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मोदी सरकार ने संसदीय परंपराओं को किया तार-तारः कांग्रेस

NOV 13 , 2017

संसद के शीतकालीन सत्र में जानबूझकर देरी करने का आरोप कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया है। पार्टी ने कहा है ‌कि एक राज्य के चुनाव के लिए देश की संसदीय परंपराओं को सरकार दरकिनार कर रही है। आमतौर पर नवंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र का अभी तक कोई अता-पता नहीं है और इसे  निजी स्वार्थों के लिए स्थगित कर दिया गया है।

पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जब देश का संविधान बना था तब उसकी प्रस्तावना में दो बातों प्रमुख थी। एक थी देश की प्रभुसत्ता और दूसरा लोकतंत्र। कुछ दशकों बाद समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को भी जोड़ दिया गया। लोकतंत्र देश की अंतरात्मा है। शायद भारत अकेला मुल्क है जहां 1947 में अंग्रेजी साम्राज्यवाद से आजाद होने के बाद लोकतांत्रिक परंपराएं बरकरार हैं। इन्हीं परंपराओँ पर हमें गौरव है।

उन्होंने कहा कि संसद के कैलेंडर की रचना में तीन सत्र शामिल किए गए हैं। आमतौर पर नवंबर के तीसरे सप्ताह में संसद का शीतकालीन सत्र होता रहा है। परंपरा रही है कि इसकी अधिकृत सूचना 15 दिन पहले सांसदों को भेजी जाती थी, लेकिन अब तक इसकी कोई सूचना नहीं मिली है। सरकार बताए कि सत्र कब बुलाया जा रहा है और क्या इस मामले में संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी की कोई बैठक हुई है। इस बैठक में किन तारीखों की सिफारिश की गई है। किसी प्रदेश के चुनाव के लिए सत्र टालने से क्या लोकतंत्र की मर्यादाएं तार-तार नहीं हुई हैं?

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उन्होंने कहा कि देश के सामने कई अहम मुद्दे हैं इसमें नोटबंदी, जीएसटी, जम्मू कश्मीर के संवेदनशील हालात,  पाकिस्तान को लेकर सरकार की नीति, न्यायिक नियुक्तिों में लेन-देन, डोकलाम में चीन के साथ विवाद, भारतीय अर्थव्यवस्था की गिरती दशा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करना जरूरी है। बिना संसद  बुलाए इन पर चर्चा नहीं की जा सकती।  क्या सरकार संसद से डर रही है, क्या मैदान छोड़कर भाग रही है? भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए यह चिंताजनक विषय है कि किसी प्रदेश चुनाव पर संसद की कार्रवाई का प्रभाव न पड़ जाए इसलिए सत्र टाला जा रहा है। हम मांग करते हैं कि सरकार सत्र बुलाए और देश की बुनियादी समस्याओँ पर विचार करे।

गुजरात में राहुल गांधी के धार्मिक स्थानों पर जाने के सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि धार्मिक आस्था किसी की बपौती नहीं है जो कोई किसी से पूछकर कहीं जाएगा। यह भाजपा की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। भारत की परंपरा समावेशी और उदार है जिसे धर्म के ठेकेदार नहीं समझ पाएंगे। 


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