Home राजनीति जनादेश विधानसभा चुनाव: राजस्थान में 72.62% और तेलंगाना में 67% मतदान

विधानसभा चुनाव: राजस्थान में 72.62% और तेलंगाना में 67% मतदान

आउटलुक टीम - DEC 07 , 2018
विधानसभा चुनाव: शाम 5 बजे तक राजस्थान में 72% और तेलंगाना में 3 बजे तक 56% मतदान
विधानसभा चुनाव: सुबह 11 बजे तक राजस्थान में 21.89% और तेलंगाना में 23.4% वोटिंग
ANI
राजस्थान और तेलंगाना में वोटिंग शुरू, वसुंधरा-केसीआर का तय होगा राजनीतिक भविष्य
File Photo
विधानसभा चुनाव: 3 बजे तक राजस्थान में 59.43% और तेलंगाना में 56.17% वोटिंग

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म हो चुके हैं। शुक्रवार को राजस्थान की 199 सीटें और तेलंगाना की 119 सीटों के लिए वोट डाले गए। इस दौरान राजस्थान में शाम पांच बजे तक 72.62 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। जबकि तेलंगाना में 67 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई है। इससे पहले मध्य प्रदेश, मिजोरम और छत्तीसगढ़ में वोटिंग हो चुकी है। पांच राज्यों की नतीजे 11 दिसंबर को आने हैं।

वोटिंग के दौरान दोनों राज्यों में छिटपुट हिंसा की भी खबरें आईं। साथ ही ईवीएम और वीवीपैट में खराबी की शिकायतें भी देखने को मिली।

राजस्थान के कई जगहों पर ईवीएम और वीवीपैट में खराबी की वजह से देर से मतदान शुरू हुआ। कई जगहों पर मशीनों को बदला भी गया। कुछ ऐसे मतदान केंद्र भी थे जहां वीआईपी नेता भी वोटिंग करने पहुंचे थे लेकिन ईवीएम खराब होने की वजह से उन्हें भी इंतजार करना पड़ा।

बीकानेर पूर्व के बूथ नंबर 172 पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल भी वोट डालने पहुंचे थे लेकिन ईवीएम में खराबी के कारण उन्हें करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा।  इसी तरह जालौर के अहोर में मतदान बूथ संख्या पर 253 और 254 में ईवीएम में खराबी के चलते मतदाताओं ने हंगामा कर दिया। इस मतदान केंद्रों पर ईवीएम में खराबी की वजह से वोटिंग भी रूकी रही। 

वहीं, पूरे प्रदेश में मतदान शुरू होने के ढाई घंटे बाद भी जैसलमेर में तीन बूथों में मतदान समय पर शुरू नहीं हो सका था। यहां वीवीपैट मशीन खराब होने की वजह से वोटिंग रूकी रही जिसे बाद में ठीक कर लिया गया।

राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान में 20 लाख से अधिक मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। मतदान के लिए दो लाख से ज्यादा ईवीएम-वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होने वाला है लेकिन दोनों ही दलों में बागी भारी बने हुए हैं। मुख्यमंत्री विजयराजे सिंधिंया के सामने जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह मैदान में हैं तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का मुकाबला भाजपा के एक मात्र मुस्लिम उम्मीदवार यूनुस खान के साथ होने वाला है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि राज्य में मतदान निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण ढंग से करवाने का जिम्मा 1,44,941 जवान संभालेंगे, जिनमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की 640 कंपनियां शामिल हैं। राज्य में कुल 387 नाके और चैक पोस्ट लगाए गए हैं।

विधानसभा की कुल सीटें 200 हैं लेकिन अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर बसपा उम्मीदवार के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया है। चार लाख से ज्यादा दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधा की गयी है। उनको मतदान के लिए घर से लाने की व्यवस्था की गयी है। 259 मतदान केंद्रों का जिम्मा महिलाओं के हवाले होगा जहां मतदान दलकर्मी, सुरक्षाकर्मी इत्यादि सभी महिलाएं होंगी।

विधानसभा चुनाव में कुल 2,274 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इंडियन नेशनल कांग्रेस से 194, भारतीय जनता पार्टी से 199 उम्मीदवार, बहुजन समाज पार्टी से 189, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से 01, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से 16 और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से 28 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं जबकि 817 गैर-मान्यता प्राप्त दलों के प्रत्याशी तथा 830 निर्दलीय उम्मीदवार हैं।

तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

राज्य में सत्तारूढ़ टीआरएस, कांग्रेस नीत गठबंधन और भाजपा में त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। राज्य में मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे संपन्न हुआ लेकिन वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के रूप में चिन्हित की गयी 13 सीटों पर मतदान शाम चार बजे तक मतदान हुआ।  इस चुनाव के लिए कुल 32,815 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव में एक ट्रांसजेंडर सहित कुल 1,821 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

टीआरएस के सामने है गठबंधन

राज्य में विधानसभा के चुनाव मूल रूप से अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ-साथ होना था लेकिन राज्य कैबिनेट की सिफारिश के मुताबिक छह सितंबर को विधानसभा भंग कर दी गई थी। मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने समय से पहले चुनाव कराने का विकल्प चुन कर एक बड़ा दाव चला था।

सत्तारूढ़ टीआरएस को कड़ी चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने तेदेपा, तेलंगाना जन समिति और भाकपा के साथ एक गठबंधन बनाया है। टीआरएस और भाजपा ने यह चुनाव अपने-अपने दम पर लड़ने का फैसला किया है।

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