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सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, VVPAT पर 21 विपक्षी दलों ने दायर की थी याचिका

आउटलुक टीम - MAR 15 , 2019
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, VVPAT पर 21 विपक्षी दलों ने दायर की थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस
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आउटलुक टीम

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और 50 फीसदी वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) पर्चियों के मिलान की मांग को लेकर दाखिल की गई 21 विपक्षी दलों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की और इस दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस भी जारी किया। साथ ही इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अपनी मदद के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त करने को भी कहा। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।

ये है विपक्षी दलों की मांग

21 विपक्षी दलों की मांग है कि लोकसभा चुनावों के नतीजे से पहले कम से कम 50% वोटों का मिलान वीवीपैट की पर्चियों से किया जाए। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर गुरुवार को 10 से ज्यादा विपक्षी दलों के नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, एसपी, बीएसपी, आम आदमी पार्टी और टीडीपी समते 21 विपक्षी दलों ने एक याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं ये नाम है शामिल  

याचिकाकर्ताओं में एनसीपी के शरद पवार, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, तृणमूल के डेरेक ओ. ब्रायन, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, सपा के अखिलेश यादव, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, द्रमुक के एमके स्टालिन, सीपीएम के टीके रंगराजन, राजद के मनोज कुमार झा, एनसी के फारुख अब्दुल्ला, सीपीआई के एसएस रेड्डी, जेडीएस के दानिश अली, रालोद के अजीत सिंह, एआईडीयूएफ के मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल, हम के जीतन राम मांझी, प्रो. अशोक कुमार सिंह, तेदेपा, 'आप' आदि शामिल हैं।

पहले भी उठाए थे ईवीएम पर सवाल

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि उन्हें ईवीएम की प्रमाणिकता पर संदेह है, जो चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता पर भी संशय पैदा करता है। ऐसे में आयोग यह अनिवार्य करे कि 50% ईवीएम मतों का मिलान वीवीपैट पर्चियों से किया जाए। 21 विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने चुनाव आयोग को भी ज्ञापन सौंपा। नवंबर-दिसंबर में पांच विधानसभाओं में हुए चुनाव के दौरान भी इन पार्टियों के द्वारा ईवीएम को लेकर सवाल उठाए गए थे।

5 फरवरी को इन दलों ने चुनाव आयोग से की थी यह मांग

इससे पहले इन दलों ने गत माह 5 फरवरी को चुनाव आयोग से यह मांग की थी, लेकिन आयोग ने गत सप्ताह चुनावों की घोषणा करते हुए वीवीपैट मिलान का प्रतिशत बढ़ाने से आदेश देने से इनकार कर दिया था। आयोग ने कहा था कि इस बारे में भारतीय सांख्यिकी संस्थान से राय ली जा रही है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

आयोग ने यह भी कहा था कि इस संबंध में मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चुनावों में फिलहाल एक विधानसभा सीट पर एक ईवीएम के मतों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान किया जाता है।

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