Home राजनीति राष्ट्रीय दल अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए उल्टी-सीधी थ्योरी नहीं, ठोस नीति की जरूरत: राहुल गांधी

अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए उल्टी-सीधी थ्योरी नहीं, ठोस नीति की जरूरत: राहुल गांधी

आउटलुक टीम - SEP 12 , 2019
अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए उल्टी-सीधी थ्योरी नहीं, ठोस नीति की जरूरत: राहुल गांधी
राहुल गांधी बोले- अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए दुष्प्रचार नहीं, ठोस नीति की जरूरत
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आउटलुक टीम

देश में आर्थिक स्लोडाउन को लेकर गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने आर्थिक मंदी (आर्थिक स्लोडाउन) पर ट्वीट कर कहा कि समस्या को स्वीकार करना जरूरी है।

एक अखबार में छपे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साक्षात्कार का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पहले सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि अर्थव्यवस्था को लेकर समस्या है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘इस समय उल्टी-सीधी थ्योरी, मनगढ़ंत खबरों और मिलेनियल्स के बारे में मूर्खतापूर्ण बातें करने की जरूरत नहीं है बल्कि भारत को एक ठोस नीति की जरूरत है ताकि अर्थव्यवस्था की स्थिति को ठीक किया जा सके।’

गांधी ने कहा, ‘पहले स्वीकार करिए कि हमारे सामने समस्या है। यह स्वीकार करना ही अच्छी शुरुआत होगी।’ उन्होंने मनमोहन सिंह के जिस साक्षात्कार का हवाला दिया उसमें पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा है कि नोटबंदी और गलत ढंग से जीएसटी लागू करने के कारण अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब हुई है।

भाजपा सरकार अर्थव्यव्स्था के मामले में इतनी भ्रमित क्यों है: प्रियंका

इससे पहले राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट करके कहा, 'चुनाव के पहले बोला गया कि ओला-उबर ने रोजगार बढ़ाए हैं। अब बोला जा रहा है कि ओला-उबर की वजह से ऑटो सेक्टर में मंदी आ गई है।' प्रियंका ने सवाल किया, 'भाजपा सरकार अर्थव्यव्स्था के मामले में इतनी भ्रमित क्यों है?'

जानें क्या कहा था सीतारमण ने

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा था कि ज्यादातर लोगों की सोच में बदलाव आया है जो अब मासिक किस्तों की अदायगी करते हुए एक कार खरीदने की जगह ओला और उबर जैसे टैक्सी सेवा का लाभ लेना पसंद करते हैं और यह आटो मोबाइल क्षेत्र में मंदी के कई कारणों में से एक है।

देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर पांच प्रतिशत रह गयी थी। इसे आर्थिक मंदी के तौर पर देखा जा रहा है। मार्च 2013 के बाद यह सबसे धीमी गति की वृद्धि दर है, जब जीडीपी का 4.7% फीसदी थी।

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