Advertisement

LG और ‘आप’ के बीच तकरार पर बोली शिवसेना, PM मोदी चाहते तो उप राज्यपाल को कर सकते थे नियंत्रित

महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र को दिल्ली में ‘आप’...
LG और ‘आप’ के बीच तकरार पर बोली शिवसेना, PM मोदी चाहते तो उप राज्यपाल को कर सकते थे नियंत्रित

महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र को दिल्ली में ‘आप’ सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को काम करने की इजाजत देनी चाहिए।

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) के बीच शक्तियों के बंटवारे के विषय पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आम आदमी पार्टी के पक्ष में आने के बाद शिवसेना का यह बयान आया है। पार्टी ने कहा कि एलजी और ‘आप’ के बीच तकरार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि चाहते तो उप राज्यपाल को नियंत्रित कर सकते थे।

दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला

गौरतलब है कि शीर्ष न्ययालय ने दो दिन पहले एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि एलजी निर्वाचित सरकार की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य हैं और वह बाधक नहीं बन सकते हैं।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में लिखा है, ‘कम से कम अब एलजी और दिल्ली सरकार के बीच गतिरोध खत्म हो जाना चाहिए तथा केजरीवाल को मुख्यमंत्री के तौर पर अपना काम करने देना चाहिए।’

गतिरोध एलजी-केजरीवाल के बीच नहीं, दिल्ली के सीएम और पीएम के बीच था

शिवसेना ने कहा कि राजनीतिक गतिरोध केजरीवाल और एलजी अनिल बैजल के बीच नहीं था, बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच था। पार्टी ने कहा कि यदि मोदी चाहते तो वह केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एलजी को नियंत्रित कर सकते थे लेकिन यह काम सुप्रीम कोर्ट को करना पड़ा।

मोदी लहर के बावजूद 2015 में आप सरकार सत्ता में आई

भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने कहा कि उसे संदेह है कि शिर्ष न्यायालय के फैसले के बाद दिल्ली सरकार के फैसलों में एलजी की दखलअंदाजी खत्म हो जाएगी। संपादकीय में कहा गया है कि मोदी लहर के बावजूद आप सरकार 2015 में प्रचंड जनादेश के साथ सत्ता में आई थी और भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव में मात्र तीन सीट मिली थी।

एलजी ने अपने संवैधानिक पद को ध्यान में नहीं रखा: शिवसेना

सामना में कहा गया है कि केजरीवाल की कार्य शैली पर विचारों का मतभेद हो सकता है लेकिन लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। केंद्र को केजरीवाल सरकार के साथ अवश्य ही सहयोग करना चाहिए। शिवसेना ने कहा कि एलजी ने अपने संवैधानिक पद को ध्यान में नहीं रखा। इसने प्रशासन और राजभवन की प्रतिष्ठा कम की।

केंद्र को लगता है कि केजरीवाल काम नहीं कर रहे, तो बर्खास्त कर देना चाहिए

शिवसेना ने कहा कि यदि केंद्र को लगता है कि केजरीवाल काम नहीं कर रहे या वह भ्रष्ट हैं तो उसे दिल्ली सरकार से बर्खास्त कर देना चाहिए, लेकिन उसे कामकाज नहीं करने देना अनुचित है। पार्टी ने कहा कि दिल्ली सरकार को क्लर्क या चपरासी तक नियुक्त करने का अधिकार नहीं है, वह नीतिगत फैसले नहीं कर सकती, आईएएस अधिकारियों की बैठक नहीं बुला सकती और उन्हें निर्देश नहीं दे सकती।

यह एक निर्वाचित सरकार का गला घोंटने जैसा है

शिवसेना ने कहा कि यह एक निर्वाचित सरकार का गला घोंटने जैसा है। इसलिए केजरीवाल सरकार ने विरोध किया और ‘आप’ मंत्री राजभवन में धरना पर बैठे। संपादकीय में कहा गया है कि एलजी आवास में धरना पर बैठे आप मंत्रियों की तस्वीर आपातकाल के दौर से भी अधिक बदतर स्थिति को दिखाती है।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से
Advertisement
Advertisement
Advertisement
  Close Ad