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हरियाणा चुनाव में जातिगत समीकरणों पर टिका राजनीतिक दलों का भविष्य

विधानसभा चुनाव में मुद्दे बेशक अपनी अहम भूमिका निभा रहे हों लेकिन राजनीतिक दलों का भविष्य जातिगत...
हरियाणा चुनाव में जातिगत समीकरणों पर टिका राजनीतिक दलों का भविष्य

विधानसभा चुनाव में मुद्दे बेशक अपनी अहम भूमिका निभा रहे हों लेकिन राजनीतिक दलों का भविष्य जातिगत समीकरणों के खेल पर टिका है। सत्ताधारी दल भाजपा से लेकर कांग्रेस, जजपा,  इनेलो, लोसुपा तथा बसपा ने प्रत्याशियों का चयन भी जातिगत समीकरणों के आधार पर किया है। हालांकि राजनीतिक दल यह दावा करते हैं कि सभी जातियों को प्रतिनिधित्व देने के लिए उक्त समाज के प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा गया है, लेकिन इसके पीछे सच्चाई उक्त जाति के वोट बैंक को हासिल करने की रही है। पूर्व के चुनावों में जातिगत तथ्य ही चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभाता आया है। अहीरवाल से लेकर जाट बेल्ट की सीटों पर गौर फरमाएं तो राजनीतिक दल ने उक्त जाति की संख्या के अनुसार ही शतरंज की बिसात बिछाई है। 

सभी दल खेल रहे एससी-ओबीसी कार्ड

चुनावी रण में उतरा हर दल यह दावा करते नहीं थकता कि पिछड़ों व अनूसूचित जातियों का उससे बड़ा हितैषी कोई हो नहीं सकता, जबकि उसके पीछे मंशा वोट बैंक की ही छिपी है। सामान्य वर्गों का वोट बैंक भी अहम भूमिका अदा करता है लेकिन एससी व ओबीसी के वोटबैंक की अपनी ही भूमिका होती है। पिछली बार कांग्रेस का सत्ता के खिसकने का बड़ा कारण ओबीसी वर्ग का वोट बैंक खिसकना माना गया था। इस बार ओबीसी वोट बैंक पर सबसे ज्यादा दावा लोसुपा ठोक रही है और इस बात की ङ्क्षचता भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य दलों को सत्ता रही है। सभी दल चुनावी परिणाम को बदलने के लिए एससी/ओबीसी कार्ड खेलने की फिराक में है। 

जाट प्रत्याशियों पर दांव

प्रदेश में बेशक जाट व गैर-जाट वर्ग की धारणा फैलाई जा रही हो लेकिन भाजपा, कांग्रेस, जजपा तथा इनेलो ने जाट प्रत्याशियों को टिकटें देने में कोई कंजूसी नहीं बरती है। लोसुपा ने एक भी जाट प्रत्याशी पर दांव नहीं खेला तो वहीं बसपा ने बहुत कम जाट प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। बसपा का पूरा फोकस दलित वोट बैंक पर है। राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की सूची देखें तो भाजपा ने 20, कांग्रेस ने 27, जजपा ने 34, इनेलो ने 34, आप ने 15 तथा बसपा ने 6 जाट प्रत्याशियों पर दांव खेला है। भाजपा ने पंजाबी वर्ग से 9, कांग्रेस ने 2, जजपा ने 1, इनैलो ने 2, आप ने 5 तथा लोसुपा ने 1 प्रत्याशी को टिकट दी है। अग्रवाल समुदाय से भाजपा ने 9, कांग्रेस ने 5, जजपा ने 4, इनेलो ने 1 तथा आप ने 3 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारे हैं। 

इन समुदायों पर भी जोर

इसी तरह ब्राह्मण समुदाय से भाजपा ने 7, कांग्रेस ने 5, जजपा ने 6, आप ने 6, इनैलो ने 4, बसपा ने 5 तथा लोसुपा ने 9 प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है। अहीरवाल समुदाय से भाजपा ने 6, कांग्रेस ने 6, जजपा ने 6, इनैलो ने 2, लोसुपा ने 3 तथा आप ने 1 प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारा है।

सभी दल कर रहे जातिगत वोट बैंक को लामबंद करने के प्रयास 

राजनीतिक दल मंच से चाहे कुछ भी भाषण दें लेकिन पर्दे के पीछे जातिगत वोट बैंक को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिशों में जुटे हैं। हर दल का नेता जिस जाति के लोगों के बीच जाता है,वहां यह बताने का प्रयास करता है कि उस जाति के लिए उनका दल क्या-क्या काम कर सकता है और अगर किसी दल की सत्ता रही है तो यह भी विस्तार से बताता है कि उसके राज में उक्त जाति की कितनी नौकरियां दी गईं, उस जाति की भलाई के लिए क्या-क्या काम किए गए। इतना ही नहीं, उक्त जाति की धर्मशालाओं के लिए दिए जाने वाले सरकारी फंड को भी गिनाया जाता है। 

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