Home राजनीति विश्लेषण हरियाणा: मुश्किल में खट्टर सरकार, दुष्यंत चौटाला पर बढ़ा BJP से समर्थन लेने का दबाव

हरियाणा: मुश्किल में खट्टर सरकार, दुष्यंत चौटाला पर बढ़ा BJP से समर्थन लेने का दबाव

आउटलुक टीम - JAN 13 , 2021
हरियाणा: मुश्किल में खट्टर सरकार, दुष्यंत चौटाला पर बढ़ा BJP से समर्थन लेने का दबाव
हरियाणा: मुश्किल में खट्टर सरकार, दुष्यंत चौटाला पर बढ़ा BJP से समर्थन लेने का दबाव
आउटलुक टीम

कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक के बावजूद जारी किसान आंदोलन को देखते हुए हरियाणा से इंडियन नेशलल लोकदल(इनेलो)के इकलौते विधायक अभय सिंह चौटाला के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे ने हरियाणा की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। सबसे ज्यादा हलचल अभय के भतीजे दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी(जजपा)में है। क्योंकि किसानाें की सियासत करने वाली दोनों पार्टियों में से इनेलो के अभय सिंह चौटाला के इस्तीफे से किसानों का भारी समर्थन इनेलो के साथ होने से जजपा का सियासी भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इस्तीफे के बाद अभय चौटाला फिर से इनेलो को मजबूती देते हुए जजपा के उन असंतुष्ठ विधायकों को भी फिर से इनेलो के पाले में लाने की जुगत में हैं जो जजपा के भाजपा को समर्थन जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं। किसानों के बीच ताऊ देवीलाल की विरासत का झंडा ऊंचा करने में जुटे अभय इस्तीफे के जरिए इनेलो का बिखरा हुआ कुनबा बटोरने का प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच जननायक जनता पार्टी के विधायकों ने किसान आंदोलन पर अलग सहमति बनाकर अपनी भावनाएं केंद्र के नेताओं को बताने के लिए कह दिया है। सूत्रों के मुताबिक अंदरखाते जजपा नेताओं ने यह कहा है कि धरने पर बैठे किसान भाजपा का वोट बैंक नहीं है, बल्कि वे जजपा का वोट बैंक हैं। इसलिए केंद्र सरकार को भी इन सब बातों को ध्यान में रख कर निर्णय लेना होगा। विरासत की ही जंग में बिजली मंत्री रणजीत चौटाला अपने तरीके से ताऊ देवीलाल की विरासत को कैश करवाने में जुटे हैं और खुद को सक्रिय राजनीति में जिंदा रखने की कवायद में लगे हैं। परिवार में दो फाड़ होने के बाद हर स्तर पर यह प्रयास हुए कि किसी तरह से दोनों भाइयों अभय और अजय को एक साथ लाया जाए, लेकिन बात नहीं बनी और दस सीटें जीत कर दुष्यंत ने सरकार का दामन थाम लिया। अब अभय चौटाला जनता को यह बताने में लगे हैं कि जब पद छोड़ने की बात आई तो इनेलो ही किसानों के साथ जबकि जजपा भाजपा की गोदी में बैठी है।  

बड़े किसान नेता रहे पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल के दो बेटों में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला राजनीति में सक्रिय हैं। ओमप्रकाश चौटाला पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जबकि रणजीत चौटाला कांग्रेस छोड़कर रानियां विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीते और भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार में बिजली व जेल मंत्री बने। ओमप्रकाश चौटाला के छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला के हाथ इनेलो की कमान है जबकि दो साल पहले इलेनो से टूटकर देवीलाल के नाम पर जननायक जनता पार्टी बनाने वाले बड़े बेटे अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला,पुत्र दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला जजपा को संभाल रहे हैं। 

2019 के विधानसभा चुनाव में 10 सीटें जीत कर किंग मेकर की भूमिका में जजपा के दुष्यंत चौटाला 40 सीटें जीतने वाली भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय,जजपा,इनेलो और कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर देवीलाल के परिवार से हरियाणा विधानसभा में इस बार पांच सदस्य पहुंचे हैं। इनमें अभय चौटाला इनेलो से, दुष्यंत चौटाला जजपा से, उनकी माता नैना चौटाला जजपा से, देवीलाल के भाई साहब सिंह के पौत्र अमित सिहाग डबवाली से कांग्रेस, ओम प्रकाश चौटाला के छोटे भाई रणजीत सिंह चौटाला रानियां से निर्दलीय और के टिकट पर चुनाव जीते हैं। रणजीत चौटाला ही संकट की इस घड़ी में  निर्दलीय विधायकों को भाजपा से जोेड़े रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अभय चौटाला के इस्तीफे को निरर्थक बतते हुए नेता प्रतिपक्ष एंव पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अच्छा होता कि इनेलो के एक मात्र विधायक अभय चौटाला इस्तीफा देने की बजाय विधानसभा में सरकार केे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में अपना मत सरकार के खिलाफ डालते। 

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