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नतीजों से निकलेगी अगली सियासत

आम चुनाव के पहले पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे कई चेहरों और मुद्दों को कर सकते हैं फीका तो कई होंगे रोशन

जनहित या राजनैतिक हित

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टियों और उनसे जुड़े संगठनों की गतिविधियां, प्राथमिकताएं, कार्यशैली और बयानबाजी चिंता का सबब बनती जा रही हैं। इसमें धार्मिक मुद्दों, सामाजिक पृष्ठभूमि, न्यायपालिका सभी को घसीटा जा रहा है

मुद्दे भटके मगर मतदाता मुखर

पारंपरिक दावेदारों भाजपा-कांग्रेस के बीच की लड़ाई बागियों और छोटे दलों की मौजूदगी से हुई दिलचस्प, प्रचार में दिख रहे सारे पैंतरे

नाराजगी राज पर भारी

वसुंधरा सरकार से नाराजगी तो हर तरफ मगर असमंजस भी कई, कांग्रेस में स्पष्ट चेहरे की दुविधा भी बदस्तूर

कहीं दांव उलटा न पड़े

जल्दी चुनाव कराने के टीआरएस और महागठबंधन बनाकर चुनौती देने के कांग्रेस-टीडीपी ‍के दांव की परीक्षा

बरकरार या बदलाव

भाजपा के विकास के नारे पर नाराजगी भारी पड़ती दिखी, कांग्रेस की अपील लगी दमदार

मध्य डिगा तो मुट्ठी खुली

शिवराज के चेहरे और कांग्रेस के लोकलुभावन वादों के बीच मालवा ही तय करेगा अगली सरकार

फिर सिर उठाने लगे आतंकी मंसूबे

करतारपुर कॉरीडोर से सौहार्द की पहल क्या आतंकी आग फिर धधकाने के मंसूबों पर भारी पड़ेगी? निरंकारी समागम पर हमले से उभरे अपशकुनी संकेत

फिर से आतंक के रडार पर

करतारपुर कॉरीडोर का खुलना संबंधों के सुधरने का संकेत, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती भी

कलह से बिखरता कुनबा

पारिवारिक भितरघात ने चुनाव से पहले इनेलो को बनाया कमजोर

कर्जमाफी से भी नहीं बहुरे दिन

यूपीए सरकार की कर्जमाफी से पटरी पर लौटी सहकारी समितियों की हालत फिर से खस्ता, माली हालत नहीं बदल पाई योगी सरकार

अलगाव बढ़ाने की जुगत

पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस की सरकार बनाने की कवायद के बाद राज्यपाल के विधानसभा भंग करने से उठ रहे कई सवाल

जिम्मेदारियों के बोझ से लदा रामखेलावन

हमारा आधुनिक समय, समाज और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का महल जिम्मेदारियों की बुनियाद पर टिका है। इस बुनियाद की जद में है मीडिया, जो कि चौथा स्तंभ है

बेरोजगारी, धीमी रफ्तार, एनपीए बड़ी चुनौती

बैंक और एनबीएफसी क्षेत्र बड़े संकट में, अर्थव्यवस्‍था के कई बुनियादी क्षेत्रों को फौरी मदद की दरकार लेकिन हालात बहुत बुरे नहीं, अगर ढंग से कारगर कदम उठाए गए और लंबी रणनीति बनाई जाए तो हालात सुधरेंगे

न्याय व्यवस्था का एक विकल्प

भारत में बिहार अकेला ऐसा राज्य है जहां ग्राम पंचायत के साथ ग्राम कचहरी की भी व्यवस्था की गई है

दक्षिण में मंदिर सियासत

कुछ साल पहले तक केरल के बाहर मोटे तौर पर अचर्चित सबरीमला मंदिर अब देश भर में धर्म, समाज, राजनीति और कानून में स्त्रियों के साथ भेदभाव का मानो प्रतीक बन गया, क्या है हकीकत?

आस्था की रेल, हर सुविधा फेल

विशेष रेल श्री रामायण एक्सप्रेस की दशा तो ऐसी मानो कबाड़ से निकाल कर डिब्बों को जोड़ दिया गया हो लेकिन श्रद्धालुओं में उठतीं आस्‍था की लहरें खामियों-असुविधाओं पर भारी

एमएसपी इजाफे पर टेढ़ी नजर

डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश खासकर अमेरिका ने हाल में भारत में न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफे और बाजार संबंधित रियायतों को अंतरराष्ट्रीय करार के विपरीत बताया

स्टार्ट अप में न आइडिया अपना, न पूंजी अपनी

ज्यादातर स्टार्ट अप इसी मॉडल पर नमूदार हुए, सो, उन पर विदेशी दावेदारी की संभावनाएं भी ज्यादा

मौसम के मकान सूने हैं

कश्मीरी पंडितों के सूने घर कड़वी यादों के सबब बन गए हैं

नेता तो नतीजे के बाद ही चुनेगा हाइकमान

चुनाव आते ही भाजपा को राम याद आते हैं। हिंदू समाज जान गया है कि ये राम का दुरुपयोग कर रहे हैं। राम भी कभी आ गए तो इनको माफ नहीं करेंगे

“सरकार से लड़ रही जनता ”

इस बार मध्य प्रदेश के मतदाता बदलाव चाहते हैं और कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी

“पार्टी तोड़ने के लिए दी जा रही धमकी”

पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग करने को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

“मोदी स्त्री-हक में हों, तो सबरीमला का हल फौरन”

केरल में भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस वोटबैंक के लिए सबरीमला मामले में बड़ा राजनीतिक खेल खेल रहे हैं। कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों का रवैया भी साफ नहीं है

स्त्रियों का कौन-सा देश

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र की प्रोफेसर गरिमा के देह ही देश में सोवियत ब्लॉक के विघटन के पीछे पूंजीवाद के प्रति बढ़ते आकर्षण के विश्लेषण से ज्यादा उन औरतों की कहानी है

गंगा-जमुनी तहजीब वाली तरक्कीपसंद शायरा

धर्मनिरपेक्ष और दबे-कुचले इंसानों के प्रति हमदर्दी से भरी फहमीदा का जीवन बंधनों को तोड़ने के दुर्दम्य साहस की ऐसी प्रेरक गाथा है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा और आने वाली पीढ़ियां उनकी गाथा दोहराएंगी