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रहस्यमय महामारी के खौफनाक पंजे

बिहार के मुजफ्फरपुर में बच्चों की दर्दनाक मौतें एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम की महामारी के फैलते प्रकोप का संकेत, स्वास्थ्य सेवा की उपेक्षा और दुर्दशा भी उजागर

न्यू इंडिया की कमजोर नींव

इलाज के अभाव में काल के गाल में समाते बच्चे, भीड़ द्वारा बेकसूरों की हत्या, अर्थव्यवस्था के संदिग्ध आंकड़े तो न्यू इंडिया की नींव मजबूत नहीं करेंगे। सो, बातों और दावों से आगे बढ़ना होगा

कुपोषण और कुशासन से बढ़ा कहर

बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू होने पर केंद्र और राज्य सरकारें वादे पर वादे करने शुरू कर देती हैं

एन्सेफलाइटिस की रहस्यमय दास्तां

एईएस और बिहार में दम तोड़ते बच्चों की घटना ने सभी की पेशानी पर बल ला दिया है

बैलाडीला पर खनन फांस

बैलाडीला की पहाड़ियों पर खुदाई के विरोध में बढ़ा आदिवासी आंदोलन, अडाणी समूह के ठेके पर घिरी केंद्र और राज्य सरकार

गठबंधन बिखरने की माया

सपा-बसपा गठजोड़ आरोप-प्रत्यारोप में फंसा

भाजपा को नए चेहरों की तलाश

राज्य विधानसभा चुनाव के लिए आयातित उम्मीदवारों की भी खोज

युवराज से नाइंसाफी

युवराज जैसे बड़े मैच विनर को मैदान में विदाई न मिलना हर लिहाज से अनुचित

सस्ते, सुलभ कर्ज में क्षेत्रीय गैर-बराबरी भारी

कृषि के लिए उपलब्ध संस्थागत कर्ज में क्षेत्रीय गैर-बराबरी किसानी के संकट का एक बड़ा कारण, वंचित इलाकों खासकर पूर्वी और पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ नाइंसाफी घटे तो उपज भी बढ़ेगी और गरीबी भी घटेगी

आंकड़े अधूरे तो बजट कैसे हो पूरा?

सरकारी आंकड़ों पर संदेह के घने बादलों के बीच अर्थव्यवस्थात जीडीपी वृद्धि, रोजगार दर सहित हर मोर्चे पर बेहाल, मगर सबसे बड़ा सवाल कि संदिग्धर आंकड़ों के सहारे कैसे तैयार होगा मुकम्मल बजट

हंगामा है यूं बरपा

अरविंद सुब्रह्मण्यम ने जीडीपी वृद्धि दर के करीबी आकलन के लिए नई अंतरराष्ट्रीय पद्धति अपनाई तो सरकार के तेवर गरम हो गए

चांद की तमन्ना, अंतरिक्ष महाशक्ति बनने का ख्वाब

जुलाई में चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की तिथि तय होने से भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में दावेदारी मजबूत

मोबाइल वॉलेट कैशलेस फ्राड का फंडा

मोबाइल वॉलेट, प्रीपेड कार्ड और पेपर वाउचर हैकरों के निशाने पर, आरबीआइ के कदम नहीं हैं कारगर

आंकड़ों की राजनीति का नुकसान भारी

पिछले कुछ समय से देश की अर्थव्यवस्था को लेकर आ रहे आंकड़ों पर अब ऐसे विशेषज्ञ भी सवाल उठा रहे हैं, जो कभी सरकार का हिस्सा थे। इससे यह संशय पैदा हो गया है कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। इस पूरे मसले पर पूर्व चीफ स्टैटीशियन प्रणब सेन से आउटलुक के एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव की बातचीत के अंशः

स्वच्छ भारत का ढिंढोरा पीटने से नहीं रुकेंगी मौतें

हाल में गुजरात, उसके पहले दिल्ली, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में सफाई कर्मियों की सफाई के दौरान मौतें हुईं लेकिन शायद ही यह कोई मुद्दा बनता है। यही नहीं, यह काम आज भी एक खास जाति या तबके के जिम्मे ही है। पिछले 25 साल में उन्नीस सौ से ज्यादा कर्मचारी सफाई करते हुए मौत के मुंह में समा गए हैं। अरसे से इसके खिलाफ सक्रिय सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक और रैमन मैगसायसाय पुरस्कार विजेता बेजवाड़ा विल्सन से इस बेहद संगीन मसले पर संपादक हरवीर सिंह ने विस्तार से बातचीत की। प्रमुख अंशः

बाजार, राज्य और समाज

मौजूदा व्यवस्था गैर-बराबरी में भयंकर इजाफा कर रही है

बढ़ती असमानता का खुलासा करती रिपोर्ट

दारीकरण के दौर में जब भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली बन गई है, फिर भी वहां असमानता क्यों बढ़ रही है

अवचेतन मन की सपनीली दुनिया

सुधांशु गुप्त का यह दूसरा कहानी संग्रह है

ब्रेस्ट कैंसर परित्यक्ताएं

देश में पुरुष प्रधान समाज का एक और विद्रूप चेहरा सामने आने लगा, युवा स्त्रियों में स्तन कैंसर के मामलों में हुआ इजाफा, तो शादियां टूटने के मामले भी बढ़े

मकसद बदले तो पुलिस सुधरे

औपनिवेशिक विरासत से मिली पुलिस व्यवस्‍था में अरसे से लंबित सुधारों पर अमल जरूरी

जमीन से उठे बिरला पहुंचे बिरले पद पर

स्पीकर पद की ऊंची और निष्पक्ष विरासत पर खरे उतरने की चुनौती

लोकतंत्र में स्वतंत्रता की रक्षा

एक राष्ट्र, एक आराध्य अंततः एक शासन और एक शासक की तानाशाही का प्रस्थान बिंदु बन सकता है

अपने को अभागा मानने का आनंद

नेता को शिकायत रहती है कि उसे उसकी काबिलियत के मुताबिक सम्मान नहीं मिला। भले ही वह प्रधानमंत्री हो जाए

जनपक्षीय संस्कृति की रूह का चले जाना

बहुमुखी प्रतिभा वाले गिरीश कट्टरता और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का बौद्घिक दायित्व हमेशा निभाते रहे