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मैगज़ीन डिटेल

कविता की एक पंक्ति है- 'आशा पर टिका है आकाश।’ किसी आधार, स्तंभ, जड़ों का कोई निशान नहीं मिलता। दुनिया में महान भारत ही ऐसा राष्ट्र है, जहां करोड़ों लोग युगों-युगों से अच्छे दिन, अच्छे फल, उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ पूरी उम्मीद रखते हैं। इसलिए 2017 के लिए ज्योतिष विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र और कूटनीति के विशेषज्ञ जो भी आकलन करते हों, लाखों भारतीय जनवरी से चमत्कारिक परिणामों की आस संजोए हुए हैं।
आलोक मेहता

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