Home राजनीति सामान्य बस मामले में नया मोड़, यूपी और राजस्थान के डिप्टी सीएम भी मैदान में कूदे, आरोपों का नया दौर

बस मामले में नया मोड़, यूपी और राजस्थान के डिप्टी सीएम भी मैदान में कूदे, आरोपों का नया दौर

कुमार भवेश चंद्र - MAY 22 , 2020
बस मामले में नया मोड़, यूपी और राजस्थान के डिप्टी सीएम भी मैदान में कूदे, आरोपों का नया दौर
बस मामले में नया मोड़, यूपी और राजस्थान के डिप्टी सीएम भी मैदान में कूदे, आरोपों का नया दौर

यूपी सरकार और कांग्रेस के बीच बस पर शुरू हुई सियासत राजस्थान तक जा पहुंची है। इस सियासी युद्ध में आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को राजस्थान और यूपी के डिप्टी सीएम ने एक दूसरे की सरकारों पर जमकर वार किए। मामले में नया मोड़ तब आया जब राजस्थान परिवहन की ओर से कोटा में फंसे यूपी के छात्रों के लिए मुहैया कराई गई बसों के लिए डीजल और बस भाड़े का भुगतान करने को लेकर लिखी चिट्ठी मीडिया में चलने लगी। इसे राजस्थान सरकार की तंगदिली बताकर यूपी के बीजेपी नेताओं ने बयानबाजी शुरू की तो शुक्रवार की दोपहर को राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मोर्चा संभाला। उन्होंने सीधे उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार को निशाने पर लिया और तुच्छ राजनीति करने का आरोप लगाया।

पायलट ने कहा-यूपी भेजी गई बसें कांग्रेस ने जुटाई थीं

सचिन पायलट ने यूपी सरकार के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए दावा किया कि कांग्रेस महासचिव के निर्देश पर मजदूरों को उनके घर तक छोड़ने के लिए जिन 1,000 बसों की व्यवस्था की थी, वह राजस्थान सरकार की नहीं थीं बल्कि कांग्रेस नेताओं ने अपने प्रयास से जुटाईं थीं। उत्तर प्रदेश में नेताओं ने जनता के बीच में इसे लेकर भ्रम पैदा किया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस समिति और प्रियंका गांधी व पार्टी कार्यकर्ताओं ने इन बसों को इकट्ठा करने के लिए निजी प्रयास किए थे। उत्तर प्रदेश की सरकार ने उस भावना का ख्याल नहीं किया।

यूपी के डिप्टी सीएम डा दिनेश शर्मा ने संभाला मोर्चा

राजस्थान की ओर से जवाबी हमले के बाद यूपी में सियासत गरमाते देख डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा और परिवहन राज्य मंत्री अशोक कटारिया दोपहर को मीडिया के सामने आ गए। डॉ. शर्मा ने कहा कि सेवाभाव की बात करने वाली प्रियंका गांधी की राजस्थान सरकार ने कोटा में फंसे छात्रों को यूपी की सीमा तक छोड़ने के लिए 36 लाख रुपये से अधिक का भाड़ा वसूल किया। दूसरी तरफ तमाम तरफ वे संवेदनाओं की बात कर रही हैं। उन्होंने बताया कि किन परिस्थितियों में कोटा के छात्रों को वापस यूपी लाने के लिए राजस्थान सरकार से मदद मांगी गई थी।

कोटा के छात्रों को यूपी भेजने के लिए राजस्थान ने पैसे मांगे

उन्होंने कहा कि हमने दस हजार बच्चों के लिए जो बसें भेजी थीं वह कम पड़ गईं क्योंकि वहां प्रदेश के और भी बच्चे अपने घर लौटने का आग्रह करने लगे। ऐसी परिस्थिति में हमें अतिरिक्त बसों की जरूरत थी और राजस्थान सरकार ने उन बसों को मुहैया कराने के लिए हमसे बाकायदा चिट्ठी मा्ंगी। हमारी कुछ बसों को डीजल की जरूरत थी उसे भी उन्होंने उपलब्ध कराया और उसकी कीमत मांगी। डिप्टी सीएम ने कहा कि कोटा में फंसे छात्रों के प्रति राजस्थान सरकार की जवाबदेही भी बनती थी, क्योंकि वे काफी समय से वहीं रह रहे थे। लेकिन राजस्थान ने उन्हें यूपी की सीमा तक भेजने की भी कीमत वसूल की। यह कैसी संवेदना है? उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस और प्रियंका गांधी की दोहरी मानसिकता का उदाहरण है और शर्म की बात है।

17 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच कोटा से आए थे यूपी के छात्र

बसों को लेकर यूपी सरकार और कांग्रेस के बीच शुरू सियासत के बीच यह कोटा से छात्रों को लाने और भुगतान का ये मामला पुराना है। अप्रैल महीने में योगी सरकार ने प्रदेश के छात्रों को वापस लाने के लिए 560 बसें भेजी थी। सरकार को अनुमान था कि 10 हजार छात्रों के लिए यह बसें पर्याप्त होंगी। लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि प्रदेश के 12000 बच्चे अपने घर लौटना चाहते हैं। सरकार ने ऐसी परिस्थिति में राजस्थान से 94 बसें लेकर इस काम को पूरा किया। इस बारे में जो भी लेन देन था वह पहले से तय था और 5 मई को इस बारे में राजस्थान सरकार की चिट्ठी के बाद यूपी ने भुगतान कर भी दिया। लेकिन बस प्रकरण पर सियासत शुरू होते ही दो हफ्ते से भी अधिक पुरानी चिट्ठी सोशल मीडिया से लेकर पत्रकारों तक पहुंचने लगी।

मायावती को भी मिला मौका, राजस्थान पर बरसीं

कोटा में फंसे बच्चों को यूपी भेजने के बदले राजस्थान सरकार की ओर से बस का भाड़ा वसूलने के खिलाफ मायावती ने भी जमकर भड़ास निकाली। वे यह भी भूल गईं कि उनके इस रुख का योगी सरकार के समर्थन के रूप में आकलन किया जाएगा। ट्विट वार में कूदते हुए मायावती ने कहा कि यह घिनौनी राजनीति है। लगता है राजस्थान सरकार कंगाल हो गई है। बसपा सुप्रीमो ने लिखा है कि राजस्थान ने यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपये की जो मांग की है वह उसकी कंगाली और अमानवीयता दिखाता है।

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