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जेटली के ब्लॉग पर ‘आप’ का निशाना, कहा- उनका नजरिया SC के फैसले पर BJP की ‘हताशा’ दिखाता है

  आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में अधिकार के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लिखे गए ब्लॉग के लिए...
जेटली के ब्लॉग पर ‘आप’ का निशाना, कहा- उनका नजरिया SC के फैसले पर BJP की ‘हताशा’ दिखाता है

 

आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में अधिकार के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लिखे गए ब्लॉग के लिए  केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा है। ‘आप’ ने कहा कि जेटली का नजरिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा की ‘हताशा’ को दिखाता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली सरकार की मंत्रिपरिषद के पास आरक्षित विषयों को छोड़कर बाकी सभी विषयों पर निर्णय करने का अधिकार है।

जेटली जी संवैधानिक अराजकतावादी हैं: आप

‘आप’ के वरिष्ठ नेता आशुतोष ने ट्वीट कर जेटली को ‘संवैधानिक अराजकतावादी’ करार देते हुए कहा कि उन्हें संविधान में ‘कोई विश्वास नहीं’ है। आशुतोष ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अरुण जेटली का ब्लॉग पढ़ने के बाद मुझे यकीन हो गया है कि जेटली जी संवैधानिक अराजकतावादी हैं। अपने नेता गोलवलकर/मोदी और आरएसएस की विचारधारा की तरह संविधान में उनका कोई विश्वास नहीं है।’

जानें जेटली ने क्या लिखा था ब्लॉग में-

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली सरकार के पास पुलिस का अधिकार नहीं है। जेटली ने कहा, ऐसे में वह पूर्व में हुए अपराधों के लिए जांच एजेंसी का गठन नहीं कर सकती।

जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि इसके अलावा यह धारणा 'पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है कि संघ शासित कैडर सेवाओं के प्रशासन से संबंधित फैसला दिल्ली सरकार के पक्ष में गया है। जेटली ने कहा, 'कई ऐसे मुद्दे रहे जिन पर सीधे टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन वहां निहितार्थ के माध्यम से उन मामलों के संकेत जरूर हैं। लंबे समय तक वकालत कर चुके केंद्रीय मंत्री ने इसी संदर्भ में यह भी लिखा है कि जब तक कि महत्व के विषयों को उठाया न गया हो, उन पर विचार विमर्श नहीं हुआ और कोई स्पष्ट मत प्रकट न किया गया हो तब तक कोई यह नहीं कह सकता कि ऐसे मुद्दों पर चुप्पी का मतलब है कि मत एक या दूसरे के पक्ष में है।    

वित्त मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास पुलिस का अधिकार नहीं है, ऐसे में वह पूर्व में हुए अपराधों के लिए जांच एजेंसी का गठन नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, 'दूसरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली अपनी तुलना अन्य राज्यों से नहीं कर सकती। ऐसे में यह कहना कि संघ शासित कैडर सेवाओं के प्रशासन को लेकर दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला दिया गया है, पूरी तरह गलत है।

 

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