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“खुला है किसानों को मदद बढ़ाने का विकल्प”

केंद्र सरकार किसानों के मोर्चे पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और यही वजह है कि हाल में पेश 2019-20 के बजट में किसानों को सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता घोषित की गई। इसकी 2000 रुपये की पहली किस्त चालू वित्त वर्ष में ही करीब 12.5 करोड़ किसानों के खाते में जमा हो सके इसके लिए मजबूत रणनीति बनाई गई। साथ ही इस मदद में बढ़ोतरी का विकल्प भी सरकार ने खुला रखा है। इस फैसले के साथ ही बजट में किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने और कर्ज के पुनर्गठन की स्थिति में भी ब्याज छूट का प्रावधान कर दिया गया है। इन कदमों के साथ ही कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए सरकार के फैसलों और बजटीय प्रावधानों पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह के साथ आउटलुक के एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव ने लंबी बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंशः

पुलवामा के बाद

गम और गुस्से की इस घड़ी में संतुलित रवैया जरूरी है, युद्धोन्माद पैदा करने की कोशिश नहीं। सरकार को सभी विकल्पों को तौलकर कोई कदम उठाना चाहिए और चूकों तथा गफलतों के लिए जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए

हैरान देश अब जवाब चाहता है

आखिर कब शहीदों के जनाजों का सिलसिला टूटेगा!

युद्ध और अलगाव के घने बादल

पुलवामा हमले में खुफिया से लेकर कई तरह की सुरक्षा चूक, मगर भावनाओं के उबाल से युद्ध की आशंका

‌विकल्प थोड़े, चिंताएं बड़ी

हाल के वर्षों में तनाव चरम पर, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग करने की मजबूत पहल

चूक, नाकामियां और सबक

पुलवामा हमले से उभरीं नई सुरक्षा चुनौतियां, सीमा पार व्यापक कार्रवाई सहित कई विकल्प खुले

उपेक्षा के भी मारे जवान

लगातार तैनाती, सुविधाओं की कमी, प्रोन्नति के कम अवसर की वजह से अर्द्धसैन्य बलों में बढ़ा मोहभंग

गठजोड़ की सियासी बाजी

सूखा, बेरोजगारी जैसे मुद्दों से भाजपा-शिवसेना गठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस-राकांपा के लिए दांव ऊंचे

टूट से डगर हुई और मुश्किल

आम चुनावों से पहले फूट के कारण शिअद-भाजपा गठबंधन और आप का संकट गहराया, तीसरे मोर्चे की आहट से कांग्रेस को फायदा संभव

प्रियंका से कितना फर्क

प्रियंका की सक्रियता से कांग्रेस में जोश बढ़ा मगर स्थितियां जटिल, भाजपा और सपा-बसपा भी उलझन में

दामाद के बहाने निशाना

जांच के बहाने अपने विरोधियों को मात देने का लग रहा आरोप

गोलबंदी और रणनीति

पुलवामा हमले और राफेल पर कैग रिपोर्ट से परिस्थितियां नई, मगर मोर्चेबंदियां होने लगीं साफ

मुद्दे, बेचैनी और छात्र संगठन

शिक्षा, रोजगार, शिक्षकों के मुद्दे अनेक और बेचैनी भी जबरदस्त, मगर बड़ी पार्टियों से जुड़े छात्र संगठनों का रवैया कुछ सुस्त

रईसजादों का नया शौकः गेम शूटिंग न्यू एज हंटिंग

केवल शौक और रोमांच के लिए कई रसूखदार और खिलाड़ी वन्यजीवों के शिकार जैसे अपराध में लिप्त

रईसजादों का नया शौकः कमजोर कानून का खामियाजा

वन्यजीव शिकार और तस्करी पर रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुकूल कानून जरूरी

नाम-धाम कमाने से पहले

साड़ी की दुकान में सेल्सगर्ल से लेकर मामूली क्लर्की तक, कुछ सेलेब्रिटी की जबानी, उनके शुरुआती काम

रईसजादों का नया शौकः ‘ये शिकारी ज्यादा खतरनाक’

दुनिया भर में वन्यजीवों और उनके अवशेष की तस्करी का एक बड़ा केंद्र कथित तौर पर भारत है, जहां से चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया के देशों में बड़े पैमाने पर ले जाया जाता है। तस्करों के निशाने पर न सिर्फ लुप्तप्राय और संरक्षित वन्यजीव हैं, बल्कि वनों के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी खतरा मंडराने लगा है। यहीं, ‌शिकार का नया ट्रेंड भी उभर रहा है, जिससे खतरा बढ़ गया है। ऐसे में इसकी रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? इस मसले पर आउटलुक के एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की एडिशनल डायरेक्टर तिलोतमा वर्मा से विस्ताटर से बातचीत की। कुछ अंशः

विविधता को तरजीह

जीवनी, यात्रा, संस्कृति, खान-पान जैसे विषयों पर शोधपरक और इलेस्ट्रेटेड किताबों से कितना व्यापक होगा हिंदी का संसार

राजद्रोह, राष्ट्रवाद और लोकतंत्र

देश में कत्ल की रपट लिखवाने में नाकों चने चबाने पड़ते हैं, वहीं राजद्रोह की रपट बिना देरी दर्ज हो जाती है

मार्केटिंग का कुंभ

कुंभ का गहरा सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक और मार्केटिंग महत्व है

कोई दूसरा नामवर न हुआ

उर्दू साहित्य में जैसे कोई दूसरा गालिब न हुआ, भाषा विज्ञान में कोई दूसरा नोम चोम्स्की न हुआ, बांग्ला में कोई दूसरा टैगोर नहीं हुआ, हिंदी की दुनिया में भी कोई दूसरा नामवर न हुआ