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मप्र में फीका पड़ा शिवराज का जादू, चित्रकूट में भाजपा की करारी हार!

मध्यप्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले क्या मुख्यमंत्री शिवराज ‌सिंह चौहान का...
मप्र में फीका पड़ा शिवराज का जादू, चित्रकूट में भाजपा की करारी हार!

मध्यप्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले क्या मुख्यमंत्री शिवराज ‌सिंह चौहान का जादू कम हो रहा है? यह सवाल चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से खड़ा हुआ है।

यहां कांग्रेस उम्‍मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने भाजपा उम्‍मीदवार शंकर दयाल त्रिपाठी को 14,333 वोटों से हरा दिया है। 14वें दौर की मतगणना पूरी होने के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर 16,082 वोटों की मजबूत बढ़त बना ली थी।

इसी साल 29 मई को कांग्रेस विधायक प्रेम सिंह (65) के निधन के कारण यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में कांग्रेस से यह सीट छीनने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। लेकिन, उसके प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी बड़े अंतर से चुनाव हारते दिख रहे हैं।

आखिरी राउंड की वोटों की गिनती चल रही है। कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी को अब तक 65,742 वोट मिले हैं। त्रिपाटी 51,339 वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर चल रहे हैं। नौ नवंबर को यहां वोट डाले गए थे। 65 फीसद मतदान हुआ था। 12 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच था। वोटो की गिनती शुरू होने के बाद पहले राउंड में भाजपा के शंकर दयाल त्रिपाठी को 527 वोटों की बढ़त मिली थी। पर दूसरे राउंड की काउंटिंग के बाद कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी 3001 वोटों से आगे हो गए। इसके बाद से उनकी बढ़त का सिलसिला लगातार मजबूत होता गया।

पिछले 27 सालों में इस सीट पर हुए 6 चुनावों में भाजपा महज एक बार ही वो भी केवल 722 वोटों से जीत सकी थी। इसलिए दूसरी बार इस सीट से कमल खिलाने के लिए खुद शिवराज ने मोर्चा संभाल रखा था। लेकिन, उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जिन इलाकों में चुनावी सभाएं की थीं, उनमें अधिकांश जगह पर कांग्रेस के उम्मीदवार को बढ़त मिली है। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट विधानसभा चुनाव के लिए अर्जुनपुर, बरौधा, प्रतापगंज, हिरौधी, पिडरा, मझगवा में चुनावी सभाओं को संबोधित किया था। यहां सभी जगह पर भाजपा प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी पिछड़ गए।

उपचुनाव के दौरान तुर्रा गांव में मुख्यमंत्री ने रात बिताई थी और एक आदिवासी के घर खाना खाया था। सीएम के इस कदम से तुर्रा गांव सहित आसपास के मतदाताओं का मूड बदलने की उम्मीद थी। लेकिन, मुख्यमंत्री के आने से ठीक पहले गांव के सरपंच के घर पर टॉयलेट बनाने और उसे उखाड़ने के मामले से जनता इतनी उखड़ गई यहां भी भाजपा उम्मीदवार को हार कस सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं भाजपा प्रत्याशी त्रिपाठी अपने ससुराल सिंहपुर में भी हार गए।

 

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