Home राजनीति राष्ट्रीय दल राहुल की किसान पदयात्रा : गन्ना किसानों को कर्ज माफी की उम्मीद

राहुल की किसान पदयात्रा : गन्ना किसानों को कर्ज माफी की उम्मीद

SEP 07 , 2016
राहुल की किसान पदयात्रा : गन्ना किसानों को कर्ज माफी की उम्मीद
राहुल की किसान पदयात्रा : गन्ना किसानों को कर्ज माफी की उम्मीद
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तभी सड़क पर जमा हुए युवकों का एक समूह दिखा। यादव से पूछने पर कि समूह मुख्य रूप से क्षेत्र में अपराध में कमी लाने के लिए मोदीजी और योगी आदित्यनाथ को मौका देने के इच्छुक क्यों लग रहा है, उन्होंने कहा, मुंडे मुंडे मतिर भिन्ना :हर इंसान का नजरिया अलग होता है:।

लेकिन बीएएसी तृतीय वर्ष का छात्र 21 साल का पवन शर्मा मोदी के प्रति व्यक्तिगत रुझान होने के बावजूद राहुल के वादे को लेकर आशान्वित लगा। राहुल सभा दर सभा दोहरा रहे हैं कि संप्रग सरकार ने जिस तरह अपने पहले कार्यकाल के आखिरी दिनों में कृषि रिण माफ कर दिए थे, कांग्रेस उसी तरह इस बार भी कृषि रिण माफ कर देगी। पवन ने कहा, मेरे पिता एक गन्ना किसान हैं इसलिए मुझे किसानों की पीड़ा का पता है। लेकिन इस तरह के वादे अकसर खोखले साबित होते हैं। काले धन से जुड़ा मोदीजी का वादा भी अब तक ढाक के तीन पात साबित हुआ है लेकिन कम से कम हम कोशिशें होते देख सकते हैं।

साठ-बासठ साल की उम्र के अंबिका चौधरी बढ़ते अपराधों को लेकर दूसरे लोगों की तरह ही चिंतित हैं और उनका कहना है कि राज्य में अपराधों खासकर लूटपाट तथा छीना भुापटी के मामलों में चिंताजनक रूप से वृद्धि हुई है।राहुल की किसान पदयात्रा पहले चरण में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में घूमेगी। इसका उद्देश्य निराश किसानों का समर्थन हासिल करना है जिससे कांग्रेस को लगता है कि 2017 के चुनाव में पार्टी की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।कुशीनगर और देवरिया पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सूखाग्रस्त घोषित किए गए 50 जिलों में शामिल थे।

राहुल के साथ यात्राा में शामिल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने किसानों से संपर्क की पार्टी की कोशिश के बारे में समझाते हुए कहा कि यह 403 सदस्यीय राज्य विधानसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के हिसाब से बेहद महत्वपूर्ण कदम है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय कांग्रेस के केवल 29 सदस्य हैं। उन्होंने कहा, 2008 में कृषि रिण की माफी से उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में किसानों को अधिकतम फायदा मिला। इसी तरह इस बार भी यह हमारा तुरूप का पत्ता साबित हो सकता है। इस बात की अनदेखी नहीं की जा सकती कि गन्ना किसानों का संकट वास्तविक है और मिलों पर उनके हजारों करोड़ रुपए बकाया हैं। भाषा एजेंसी 

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