Home मैगज़ीन डिटेल
मैगज़ीन डिटेल

कैसे रफ्तार पकड़े जिंदगी

ग्रामीण भारत में है ‘इंडिया’ की सेहत सुधारने का फॉर्मूला, फौरी राहत और कृषि को मजबूत करना होगा सार्थक विकल्प

संतुलित रवैया जरूरी

केंद्र और राज्य सरकारों में तालमेल हो और फैसले ऐसे हों जो महामारी से जिंदगियां और आजीविकाएं दोनों बचाने के बीच संतुलन बना सकें। क्षुद्र राजनीति और कुत्सित सांप्रदायिक कोशिशें देशहित में नहीं

राज्यों का संकट ज्यादा गहरा

राजस्व के स्रोत बंद होने से कहीं वेतन में देरी तो कहीं भत्तों पर रोक

सुशासन बाबू की दुविधा

दूसरे राज्य प्रवासी मजदूरों और कोटा से छात्रों की वापसी में जुटे, लेकिन नीतीश का इनकार

तबाही रोकना चुनौती

प्रदेश में जांच की सुविधा अपर्याप्त, बचाव के उपाय भी नाकाफी

सराहे आगरा मॉडल ने ही खोली पोल

आगरा के मेयर की चिट्ठी और वायरल हुए वीडियो से आदित्यनाथ सरकार की कोशिशों पर फिरा पानी

कैबिनेट में दिखा शिवराज-सिंधिया का कद

सत्ता के नए समीकरणों को देखते हुए मुख्यमंत्री को कितना फ्री हैंड मिल पाएगा, यह बहुत बड़ा सवाल है

पैकेज देने में कोताही घातक

हर ओर यही मांग कि ठोस राहत पैकेज ही लॉकडाउन से ठप पड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकता है

हकीकत देखिए, हुजूर!

महज ख्याली पुलाव न पकाइए, महामारी की रोकथाम जरूरी मगर आर्थिक गतिविधियां ठप होने से दुश्वारियां बेइंतहा, अर्थव्यवस्था शून्य से 75 फीसदी नीचे पहुंची

दशकों पीछे जाने का डर

लॉकडाउन के बाद परमिट राज की संस्कृति को रोकना जरूरी, ऐसा नहीं होने से गंभीर संकट खड़ा होगा

नए मॉडल की जरूरत

बाजार को प्रभावित करने वाली अंतरराष्ट्रीय शक्तियों पर असीमित निर्भरता छोड़नी होगी

लेट-लतीफी से बढ़ा संकट

सरकार अच्छी तरह जानती है कि शुरुआत में उसने संकट से निपटने का अच्छा मौका गंवा दिया

मदद के लिए सितारों का हाथ

अगर कोरोना संकट अभूतपूर्व है तो बॉलीवुड की दरियादिली भी कल्पनातीत है

हालात सुधरना दूर की कौड़ी

जीडीपी में 40 फीसदी योगदान करने और 23 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाले कंस्ट्रक्शन, रिटेल, टेक्सटाइल, होटल सेक्टर ज्यादा प्रभावित

“केंद्र आर्थिक पैकेज दे”

लॉकडाउन खोलने या न खोलने का अधिकार राज्यों को देना चाहिए

संक्रमण का ग्राफ स्थिर करने में सफल

लॉकडाउन का उद्देश्य संक्रमण को रोकना और स्वास्थ्य सेवाओं के िलए तैयारी करना था। उसमें सफल रहे, अब धीरे-धीरे ढील के लिए तैयार हैं।

“किसान हैं पहली प्राथमिकता”

रबी की बंपर फसल से अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलने का अनुमान

“इतने बड़े संकट में भी केंद्र सरकार अपना एजेंडा चला रही है”

सरकार आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दे रही है, लेकिन मांग बढ़ाने पर नहीं। सिर्फ आपूर्ति बढ़ाने से अमीर और अमीर होंगे, गरीब और गरीब हो जाएंगे

आर्थिक नीतियों की हकीकत

पुस्तक समीक्षा

खुश रहना मुश्किल नहीं

खुश रहने की क्षमता विकसित की जा सकती है, येल यूनिवर्सिटी में यह सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रम बन गया

इस लुक दा जवाब नहीं

सप्‍तरंग

राहत पैकेज में देरी क्यों

आज ऐसे लाखों-करोड़ों लोगों को सरकार की मदद की जरूरत है, जिनके जीवन और आजीविका पर भारी संकट

गरीब जाना, वह बेसहारा

लॉकडाउन में हुए अध्ययन से पता चला है कि इन दिनों में करीब 270 मजदूर जान गंवा चुके हैं

मजदूर हकों की रक्षा करें

सरकारी खजाने पर कामगारों, छोटे और मझोले उद्योगों का वाजिब हक, इसे बड़े उद्योगों को नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें गरीबों के प्रति सामाजिक दायित्व निभाने को बाध्य किया जाना चाहिए