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कर्नाटक के इन क्षेत्रों में क्या रहा भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस का हाल

MAY 16 , 2018

कर्नाटक का सियासी ‘खेल’ अभी जारी है। गुणा-गणित, आरोप-प्रत्यारोप और जोड़-तोड़ जारी है। 

राज्य में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। शुरुआती रुझानों में भाजपा बहुमत के करीब पहुंच गई थी और भाजपाईयों ने जश्न भी मनाना करना शुरू कर दिया था लेकिन दोपहर में स्थिति पलटने लगी और नतीजों में भाजपा 104 सीटों पर अटक गई। बहुमत के लिए 112 सीटें चाहिए।

राजनीतिक घटनाक्रम तब और तेज हुआ, जब कांग्रेस और जनता दल (एस) ने साथ आने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस को 78 और जेडीएस गठबंधन को 38 सीटें मिली हैं। कांग्रेस और जेडीएस के नेता मंगलवार को कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला से मिले और सरकार बनाने का दावा पेश किया। बीजेपी सीएम उम्मीदवार येदियुरप्पा ने भी सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। अब सबकी नजरें राज्यपाल पर टिकी हैं।

इस बीच कर्नाटक के अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टियों की क्या स्थिति रही, इस पर नजर डालते हैं।

6 क्षेत्रों में बंटा है कर्नाटक

कर्नाटक में 6 क्षेत्र हैं। मध्य कर्नाटक, तटीय कर्नाटक, ग्रेटर बेंगलुरू, हैदराबाद कर्नाटक, मुंबई कर्नाटक और मैसुरू कर्नाटक।

भाजपा ने मध्य कर्नाटक और मुंबई कर्नाटक में मजबूत पकड़ बनाई है लेकिन जेडीएस का किला भेदने में वह नाकाम रही। भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें दिलाने में लिंगायत, ओबीसी और एससी वर्ग के मतदाताओं ने अहम रोल निभाया।

मध्य कर्नाटक- 35 सीट

यहां भाजपा की 500 फीसदी सीटें बढ़ीं। यहां भाजपा ने 35 में से 24 सीटें जीतीं। यहां पिछली बार से भाजपा की 20 सीटें बढ़ीं वहीं कांग्रेस को 8 सीटों का नुकसान हुआ। इस इलाके की सीटों पर येदियुरप्पा का प्रभाव है।

तटीय कर्नाटक- 21 सीट

यहां भाजपा की 260 फीसदी बढ़ीं। यहां भाजपा को 21 में से 18 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 3 सीटों से संतोष करना पड़ा। ये इलाका संघ के स्वयंसेवकों की हत्या और कम्युनल हिंसा की वजह से सुर्खियों में रही।

ग्रेटर बेंगलुरू- 30 सीट

यहां भाजपा को सिर्फ एक सीट का फायदा मिला। उसे यहां 11 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 15 और जेडीएस को 4 सीटें मिलीं। ये शहरी क्षेत्र है। यहां 2013 में पिछड़ने के बाद पहले की अपेक्षा भाजपा की स्थिति में सुधार हुआ।

हैदराबाद कर्नाटक- 31 सीट

यहां भाजपा की 225 फीसदी सीटें बढ़ीं। भाजपा को 13, कांग्रेस को 15, जेडीएस को 3 सीटें मिलीं। भाजपा को यहां 9 सीटों का फायदा हुआ और कांग्रेस को 4 सीटों का नुकसान हुआ। ये क्षेत्र मुस्लिम, एससी-एसटी बाहुल्य है।
मुंबई कर्नाटक- 50 सीट

यहां भाजपा ने 30 सीटें जीतीं और उसे 17 सीटों का फायदा हुआ। कांग्रेस को यहां 17 सीटें मिलीं और उसे 14 सीटों का नुकसान हुआ।

मुंबई कर्नाटक- 50 सीट

यहां भाजपा ने 30 सीटें जीतीं। उसे 17 सीटों का फायदा हुआ है। कांग्रेस को 14 सीटों का नुकसान हुआ और उसे 17 सीटें मिलीं। यहां जेडीएस को 2 सीटें मिलीं। यह क्षेत्र लिंगायतों का गढ़ है और येदियुरप्पा को सीएम उम्मीदवार बनाने का फायदा भाजपा को मिला।

मैसुरू कर्नाटक- 55 सीट

यहां भाजपा को सात सीटों का फायदा हुआ और कांग्रेस को 11 सीटों का घाटा हुआ है। जेडीएस ने यहां 49 फीसदी सीटें जीतीं। इस क्षेत्र में वोक्कालिगा समुदाय का दबदबा है। यहां कांग्रेस और जेडी(एस) के बीच लड़ाई थी। कांग्रेस को यहां 17 सीटें और जेडी(एस) को 28 सीटें मिलीं।


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