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विश्वेश्वर हेगड़े कगेरी बने कर्नाटक विधानसभा के नए स्पीकर

कर्नाटक की राजनीति में पिछले दिनों आए भूचाल के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था। इसके बाद भाजपा ने इस राज्य की...
विश्वेश्वर हेगड़े कगेरी बने कर्नाटक विधानसभा के नए स्पीकर

कर्नाटक की राजनीति में पिछले दिनों आए भूचाल के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था। इसके बाद भाजपा ने इस राज्य की कमान संभाल ली है। केआर रमेश कुमार के इस्तीफा देने के बाद विश्वेश्वर हेगड़े को नया विधानसभा अध्यक्ष चुना गया है। विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने स्पीकर पद के लिए मंगलवार को नामांकन दाखिल किया था। इस दौरान कर्नाटक के सीएम येदियुरप्पा भी मौजूद थे। हाल ही में बीएस येदियुरप्पा ने सदन में बहुमत साबित किया है।

येदियुरप्पा के बहुमत परीक्षण में सफल होने के बाद तत्कालीन स्पीकर केआर रमेश द्वारा अपने पद से इस्तीफा दे दिया गया था। आज सदन ने अपना नया स्पीकर चुन लिया है। कर्नाटक विधानसभा को विश्वेश्वर हेगड़े कगेरी के तौर पर नया अध्यक्ष मिल गया है।

मंगलवार को विश्वेश्वर हेगड़े ने स्पीकर पद के लिए भरा था नामांकन

कर्नाटक में बीएस येदियुरप्‍पा के विधानसभा में विश्‍वास मत हासिल करने के बाद विधानसभा स्‍पीकर केआर रमेश कुमार ने इस्‍तीफा दे दिया था, जिसके बाद मंगलवार को स्‍पीकर के पद के लिए बीजेपी विधायक विश्‍वेशर हेगड़े कागेरी ने नामांकन भरा था। इस दौरान मुख्‍यमंत्री बीएस येदियुरप्‍पा भी उपस्थित थे।

विधानसभा में येदियुरप्पा ने विश्वास मत जीता

इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को विधानसभा में ध्वनि मत से विश्वास मत जीत लिया। विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने सदन में घोषणा की, ‘येदियुरप्पा ने ध्वनि मत से विश्वास प्रस्ताव जीता है, ना के मुकाबले हां की संख्या ज्यादा रही। विपक्ष के नेता (सिद्धारमैया) द्वारा वोटों के विभाजन की मांग नहीं की गई, मैं प्रस्ताव को पारित घोषित करता हूं, यह सदन में उनका बहुमत साबित करता है।"

 

बागियों के अयोग्य होने से भाजपा को फायदा

 

स्पीकर रमेश कुमार ने 25 जुलाई को 3 बागी विधायकों आर शंकर (केपीजेपी विधायक जिसने कांग्रेस के साथ विलय किया था) और रमेश जर्किहोली (कांग्रेस), महेश कुमठल्ली (कांग्रेस) को अयोग्य ठहराया था। वहीं, रविवार को बाकी बचे बागी विधायकों को भी अयोग्य घोषित कर दिया था।

 

भाजपा के पक्ष में था संख्या बल

 

कर्नाटक विधानसभा में कुल 225 विधायक हैं। 17 विधायक अयोग्य करार होने के बाद विधानसभा का आंकड़ा 208 पर रह गया है। येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 105 विधायक चाहिए था। जबकि एक निर्दलीय विधायक के समर्थन के साथ बीजेपी का आंकड़ा 106 विधायक पर पहुंच गया। जबकि कांग्रेस और जेडीएस के पास महज 100 विधायक ही हैं। कांग्रेस के पास 66 और जेडीएस के पास 34 विधायक हैं। नंबर से साफ था कि बीजेपी की राह बिल्कुल आसान है। इसी वजह से येदियुरप्पा ने आसानी से विश्वास मत हासिल कर लिया।

 

 

 

 

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