Home राजनीति राष्ट्रीय दल कर्नाटक के भाजपा विधायक की चेतावनी- न करें सीएए का विरोध, हम 80 तो आप हैं 18 फीसदी

कर्नाटक के भाजपा विधायक की चेतावनी- न करें सीएए का विरोध, हम 80 तो आप हैं 18 फीसदी

आउटलुक टीम - JAN 04 , 2020
कर्नाटक के भाजपा विधायक की चेतावनी- न करें सीएए का विरोध, हम 80 तो आप हैं 18 फीसदी
कर्नाटक के भाजपा नेता ने कहा- हम 80 फीसदी, आप 18, न करें सीएए का विरोध
ANI
आउटलुक टीम

कर्नाटक के भाजपा विधायक सोमशेखर रेड्डी ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सीएए का विरोध करने वालों को बहुसंख्यकों से सावधान रहना चाहिए और कानून का विरोध उनके लिए अच्छा नहीं होगा। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

भाजपा विधायक सोमशेखर रेड्डी ने शुक्रवार को कहा, "यह उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो सीएए का विरोध कर रहे हैं। हम 80 फीसदी हैं और आप (मुस्लिम) 18 फीसदी हैं। सोचिए कि अगर हम सत्ता संभालते हैं तो क्या होगा।" उन्होंने कहा, "जब आप इस देश में रहते हैं, तब बहुमत से सावधान रहें। यह हमारा देश है। यदि आप यहां रहना चाहते हैं, तो आपको ऐसा करना होगा, जैसा कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री ने कहा, देश की परंपराओं का पालन करें।"

कानून का विरोध करना नहीं होगा अच्छा

रेड्डी ने यह भी चेतावनी दी कि "प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह द्वारा बनाए गए" कानून का विरोध करने वालों के लिए यह "अच्छा नहीं" होगा। उन्होंने कहा, "अगर आप चाहें, तो आप पाकिस्तान जा सकते हैं। हमारे पास कोई मुद्दा नहीं है। जानबूझकर, हम आपको नहीं भेजेंगे।"  रेड्डी ने अल्पसंख्यक समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें हिंदुओं के साथ सौहार्द से रहना चाहिए। "यदि आप दुश्मनों के रूप में कार्य करेंगे, तो हमें भी दुश्मनों की तरह प्रतिक्रिया देनी चाहिए।"

पिछले नहीं से हो रहा है विरोध

इससे पहले बेंगलुरु के भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने कथित तौर पर सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शकारियों को 'पंचरवाला' कहा था। दिसंबर महीने से पूरे देश में नए नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों में लगभग दो दर्जन लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। बता दें कि यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान, और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देता है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे। हालांकि, यह मुस्लिम शरणार्थियों को बाहर करता है।

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