Home राजनीति राष्ट्रीय दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की युवा नेताओं को नसीहत- अपनी विरासत का अपमान नहीं करें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की युवा नेताओं को नसीहत- अपनी विरासत का अपमान नहीं करें

आउटलुक टीम - AUG 02 , 2020
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की युवा नेताओं को नसीहत- अपनी विरासत का अपमान नहीं करें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की युवा नेताओं को नसीहत-अपनी विरासत का अपमान नहीं करें
आउटलुक टीम

कांग्रेस में वरिष्ठ और नए नेताओं में गतिरोध की खबरों के बीच पार्टी के अनुभवी नेताओं ने शनिवार को अपने नौजवान साथियों को सलाह दी है कि अपनी खुद की विरासत का अपमान नहीं करें और ऐसा करके वे सिर्फ जनता की नजरों में पार्टी को कमजोर करने की भाजपा की सोच को ही बढ़ावा देंगे।

कई पूर्व केंद्रीय मंत्रियों ने पार्टी के नेताओं को आगाह करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रवृत्ति ऐसे समय में कांग्रेस को बांट देगी जब एकजुटता की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी को अतीत की हारों से सीख लेनी चाहिए और वैचारिक शत्रुओं के मनमाफिक चलने के बजाय पार्टी में नई जान डालनी चाहिए।

कांग्रेस नीत यूपीए के बचाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि कोई अपनी ही विरासत का अपमान नहीं करता। इससे पहले पार्टी के युवा नेता राजीव सातव ने कांग्रेस के राज्यसभा सदस्यों की हाल ही में हुई एक बैठक में यूपीए के कामकाज पर सवाल उठाया था। राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता शर्मा ने कहा, 'कांग्रेस नेताओं को यूपीए की विरासत पर गर्व होना चाहिए। कोई पार्टी अपनी ही विरासत को अपमानित नहीं करती। भाजपा से परोपकार की या हमें श्रेय देने की उम्मीद नहीं की जा सकती, मगर हमारे अपने लोगों को सम्मान देना चाहिए।'

एक और नेता ने कहा कि दुखद है कि कांग्रेस में कुछ तत्व जाने अनजाने जनता की निगाहों में पार्टी को आपसी गतिरोध में उलझा दिखाने की भाजपा की सोच को ही बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि सभी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के विरुद्ध एकजुट दिखना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्विटर पर लिखा, 'भाजपा 2004 से 2014 तक 10 साल सत्ता से बाहर रही। मगर उन्होंने उस समय की हालत के लिए कभी अटल बिहारी वाजपेयी या उनकी सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया।'

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में दुर्भाग्य से कुछ दिग्भ्रमित लोग एनडीए और भाजपा से लड़ने के बजाय डॉ मनमोहन सिंह नीत यूपीए सरकार पर छींटाकशी कर रहे हैं। जब एकता की आवश्यकता है, वे विभाजन कर रहे हैं।' बहस और आगे बढ़ गयी जब तिवारी के जवाब में कांग्रेस के पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा ने कहा, 'बहुत सही कहा, मनीष। 2014 में पद छोड़ते समय डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था, इतिहास मेरे प्रति उदार रहेगा।'

देवड़ा ने ट्वीट में कहा, 'क्या कभी उन्होंने कल्पना भी की होगी कि उनकी ही पार्टी के कुछ लोग देश के प्रति उनकी सालों की सेवा को खारिज कर देंगे और उनकी विरासत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेंगे। वह भी उनकी उपस्थिति में?' एक अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने तिवारी और देवड़ा के सुर में सुर मिलाते हुए कहा, 'यूपीए के क्रांतिकारी 10 सालों को दुर्भावनापूर्ण विमर्श के साथ कलंकित कर दिया गया। हमारी हार से सीखने को बहुत सारी बातें हैं और कांग्रेस के पुनरुद्धार के लिए बहुत मेहनत करनी होगी। मगर हमारे वैचारिक शत्रुओं के मनमाफिक चलने पर ऐसा नहीं हो सकता।'

सातव ने इस बहस को उस वक्त पैदा किया जब उन्होंने पूर्व मंत्रियों कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम से इतनी पुरानी बड़ी पार्टी के कमजोर होने पर आत्मचिंतन को कहा।' आनंद शर्मा ने कहा कि इतिहास ईमानदारी के सााथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के अपार योगदान को याद रखेगा।

कांग्रेस में युवा और अनुभवी नेताओं के बीच विभाजन अमूमन सामने आता रहा है जो पिछले कुछ महीनों में पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने और राजस्थान में सचिन पायलट के विद्रोह से चरम पर पहुंच गया।



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