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सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण का संविधान संशोधन बिल राज्य सभा में पारित, राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार

आउटलुक टीम - JAN 09 , 2019
सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण का संविधान संशोधन बिल राज्य सभा में पारित, राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार
सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण का संविधान संशोधन बिल राज्य सभा में पारित, 165 वोट पड़े पक्ष में

नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का संविधान संशोधन बिल राज्यसभा में पारित हो गया है। बिल के पक्ष में 165 वोट और विपक्ष में 7 वोट पड़े। राज्य सभा में करीब दस घंटे बिल पर चर्चा हुई। इससे पहले बिल मंगलवार को लोकसभा में पारित हो चुका है। अब इस पर राष्ट्रपति की दस्तखत का इंतजार है।

राज्यसभा में विपक्ष समेत लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया। कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाए जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जताई। हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिए लाया गया है।

दिन भर क्या-क्या हुआ राज्य सभा में

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संशोधन बिल राज्यसभा में पेश किया। गहलोत ने बिल का परिचय देते हुए कहा कि इस बिल से लाखों-करोड़ों सामान्य वर्ग के गरीबों का सशक्तिकरण होगा और विचार-विमर्श के बाद ही यह बिल लाने का फैसला लिया है।

वहीं मंत्री के भाषण के बीच कांग्रेस के सांसद वेल में आकर नारेबाजी करते रहे। मंत्री ने कहा कि इस बिल को पारित किया जाए अगर चर्चा होगी तो मैं चर्चा से निकले हर सवाल का उत्तर देने के लिए तैयार हूं।

अभी लगेंगे और भी छक्के: रविशंकर प्रसाद

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल देरी से लाने के आरोपों पर कहा कि क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवरों में लगता है और यह पहला छक्का नहीं है अभी विकास और बदलाव के लिए अन्य छक्के भी आने वाले हैं। पहले कांग्रेस ने क्यों अगड़ी जातियों को आरक्षण नहीं दिया, अब हम दे रहे हैं तो आप सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संविधान के मौलिक अधिकार में परिवर्तन है और यह केंद्र ही नहीं बल्कि राज्य सरकार की नौकरी में भी लागू होता है। उन्होंने कहा कि समर्थन करना है तो खुलकर करिए। प्रसाद ने कहा कि आज संसद इतिहास बना रही है और हम सब यहां बैठकर बड़ा बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में हिम्मत है कि वो गरीबों के हर वर्ग की चिंता करती है। 

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सभी सदस्यों ने इस बिल का समर्थन किया है लेकिन कुछ न कुछ 'लेकिन' लगा दिया है। प्रसाद ने कहा कि संविधान के बुनियाद ढांचे को नहीं बदला गया है और उसमें आरक्षण और किसी तरह की सीमा का जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि जातिगत आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी की सीमा तय की है आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए कोई सीमा नहीं है। मौजूदा SC/ST और ओबीसी आरक्षण में किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, वो जस का तस रहेगा। मंत्री ने कहा कि संविधान में आर्थिक तौर पर कमजोर अगड़ी जातियों को आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

बाउंड्री पार नहीं करेगा ये छक्का: सतीश मिश्रा

बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि हमारी नेता बहम मायावती सदन के भीतर उच्च जातियों के गरीबों को आरक्षण का समर्थन कर चुकीं हैं। हमारी पार्टी भी आज इस बिल का समर्थन कर रही है। मिश्रा ने कहा कि अगर आप संविधान में आर्थिक आरक्षण के लिए संशोधन ला रहे हैं तो जातिगत आरक्षण के लिए भी 50 फीसदी से ऊपर आरक्षण लेकर आइए। उन्होंने कहा कि आप क्यों, कैसे और किन परिस्थितियों में बिल ला रहे हैं, इस पर तो सवाल पूछे ही जाएंगे। सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण के लिए क्या 4 साल में क्या किया है। मंत्री बताएं कि आबादी के हिसाब से पिछड़ों का आरक्षण कब से बढ़ा रहे हैं। मिश्रा ने कहा कि आपने आखिरी बॉल पर छक्क जरूर मारा है लेकिन वो बाउंड्री के पार नहीं जाना वाला है।

अगर 8 लाख कमाने वाला गरीब तो माफ हो इनकम टैक्स: कपिल सिब्बल

कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि जितनी नौकरियां पैदा नहीं हुई उससे कई ज्यादा नौकरियां चली गईं हैं। प्राइवेट और सरकारी दोनों ही क्षेत्र में नौकरियों की संख्या घटी है। देश का युवा आज नौकरी के लिए तरस रहा है और वो मौके उसे सिर्फ देश का विकास होने पर मिलेंगे। देश से निवेश लगातार जा रहा है, आप किसी मूर्ख बना रहे हैं। जनता के चेहरे पर रौनक लाने का यह रास्ता नहीं है और जब तक जनता के चेहरे पर रौनक नहीं आएगी तब तक आपके चेहरे पर भी रौनक नहीं आ सकती।

उन्होंने कहा कि संविधान बदलने जा रहे हैं लेकिन सरकार तब भी इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि सरकार के पास 5 साल थे, लेकिन क्यों जल्दी की जा रही है नहीं मालूम। सिब्बल ने कहा कि क्या बिल लाने से पहले सरकार ने कोई डाटा तैयार किया गया है। बिना किसी डाटा और रिपोर्ट के आप संविधान संशोधन करने जा रहे हो। एक तरफ 2.5 लाख कमाने वाले को इऩकम टैक्स देना पड़ता है और दूसरी ओर आप 8 लाख कमाने वाले को गरीब बता रहे हैं। आप इनकम टैक्स लिमिट को भी 8 लाख कर दीजिए।

अमित शाह और रामगोपाल यादव के बीच छिड़ी बहस

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव बोल रहे थे तब उनके और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बीच तीखी बहस छिड़ गई। रामगोपाल यादव ने कहा कि सरकार जो बिल ला रही है उससे कोई लाभ नहीं होगा, तब तुरंत अमित शाह ने उन्हें मुस्लिम आरक्षण की याद दिला दी।

रामगोपाल यादव ने कहा, ‘सरकार जो बिल ला रही है उससे कोई लाभ होने वाला नहीं है, जिन गरीबों के लिए सरकार बात कर रही है उन्हें लाभ ही नहीं मिलेगा। क्योंकि उन लड़कों की मेरिट जो आएगी वो तो काफी ऊपर आएगी। मतलब, जो मेरिट का आंकड़ा था वो आपने छोटा कर दिया, आपने मेरिट को शॉर्ट कट कर दिया और संख्या को बढ़ा दिया। एक साल बाद आपको असर दिखने लगेगा।’

रामगोपाल यादव के इसी वाक्य के साथ ही बीच में टोकते हुए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ‘मैंने बैठे हुए कोई टिप्पणी नहीं की, आप मेरिट की बात कर रहे हैं लेकिन जब आप मुस्लिम आरक्षण लाए तो तब क्या मेरिट की संख्या कम नहीं होगी। आप तो मुस्लिम आरक्षण ले आए, तो मेरिट के बच्चों का क्या होगा। आप अपना 2012 का मेनिफेस्टो देख लीजिए।’

 आरजेडी सांसद ने सदन में दिखाया झुनझुना

 आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि कैबिनेट से लेकर आखिरी पायदान तक जाति का असर पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आप सुप्रीम कोर्ट की सीमा तोड़ रहे हैं तो ओबीसी को भी बढ़ाकर आरक्षण दीजिए। झा ने कहा कि इस बिल के जरिए जातिगत आरक्षण को खत्म करने का रास्ता तय हो रहा है। उन्होंने कहा कि कानूनी और संवैधानिक तौर पर यह बिल खारिज होता है। झा ने कहा कि आरक्षण देना है तो निजी क्षेत्र में भी दीजिए, वहां हाथ लगाने से क्यों डर रहे हैं। आबादी के हिसाब से आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने झुनझुना दिखाते हुए कहा कि आमतौर पर ये बजता है लेकिन इस दौर में यह सरकार के पास है जो सिर्फ हिलता है बजता नहीं है।

AIADMK ने किया बिल का विरोध, सदन से वॉकआउट

AIADMK के सांसद ए. नवनीतकृष्णन ने 10 फीसदी आरक्षण बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को इस बिल से सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि संसद के कॉन्स्टिट्यूशनल असेंबली नहीं है और न ही इसे पास ऐसी ताकत है, ऐसा मैं नहीं कह रहा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। उन्होंने कहा कि उनका विनम्र अनुरोध बस इतना है और जो कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से भी स्पष्ट है कि संसद या कोई भी कानून संविधान के मूल ढांचे को नहीं बदल सकती है। उन्होंने आगे कहा कि इसी आधार पर इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी जाएगी और यह सुप्रीम कोर्ट से रिजेक्ट हो जाएगा। संविधान हमेशा से संसद से ऊपर है और इसका उच्च स्थान बरकरार रहना चाहिए। तमिलनाडु में 69 फीसदी आरक्षण लागू है और यह 10 फीसदी आरक्षण वहां के लोगों के मूल अधिकारों का भी उल्लंघन होगा। साथ ही यह संविधान के मूल ढांचे को भी चुनौती देगा। बिना आंकड़ों के 10 फीसदी आरक्षण को लागू करना लोगों के मूल अधिकारों का उल्लंघन होगा। अपनी बात कहने के बाद उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया।

नौकरी है नहीं आरक्षण का क्या होगा: रामगोपाल यादव

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि सरकार यह बिल कभी भी ला सकती थी, लेकिन सरकार का लक्ष्य आर्थिक रूप से गरीब सामान्य वर्ग नहीं बल्कि 2019 का चुनाव है। अगर इनकी दिल में ईमानदारी होती तो 3-4 साल पहले यह बिल आ जाता। यादव ने कहा कि यह बिल सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ के खिलाफ है और कोर्ट इसे अपहोल्ड भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि नौकरियां हैं नहीं ऐसे में कुछ बाद आरक्षण की बात भी बेमानी हो जाएगी। यादव ने कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि सरकार क्षेत्र में ठेके पर काम हो रहा है, नौकरियां लगातार घट रही हैं।

हम बिल का समर्थन करते हैं: कांग्रेस

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि हमारी पार्टी बिल के विरोध में नहीं है लेकिन सवाल व्यवस्था का है और इसके बारे में सदन को जानने का पूरा हक है। शर्मा ने कहा कहा कि बीएसी की ओर से समयसीमा तय नहीं की गई है, यह आपको सदन के भीतर बताना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पौने पांच साल सरकार की नींद टूटी है और सभी जानते हैं कि चुनाव की वजह से आप यह बिल लेकर आए हैं।

आनंद शर्मा ने कहा कि संविधान संशोधन से गरीब का पेट नहीं भरेगा, उसको न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसान के लिए, नौजवान के लिए जो वादे किए थे, उनका क्या हाल हो रहा है। सरकार को जल्दी दिखानी थी तो महिला आरक्षण बिल पर दिखाते, क्यों सरकार चार साल बाद भी यह बिल लेकर नहीं आई। राजनीति के लिए आप तीन तलाक बिल लाए लेकिन बाकी महिलाओं को न्याय कब मिलेगा। उन्होंने कहा कि जनता एक बार वादों में बहक जाती है लेकिन बाद में हिसाब जरूर मांगती है लेकिन अब तो आपका हिसाब देने का वक्त है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बिल की पक्षधर है क्योंकि हमने सामाजिक न्याय और खासकर अगड़ी जातियों के लिए न्याय की आवाज उठाई थी। हम इस बिल का समर्थन करते हैं।

आनंद शर्मा ने कहा कि नौकरियां लगातार कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएसयू में तीन साल के दौरान 97 हजार नौकरियां चली गई हैं। राज्यों के आंकड़े अगर सरकार देगी तो बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि लोगों के मुताबिक नौकरियां देने में शायद 800 साल लग जाएंगे। देश के लोगों को आप इतना बड़ा सपना दिखा रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। विकास की परिधि से बाहर रह गए लोगों को जोड़ना सरकारों का धर्म है, लेकिन इस विषय पर विस्तार से चर्चा होने की जरूरत थी। इसके लिए समाज के लोगों से भी बात की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सरकार की अभी इस बिल में कई बाधाओं का सामना करना है, क्योंकि यह संविधान का अपमान करने की एक सोझी-समझी साजिश है।

वहीं कांग्रेस के सांसद मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि किसी बिल को पेश से दो दिन पहले उसकी कॉपी देनी पड़ती है, उन्होंने कहा कि एक दिन में बिल पर वोटिंग और उसका परिचय नहीं दिया जाता है। मिस्त्री ने कहा कि सदन जानना चाहता है कि सरकार को इस बिल को लाने की इतनी जल्दी क्यों है।

यह मध्य रात्रि की डकैती है: आरजेडी

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि यह मध्य रात्रि की डकैती है और हम इस बिल का विरोध करते हैं। ओबीसी और एससी की आबादी पर चुप्पी है और संविधान के बुनियादी ढांचे के साथ छेड़छाड़ हो रही है।

वहीं सीपीआई सांसद डी राजा ने कहा इस तरह के बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाना चाहिए क्योंकि यह काफी अहम संविधान संशोधन बिल है। वहीं कनिमोझी ने कहा कि प्रस्ताव पर चर्चा के बगैर इस बिल पर चर्चा नहीं की जा सकती।

'कांग्रेस जानबूझकर कर रही विरोध'

भाजपा सांसद विजय गोयल ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी सांसद जानबूझकर इस बिल को रोकने के लिए हंगामा कर रहे हैं। सदन का समय खराब कर कांग्रेस अप्रत्यक्ष रूप से इसका विरोध कर रही है। मुझे लगता है कि बिल पेश हो चुका है इसलिए सदन में इस पर चर्चा होनी चाहिए।

लोकसभा में मिला था विपक्ष का साथ

लोकसभा में संशोधित बिल के समर्थन में जहां 323 वोट पड़े वहीं, विरोध में महज 3 वोट पड़े। इस विधेयक को लेकर लोकसभा में मंगलवार को करीब 5 घंटे तक चली बहस में लगभग 17 दलों ने इसका पक्ष लिया, लेकिन किसी ने भी इसका खुलकर विरोध नहीं किया। हालांकि कई सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की नीयत पर प्रश्न जरूर भी खड़े किए। कांग्रेस, बसपा, सपा, तेदेपा और द्रमुक सहित विभिन्न पार्टियों ने इसे भाजपा का चुनावी स्टंट करार दिया। कांग्रेस ने कहा कि वह आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए विधेयक के समर्थन में है, लेकिन उसे सरकार की मंशा पर शक है। पार्टी ने कहा कि सरकार का यह कदम महज एक 'चुनावी जुमला' है और इसका मकसद आगामी चुनावों में फायदा हासिल करना है।

ये है सरकार का फैसला

मोदी कैबिनेट ने सोमवार को सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया। इसके तहत जिन लोगों को अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं मिलता था यानी जो अनारक्षित श्रेणी में आते थे उन लोगों को इस फैसले से सरकारी नौकरी और शैक्षणिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा। 

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