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आजाद हिंद बैंक की कहानी, जब 1 लाख रुपये के नोट पर छपी थी नेताजी की तस्वीर

आउटलुक टीम - OCT 21 , 2018
आजाद हिंद बैंक की कहानी, जब 1 लाख रुपये के नोट पर छपी थी नेताजी की तस्वीर
आजाद हिंद बैंक की कहानी, जहां 1 लाख रुपये के नोट पर छपी थी नेता जी की तस्वीर
आउटलुक टीम

जब भी आजाद हिंद फौज का जिक्र होता है तब हमारी आंखों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मुस्कुराता हुआ चेहरा दिखाई देने लगता है। आज यानी 21 अक्टूबर को सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली 'आजाद हिंद सरकार' की आज 75वीं जयंती है। सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में 21 अक्टूबर 1943 'आजाद हिंद सरकार' का गठन किया गया था।

नेताजी ने बतौर आजाद हिंद फौज के कमांडर भारत की अस्थायी सरकार बनायी, जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी थी। सुभाष चंद्र बोस का मानते थे कि अंग्रेजों के इस शासन को केवल सशस्त्र विद्रोह के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है।

वर्ष 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में प्रांतीय आजाद हिंद सरकार  की स्थापना की थी। उस दौरान 11 देशों की सरकारों ने आजाद हिंद सरकार को मान्यता दी थी। उस सरकार ने कई देशों में अपने दूतावास भी खोले थे। इसके अलावा आजाद हिंद फौज ने बर्मा की सीमा पर अंग्रेजों के खिलाफ जबर्दस्त लड़ाई लड़ी थी।

आजाद हिंद बैंक और नेताजी की तस्वीर वाला एक लाख का नोट

आजाद भारत में छह दशक के सफर के बाद सरकार महज दो हजार रुपये तक का नोट बाजार में ला सकी है। इसके उलट नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद सरकार के जमाने में एक लाख रुपये का नोट आ चुका था।

आजाद हिंद बैंक की स्थापना वर्ष 1943 में ही हो गई थी। आजाद हिंद सरकार व फौज को समर्थन देने वाले दस देशों वर्मा, क्रोसिया, जर्मनी, नानकिंग (वर्तमान में चीन), मंचूको, इटली, थाइलैंड, फिलीपिंस व आयरलैंड ने बैंक और इसकी करेंसी को भी मान्यता दी थी। बैंक की ओर से दस रुपये के सिक्के से लेकर एक लाख रुपये के नोट तक जारी किए गए थे। एक लाख रुपये के नोट पर सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर छपी थी। इसके पूर्व तक आजाद हिंद बैंक की ओर से जारी 5000 के नोट की ही जानकारी सार्वजनिक थी। पांच हजार का एक नोट बीएचयू के भारत कला भवन में भी सुरक्षित रखा है।

जापान-जर्मनी ने की थी मदद

सुभाष चंद्र बोस ने जापान-जर्मनी की सहायता से आजाद हिंद सरकार  के लिए नोट छपवाने का इंतजाम किया था। इतना ही नहीं नाजी जर्मनी ने आजाद हिन्द फौज के लिए कई डाक टिकट जारी किए थे, जिन्हें आजाद डाक टिकट कहा जाता है। वेर्नर और मारिया वॉन एक्सटर-हेडटलस ने इन डाक टिकटों को डिजाइन किया था। ये टिकट आज भारतीय डाक के स्वतंत्रता संग्राम डाक टिकटों में शामिल हैं।

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