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सपा और बसपा गठबंधन को सम्मान, कांग्रेस पूरी क्षमता से यूपी में लड़ेगी चुनाव: राहुल गांधी

आउटलुक टीम - JAN 13 , 2019
सपा और बसपा गठबंधन को सम्मान, कांग्रेस पूरी क्षमता से यूपी में लड़ेगी चुनाव: राहुल गांधी
सपा और बसपा गठबंधन को सम्मान, कांग्रेस पूरी क्षमता से यूपी में लड़ेगी चुनाव: राहुल गांधी

2019 लोकसभा चुनाव के लिए उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा द्वारा कांग्रेस को साथ लिए बगैर ही आपस में गठबंधन करने का ऐलान किया है। इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उनके मन में इन दोनों दलों के नेताओं के प्रति बड़ा सम्मान है और वे जो भी चाहें, उन्हें वह करने का हक है। लेकिन उनकी पार्टी पूरी क्षमता के साथ राज्य में चुनाव लड़ेगी।

दुबई में पत्रकार वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि बसपा और सपा ने राजनीतिक निर्णय लिया है। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम कैसे उत्तरप्रदेश में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करते हैं? हम पूरी क्षमता के साथ लड़ेंगे। कांग्रेस पार्टी के पास उत्तरप्रदेश के लोगों को पेशकश करने के लिए काफी कुछ है। बसपा और सपा के संबंध में मैं कहना चाहता हूं कि मेरे मन में बसपा और सपा के नेताओं के प्रति बड़ा सम्मान है और वे जो भी चाहें, उन्हें करने का हक है।

बसपा और सपा 38-38 सीटों पर लड़ेंगी चुनाव

कभी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहीं सपा और बसपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए उत्तरप्रदेश में आपस में गठबंधन करने की शनिवार को घोषणा की और उन्होंने कांग्रेस को गठबंधन से दूर रखा है। बसपा और सपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।

अमेठी और रायबरेली में सपा-बसपा नहीं उतारेगी उम्मीदवार 

हालांकि बसपा और सपा ने कहा कि वे अमेठी और रायबरेली में उम्मीदवार नहीं उतारेंगी। अमेठी का प्रतिनिधित्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और रायबरेली का प्रतिनिधित्व संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी कर रही हैं।

दुबई में राहुल ने और क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष संयुक्त अरब अमीरत की यात्रा पर है। यात्रा के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि भारत कई विचारधारा आत्मसात कर सकता है तथा लोगों पर कोई विचारधारा नहीं सौंप सकता है। उन्होंने आम चुनाव से पहले वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तौर पर आईएमटी दुबई विश्वविद्यालय के छात्रों से परिसंवाद में कहा,‘‘भारत में विचार आते हैं। भारत ने विचारों को गढ़ा है और विचारों ने भारत को गढ़ा है। अन्य लोगों को सुनना भी भारत का एक विचार है।’’

गांधी ने कहा, ‘‘सहिष्णुता हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। किंतु पिछले साढ़े चार वर्षों में हमारे घर (देश)में जो हुआ, उसे देखकर काफी दुख होता है। हमने असहिष्णुता, काफी क्रोध तथा समुदायों के बीच खाई देखी है। यह सत्तापक्ष में बैठे लोगों की मानसिकता से पनपा है।’’

उन्होंने कहा कि अगर नेतृत्व सहिष्णु होता है तो वह सहिष्णु तरीके से काम करेगा और उस संदेश को फैलाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत आमतौर पर सहिष्णु है, हम दूसरे लोगों को सुनते हैं और हमें फिर उस ओर लौटने की जरूरत है।’’ गांधी ने कहा कि भारत भूगोल से कहीं अधिक हैं। वह दुनिया को देखने का एक विशेष तरीका है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारत को महज उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं करना चाहता।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हम एक ऐसा भारत पसंद नहीं करेंगे जहां पत्रकारों को गोली मार दी जाती है, जहां लोगों की हत्या इसलिए कर दी जाती है क्योंकि उन्होंने अपनी बात रखी। ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें हम बदलना चाहते हैं, आने वाले चुनाव में यही चुनौती है।’’

गांधी ने कहा कि कृषि के क्षेत्र को मूल रूप से परिवर्तन की जरुरत है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी बैंकिंग प्रणाली के पुनर्गठन की जरुरत है ताकि छोटे और मध्य उद्यमों को बड़ी कंपनियां बनने के लिए वित्तीय संसाधन मिल सकें। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं।

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