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खत्म हुआ कश्मीरियों की अस्मिता का प्रतीक

अनुच्छेद 370 में आजादी के बाद के दशकों में इतने बदलाव हुए कि उसकी अहमियत महज कश्मीरियों की विशेष पहचान का ही प्रतीक बनकर रह गई थी, अब वह भी खत्म कर दी गई

इतिहास बदलने का इतिहास

इस फैसले के नतीजे आने वाले दिनों में सामने आएंगे। सैन्य ताकत के बल पर लोगों को मुख्यधारा में शामिल नहीं किया जा सकता, उनके साथ चर्चा और बातचीत व उनकी सहभागिता जरूरी है

फैसला कश्मीर का सियासत देश की

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म, राज्य दो केंद्रशासित प्रदेशों में बंटा, सवाल उठे कि क्या यह मोदी सरकार का हिंदुत्व और चुनावी सियासत का एजेंडा

बिखरे विपक्ष का फायदा

अनुच्छेद 370 जैसे मसले पर विरोधी दलों को साथ लाकर विधेयक पारित कराना भाजपा की बड़ी कामयाबी

कश्मीर पर पाकिस्तान का काबुली कार्ड

अनुच्छेद 370 को लेकर भारत की तरफ से कूटनीतिक प्रयास भी जारी, पाकिस्तान पर भी बढ़ रहा घरेलू दबाव

भारत से दूर होंगे कश्मीरी

मोदी सरकार ने विधानसभा चुनाव जीतने के मकसद से यह कदम उठाया

खुदकशी का कदम

अनुच्छेद 370 को हटाने के तरीके से उठ रहे कई सवाल, समाधान की जगह पैदा हो सकते हैं संकट

कश्मीर और लोकतंत्र पर हमला

मौजूदा हालात में भय और अनिश्चितता मिलकर आतंकवाद के लिए उपजाऊ जमीन मुहैया कराएंगे

यह सरासर असंवैधानिक

सरकार ने एक झटके में कश्मीरियों को खिलाफ कर लिया, उसकी भावना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ

विलय की शर्तों का उल्लंघन

अनुच्छेद 370 पर भाजपा का हमला वैचारिक, तो नेहरू और इंदिरा सरकार का लचर और अनिर्णायक रहा

मुश्किल भरी राह पर पहला कदम

सरकार को कश्मीर के बेहतर भविष्य के निर्माण की रणनीति बनानी चाहिए

लद्दाख को मिले वाजिब हक

जम्मू-कश्मीर के शोर में लद्दाख के मुद्दे नजरंदाज हुए, अब अपेक्षाएं पूरी करने का सही वक्त

अनुच्छेद 370 था संघीय ढांचे की शर्त

जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष दर्जे के रहते ही एकरूपता का लक्ष्य करीब-करीब हासिल कर लिया गया था, नए ‌संशोधन पर कई तरह के सवाल

कश्मीर का समाधान सेना नहीं

जाहिर है, पिछली सरकारों की कोशिशें नाकाम रहीं, तो व्यवस्थाे बदलना वक्त की मांग है

उन्नाव कांडः दबंगई की दर्दनाक दास्तां

उत्तर प्रदेश में एक विधायक के राजनैतिक दबदबे और बलात्कार, हत्या की वारदातों से एक पूरा परिवार तबाह

बेकमान कांग्रेस

चुनाव के लिए भाजपा की तैयारियां तेज, पर कांग्रेस में घमासान

कमल पर हावी कमलनाथ

दो विधायकों की क्रॉस वोटिंग से भाजपा बैकफुट पर, लेकिन पार्टी नेताओं में अब भी तालमेल नहीं

लाल और सुनहरी जर्सी के धमाकेदार स्ट्राइकर

पिछड़े, दबे-कुचलों में एक समय राष्ट्रवाद और उम्मीद ‌की अलख जगाने वाला ईस्ट बंगाल क्लब का यह शताब्दी वर्ष

सरकारी अंकुश से फुस्स

नया संशोधन आरटीआइ कानून की आत्मा पर प्रहार और संघीय ढांचे के खिलाफ

बाघ गणनाः संख्या बढ़ी मगर सवाल भी उठे

ताजा गणना में बाघ तो बढ़े पर कई सवाल और आशंकाएं भी, नौ राज्यों में विलुप्त होने के कगार पर, कहीं बेकार न हो जाए 45 साल की मेहनत

बाघ गणनाः तेरे-मेरे बीच का चक्कर

2014 की तुलना में 2018 में टाइगर गणना के मानक बदले गए हैं। इस वजह से संख्या में 150-200 की कमी आ सकती है

जीरो से समृद्धि का ख्वाब

सरकार ने “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ डूइंग” लागू करने की वकालत की है। इसके लिए जीरो बजट फार्मिंग का फॉर्मूला निकाला है

यह एक राजनैतिक फैसला है

अनुच्छेद 370 को हटाने के सरकार के फैसले से जम्मू-कश्मीर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। घाटी की मुख्यधारा के नेताओं को हिरासत में लेने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के फैसले की वैधानिकता और दूसरे तमाम संवैधानिक पहलुओं पर सिद्धार्थ मिश्रा ने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप से बात की। बातचीत के मुख्य अंशः

अनुच्छेद 370 पर फैसले का यह सही वक्त

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद हर तरफ 370 की चर्चा है। इस कदम का सेना के लिहाज से क्या फर्क पड़ेगा और फैसले लेने की प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर स्पेशल कॉरेसपोंडेंट मिर्जा आरिफ बेग ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सुब्रत साहा से बात की। कुछ अंशः

फ्रंटियर पर नया नजरिया

पाकिस्तान के नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविंस (अब खैबर पख्तूनखवा) के बारे में भारत में लोग कम ही जानते हैं। 93 फीसदी मुस्लिम आबादी के बावजूद आजादी के समय वहां कांग्रेस सरकार थी। विभाजन के समय दोनों तरफ दंगे हुए, लेकिन फ्रंटियर इससे अछूता रहा। ऐसी ही कुछ रोचक और अहम जानकारियां पूर्व टेक्सटाइल सचिव राघवेंद्र सिंह ने अपनी किताब “इंडियाज लॉस्ट फ्रंटियर- द स्टोरी ऑफ द नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविंस ऑफ पाकिस्तान” में दी हैं। फ्रंटियर को कैसे पाकिस्तान में शामिल किया गया, इसमें नेहरू, महात्मा गांधी, अब्दुल कयूम जैसे नेताओं की क्या भूमिका थी, इनके बारे में भी बताया गया है। राघवेंद्र संस्कृति मंत्रालय में सचिव और राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक भी रह चुके हैं। किताब में दी नई जानकारी और इसे लिखने के पीछे की कहानी समेत तमाम पहलुओं पर राघवेंद्र सिंह से बात की आउटलुक हिंदी के संपादक हरवीर सिंह ने।

सूचनाएं कितनी भरोसेमंद!

अवलोकन और प्रयोग के वैज्ञानिक तरीके की इतनी खूबसूरत पैरवी कम ही पढ़ने को मिलती है

जूता या सिनेमा हॉल या पेस्ट्री

कुल मिलाकर लिबर्टी की कोई कमी नहीं है। पेस्ट्री से लेकर जूतों तक, जूतों से लेकर राजनेताओं के आचरण तक यह बिखरी पड़ी है