Home मैगज़ीन डिटेल
मैगज़ीन डिटेल

हैकरों के चंगुल में सेलेब्रिटी

ग्लोबल हैकर अभिनेत्रियों से लेकर सोशल मीडिया इनफ्लुएंशर जैसे लाखों फॉलोअर वालों के फेसबुक एकाउंट हैक कर लगा रहे हैं लाखों का चूना

जवाब मांगते सवाल

चहुं ओर मंदी का साया घिरता जा रहा है लेकिन बजट में उपभोग और मांग को बढ़ाने वाले कदम नदारद हैं

कैसे हासिल हो खोया वजूद

देश की सबसे पुरानी पार्टी अपने संकट से निजात पाने का कोई तरीका ढूंढ़ पाएगी या इतिहास के पन्नों में समा जाएगी

पुरानी पार्टी का क्या है भविष्य?

बेहतर और अलग भारत के विजन पर पार्टी काम करे तो वह तमाम क्षेत्रीय और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के बीच पुल का काम कर सकती है और अपनी जगह भी वापस पा सकेगी

यह संकट तो यकीनन राष्ट्रीय है

कई गंभीर खामियों के बावजूद कांग्रेस का आज के परिप्रेक्ष्य में फिर से खड़ा होना देशहित में

आक्रामक और रचनात्मक नेतृत्व की जरूरत

बदले हालात में अब कांग्रेस में जान फूंकने की कवायद जनांदोलनों और जन-जागरण अभियान से ही संभव

कर्नाटक की पलटती बाजी

गहराते राजनैतिक संकट के बीच कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार पर अनिश्चितता के बादल

कहां खो गया वतन मेरा

असम में जैसे-जैसे एनआरसी सूची के अंतिम प्रकाशन की समय सीमा करीब आ रही है, गलत गिरफ्तारियां भी कई गुना बढ़ गईं

नेता-पुत्रों ने कराई थू-थू

अपने नेताओं के बेटों के कानून हाथ में लेने की बढ़ती वारदातों से भाजपा बैकफुट पर, कई के राजनैतिक कॅरिअर पर लग सकता है ग्रहण

तो, पिछड़ों के वर्गीकरण से पलटी भाजपा!

राज्य सरकार के 17 जातियों के अनुसूचित जाति में शामिल करने के फैसले से पिछड़ों के उप-वर्गीकरण से पैर खींचने के संदेह उभरे

दोस्ताना फार्मूले के अध्यक्ष

नए तालमेल से कांग्रेस को मिला पहला आदिवासी प्रदेश प्रमुख

अपराध क्यों बेइंतहा

देश की राजधानी दिल्ली में दिन-ब-दिन अपराध के बढ़ते मामले और आंकड़े यह पुख्ता कर रहे हैं कि यह 'क्राइम कैपिटल' बनती जा रही है, फिर भी पुलिस-प्रशासन इसे झुठलाने में जुटा

युवाओं को जोड़ने का नया फंडा ‘राहगीरी’

सामाजिक सौहार्द और युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने की नई पहल

संघ के तुक्के में फंसे तीरंदाज

भारतीय तीरंदाजी संघ दोफाड़, वर्ल्ड आर्चरी फेडरेशन ने किया डि-लिस्ट, प्रतिभावान तीरंदाज विश्व प्रतिस्पर्धाओं में मुकाबले से वंचित

हॉलीवुड से घबराया बॉलीवुड

हॉलीवुड फिल्मों ने बॉलीवुड की कमाई का रिकॉर्ड तोड़ा, घबराए ‌बॉलीवुड निर्माता रिलीज टालने पर मजबूर

नई परंपरा, नए सपने बस आंकड़े नदारद

क्रांतिकारी ऐलानों की भरमार, मगर महज प्रतीकों से पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी कहां बनेगी

मध्य वर्ग को आईना

बजट में सपने बड़े लेकिन उन्हें पूरा करने के उपाय नहीं दिखते, सहूलियत से ज्यादा परेशानियां

उम्मीदों पर कहां खरा

कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाद को दुरुस्त करने के लिए प्रावधानों में भारी कंजूसी

विदेशी कर्ज से वृद्धि की आस

पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सरकार ने तोड़ी दशकों पुरानी परिपाटी

सरकार मांगे दस नई डिटेल

रिटर्न में पेट्रोल और फोन बिल जैसे टैक्स-फ्री भत्तों की जानकारी देनी होगी, स्टैंडर्ड डिडक्शन के लिए भी अलग कॉलम जोड़ा गया है

बजट में तो कोई स्ट्रक्चर ही नहीं दिखता

मोदी सरकार 2.0 के पहले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पांच लाख करोड़ डॉलर बनाने के सपने दिखाए। इसकी हकीकत भला सबसे अधिक बजट पेश करने वालों में शुमार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम से बेहतर कौन बता सकता है? इस कथित तौर पर नई परंपरा के बजट के तमाम पहलुओं पर उनसे संपादक हरवीर सिंह और एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव ने बातचीत की। पूर्व वित्त मंत्री ने आर्थिक सुधारों से लेकर अर्थव्यवस्था की स्थिति और बजट के प्रावधानों और आवंटनों के बारे में विस्तार से बताया। प्रमुख अंश:

जो अपने लिए सपने चुनती हैं

ये कविताएं बहुत सारी ‌स्त्रियों के दुख से बनी एक अंतहीन कथा है

प्रेमचंद और आज का समय

उनकी कहानियां और लेखन आज की सांप्रदायिकता, राष्ट्रीयता, सत्ता के मद और उत्पीड़न का हूबहू चित्रण

मौत एसी फर्स्ट क्लास या जनरल कपार्टमेंट

सच यह है कि न लीची मारती न गर्मी मारती, न सर्दी मारती, न अकाल मारता, न बाढ़ मारती। मारती है तो गरीबी