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अनुच्छेद 370 को लेकर बसपा के भीतर असंतोष, क्या समर्थन के लिए मायावती पर था दबाव

मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के...
अनुच्छेद 370 को लेकर बसपा के भीतर असंतोष, क्या समर्थन के लिए मायावती पर था दबाव

मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के एक सप्ताह बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पार्टी असंतोष से जूझती दिख रही है। बसपा के भीतर कई नेताओं का ऐसा मानना है  कि पार्टी प्रमुख मायावती को सरकार के कदम का समर्थन करने के लिए विवश किया गया था क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर वह ऐसा नहीं करती हैं तो परिणाम भुगतने पड़ेंगे।नोएडा में अपने भाई द्वारा अवैध रूप से अधिग्रहित की गई 400 करोड़ रुपये की जमीन जब्त करने के बाद मायावती आयकर विभाग के रडार पर थीं।

कोई खतरा मोल लेना नहीं चाहती मायावती

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि मायावती खतरा नहीं मोल लेना चाहेंगी क्योंकि उनके खिलाफ एक दशक पुराना भ्रष्टाचार का मामला फिर से खुलने का खतरा है।हालांकि, केंद्र का समर्थन करने का बसपा का कदम कई नेताओं को सही नहीं लगा क्योंकि उन्हें डर है कि इस कदम से दलितों और मुस्लिम समुदाय पीछे हटेंग। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में पार्टी के नेता कुंवर दानिश अली विरोध करने वाले पहले व्यक्ति थे।पार्टी में परेशानी के संकेत को देखते हुए मायावती ने बाद में दानिश अली की जगह जौनपुर के सांसद श्याम सिंह यादव को अपना लोकसभा नेता बनाया।

मुस्लिमों की नाराजगी का डर

बसपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय दुखी है और कई लोगों ने पार्टी के रुख के खिलाफ खुलकर अपनी नाराजगी जताई है।हालांकि, मायावती ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन से लद्दाख में विकास होगा और यह बौद्धों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी।बसपा के नए लोकसभा नेता श्याम सिंह यादव ने पार्टी में असंतोष की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने ‘आउटलुक’ को बताया, “सभी सदस्य इस फैसले में शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के विकास के अलावा कोई अन्य कारण नहीं है। हम चुनावी संभावनाओं के बारे में चिंता नहीं करते हैं। मेरे नेता ने एक बुद्धिमत्ता भरा निर्णय लिया है क्योंकि एससी और एसटी को इससे लाभ होगा।”क्षेत्रीय दलों के बीच, जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने में सरकार को समर्थन देने वाली बसपा ने कई लोगों को आश्चर्यचकित किया। वे इसे दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के समर्थन की अपनी मूल विचारधारा के विपरीत मानते हैं।

सपा के कदम से बढ़ी चुनौती

राजनीतिक पर्यवेक्षक नीरजा चौधरी का मानना है कि भाजपा को बसपा का समर्थन अपने निर्वाचन क्षेत्र में अपने कोर मतदाताओं को आकर्षित करेगा। वह कहती हैं, “यह संभव है कि मायावती को मुसलमानों के विरोध का सामना करना पड़े। खास तौर पर जब सपा ने अनुच्छेद 370 को कमजोर करने का विरोध किया है, बसपा को अपने मतदाताओं को समझाने की आवश्यकता है। हालांकि, दलित अनुच्छेद 370 कमजोर करने के समर्थन को लेकर इतने उत्सुक नहीं हो सकते।‘’ बसपा के अलावा  अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में  आम आदमी पार्टी (आप), बीजू जनता दल (बीजेडी), तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने भी सरकार का साथ दिया है।

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