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नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ललित मोदी से पुराना रिश्ता-कांग्रेस

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर आईपीएल टीम की निविदाओं के फेरबदल को लेकर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने दस्तावेजों के साथ कहा कि नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब आईपीएल की बोलियों में एकतरफा शर्तें रखवाने का काम किया। गौरतलब है कि मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष और अमित शाह उपाध्यक्ष थे।
नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ललित मोदी से पुराना रिश्ता-कांग्रेस

कांग्रेस नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उद्योगपति गौतम अडानी को आईपीएल की फ्रेंचाइजी दिलाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से निविदाओं में एकतरफा शर्तें रखवाने का काम किया। कपिल सिब्बल ने कहा कि ललित मोदी प्रकरण में प्रधानमंत्री की चुप्पी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि कहीं न कहीं दाल में कुछ काला है। ‌कांग्रेस ने जो दस्तावेज जारी किए हैं उसके मुताबिक साल 2009 में अडानी समूह को गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन का ‘कमर्शियल पार्टनर’ बनाया गया। उसी समय राजस्थान रॉयल्स के उपाध्यक्ष शान्तनु चारी ने आईपीएल कमिश्नर- ललित मोदी को पत्र लिखकर नरेंद्र मोदी के साथ बैठक करके ‘संबंध विकसित करने’ की बात कही। इस मेल की प्रतिलिपि राजस्थान रॉयल्स के मालिक सुरेश चेलाराम को भी भेजी गई, जो ललित मोदी के जीजा हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह मुंबई में बीसीसीआई की एजीएम में शामिल हुए। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन को 2010 के आईपीएल सीज़न के लिए चार आईपीएल मैचों को आयोजित करने का काम मिल गया। उसके बाद राजस्थान रॉयल्स ने सरदार पटेल स्टेडियम, मोटेरा, अहमदाबाद को अपने ‘गृह स्थल’ के रूप में अपनाया। और राजस्थान रॉयल्स ने 2010 के आईपीएल सीज़न के लिए मोटेरा अहमदाबाद के स्टेडियम में अपने सात में से चार आईपीएल मैच आयोजित किए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर पूरे प्रकरण को देखा जाए तो ललित मोदी और अमित शाह के बीच गहरे संबंध थे। सिब्बल ने कहा कि जो दस्तावेज हैं वह बता रहे हैं कि 7 मार्च, 2010 को जब आईपीएल टीम की बोलियां बीसीसीआई गवर्निंग काउंसिल के द्वारा निरस्त की गईं, तब ललित मोदी और अमित शाह एक दूसरे से निरंतर संपर्क में थे। उन्होने कहा कि अब प्रधानमंत्री को इस पूरे प्रकरण से अपनी चुप्पी तोड़नी होगी। सिब्बल ने बताया कि वित्तमंत्री अरुण जेटली, ने 10 जून 2013 को जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किया था। यानी सबकुछ जानते हुए जेटली ने अपने पार्टी के नेताओं को बचाने का काम किया। 

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