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उपलब्धियों पर भारी चुनौतियां

मौजूदा दौर में कोविड महामारी और लॉकडाउन से बदहाली के अलावा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले साल में खट्टे-मीठे अनुभव

चाहिए पुख्ता योजना

महामारी और आर्थिक संकट के इस दौर में दूरदृष्टि संपन्न ठोस और स्पष्ट नीतियों और केंद्र-राज्य के बीच बेहतर तालमेल से काम करने की दरकार है, जो कामयाबी दिला सकें

पहचान के नए संकट से मुठभेड़

डोमिसाइल सर्टिफिकेट के नियम पर उठ रहे अनेक सवाल

कैसे पार होगी चुनावी वैतरणी

राजनैतिक भविष्य बचाने के लिए दोनों ही पार्टी के नेताओं ने बगावती तेवर अपना लिए हैं

विपक्षी सियासत को कांग्रेसी हवा

मजदूरों के लिए बस की पेशकश करके कांग्रेस ने गरमाया माहौल

सुशासन बाबू की अग्निपरीक्षा

लॉकडाउन के बाद प्रवासियों के राज्य वापसी मुद्दे पर नीतीश पिछड़ गए हैं, आगामी चुनाव में उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है

हाल की छोड़, ले आए दूर की कौड़ी

संकट के समय सार्वजनिक क्षेत्र लड़ाई में सबसे आगे, जबकि सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही

अटकाना-लटकाना नहीं समाधान है सरकार की नीति

आज जब हम चुनौतियों से आंखें मिला रहे हैं तब मोदी सरकार के पिछले एक साल को अलग नजरिए से देखने की जरूरत है

जनादेश का गलत अर्थ निकाला

मोदी सरकार ने पहले साल में वैचारिक एजेंडा पर ही फुर्ती दिखाई, वास्तविक चुनौतियों को नजरंदाज किया

रिश्ते बचाने की दरकार

लिपू लेख दर्रे पर नेपाल के हाल के रुख पर चीन की स्पष्ट छाप, भारत को पड़ोसी देश के साथ ऐतिहासिक रिश्ते बचाने को प्रयास करने होंगे

अब जून-जुलाई की च‌िंता

बिना लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ने से संक्रमण रोकना मुश्किल, ऐसे में टेस्टिंग के तरीके पर उठे सवाल

महामारी को मात

केंद्र के दिशानिर्देशों से बहुत पहले केरल ने अपनाया डब्ल्यूएचओ का ‘टेस्ट, आइसोलेट एंड ट्रेस’ प्रोटोकॉल

राहत का भुलावा

सरकार के दावों से विशेषज्ञों की घोर असहमति, मांग बढ़ाए बिना अर्थव्यवस्था पटरी पर कैसे आएगी

पैकेज में काम का खास नहीं

छोटे-मझोले उद्यमियों ने बिना कोलेटरल वाले महंगे कर्ज को नकारा, पुराने कर्ज पर चाहते हैं ब्याज माफी

कोरोना काल में हुए बेसहारा

तीन महीने बाद भी मुआवजा नहीं, दंगा पीड़ितों का दोहरा संकट

लॉकडाउन रणनीति नहीं हुई कारगर

आंकड़ों से साफ दिखता है कि हम कोरोना के संक्रमण की दर को रोकने में कामयाब नहीं हो पाए। उलटे उसकी वजह से हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार भी इस गलती को समझ गई है

“सरकारी अस्पताल का विकल्प नहीं”

कई लोगों ने कहा कि आप जरूरत से ज्यादा सावधानी बरत रही हैं, पर हमने स्क्रीनिंग जारी रखी, दो हफ्ते बाद ही पता चला कि वायरस पूरी दुनिया में फैल रहा है

“महामारी को सरकार ने महात्रासदी में बदला”

भूकंप, सूनामी, बाढ़, चक्रवात तमाम आपदाएं आईं लेकिन गरीबों की ऐसी दुर्दशा कभी नहीं हुई। इसलिए इतनी बड़ी आपदा में सेना की मदद क्यों न ली जाए?

“बुनियादी अधिकारों की रक्षा से अलग है सुप्रीम कोर्ट”

सुप्रीम कोर्ट के सवाल न करने की स्थिति का सरकार पूरा-पूरा फायदा उठा रही है। हालात पूरी तरह फासीवाद जैसे हो गए हैं

“हालात नोटबंदी काल के संकट से भी ज्यादा गंभीर”

शहरों और सरकारों ने मजदूरों के साथ काफी अभद्र और अमानवीय व्यवहार किया है। इस व्यवहार से मजदूर कितने विचलित हुए होंगे, यह हम सोच भी नहीं सकते हैं

महंगा पड़ा रोमांच

सप्‍तरंग

प्रवासी मजदूरों का संकट

तालाबंदी में मजदूरों की सुध लेने वाला कोई नहीं, सरकारें मदद की बजाय श्रम कानून खत्म करने में व्यस्त

मोदी सरकार से बेहतर बदलाव की उम्मीद कम

कश्मीर में जब भी अनुच्छेद 370 को कमजोर करने की कोशिश की गई, राज्य में अशांति बढ़ी

एमएसएमई का एनपीए बढ़ने का खतरा

तीन लाख करोड़ रुपये के कोलेटरल फ्री लोन से क्रेडिट कल्चर को नुकसान

लोकल के लिए वोकल देश के ‌लिए नया सूर्योदय

स्वदेशी विचार और स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देकर देश विकास का नया मॉडल विकसित करने में सक्षम

किसानों को राहत देने का वक्त

नीति आयोग स्वीकार कर चुका है, किसानों को एमएसपी नहीं मिलता, इस वक्त इनकी सुध लेना जरूरी

कोविड-19 के बाद बदलेगी इमारतों की प्लानिंग

लोगों के रहन-सहन और काम की शैली के अनुरूप शहरों और इमारतों में बदलाव जरूरी

किसान, महंगाई, रिजर्व बैंक

बेहतर होगा कि किसानों के मामले में भी लेवल प्लेइंड फील्ड सिद्धांत अपनाया जाए और कीमत नियंत्रण के लिए उनके हितों की बलि न दी जाए