यूं नि रे?’ यह बोल उस गीत के हैं जो एक अनूठी यात्रा के तहत गाया जा रहा है। इन दिनों राजस्थान में सूचना एवं रोजगार का अधिकार अभियान के बैनर तले यह यात्रा निकाली जा रही है। गीतों के जरिये सरकार से सवाल किए जा रहे हैं। जवाबदेही मांगी जा रही है। इस यात्रा का सरकार से सवाल है कि वह बनी तो जनता के लिए है लेकिन सही तरीके से काम नहीं होने की वजह से जवाबदेही तय क्यूं नहीं करती।
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