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महामारी से बढ़ी लाचारी

कोरोना के आगे विकसित देश भी लाचार, भारत रोकथाम से चूका तो जिंदगियों और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के लिए भारी खतरा

चूके तो नतीजे घातक

महामारी से निपटने में अभी दिख रही सुस्ती कहीं घातक न साबित हो। यह सरकार, चिकित्सकों और प्रशासनिक मशीनरी के साथ आम आदमी के लिए भी परीक्षा की घड़ी है

मंदिर के बाद एक और भूमि विवाद

श्रीराम की प्रतिमा और एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण में दिक्कतें, ग्रामीण वैकल्पिक जगह और ज्यादा मुआवजे की कर रहे मांग

सिंधिया का दांव कमलनाथ का पेच

ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा प्रवेश और उनके खेमे के 22 विधायकों की पाला बदल की कोशिश से कमलनाथ सरकार संकट में

लचर स्वास्थ्य सुविधाएं और आबादी बड़ी चुनौती

देश के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी यकीनन सरकार की है इसलिए कोरोना या दूसरी महामारी से बचाव के कदम उठाने की फौरन जरूरत है, लापरवाही और चूक घातक हो सकती है

खतरा बड़ा, नीतिगत सुस्‍ती बढ़ाएगी संकट

विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को तुरंत 20 सदस्यीय कार्यदल का गठन करना चाहिए जो आर्थिक चुनौतियों से निपटने का रोडमैप तैयार करे

मैराथन से बदलाव

इस तरह के आयोजन लोगों का नजरिया बदलने की मुहिम साबित हो रहे हैं

लड़कियों ने भी दिखाया दम

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की लोकप्रियता दर्शाती है, प्रसिद्धि के मामले में वे पुरुष खिलाड़ियों के बराबर

लोक संस्कृति पर भारी फिल्मी गाने

तमिलनाडु के ग्रामीण उत्सव में पारंपरिक स्थानीय नर्तकियों पर मंडरा रहा आइटम नंबर का खतरा

बंगबंधु जयंती पर रिश्तों की गांठ

भारत और बांग्लादेश अपनी मौजूदा चिंताओं को दूर कर आगे की राह तय करें, शेख मुजीबुर्रहमान को यही होगी सच्ची श्रद्धांजलि

शाहीन बाग का असर बदस्तूर

कश्‍मीर और एनपीआर पर सरकार के मुलायम रुख और केंद्र में सत्ता-संभाल के दूसरे तरीकों में दिखा विरोध प्रदर्शनों का भारी असर

अलगाव की खाई हुई चौड़ी

सुरक्षा की खातिर पीड़ित अपने समुदाय की बहुलता वाले इलाकों की तलाश में, मुहल्लों के बीच बढ़ी बाड़बंदी

भरोसे पर चोट

यस बैंक के प्रमोटर राना कपूर और बड़े कारोबारियों के गठजोड़ से पैदा हुए एनपीए संकट से खुद को ठगा महसूस कर रहे ग्राहक

भारत में फिर आबाद हो सकते हैं चीते

अफ्रीकी चीतों को देश में लाने की कवायद, लेकिन उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता; चीते वहीं बच पाए, जहां उन्हें पालतू नहीं बनाया गया

“जब इतने राज्य विरोध में हों तो क्या केंद्रीय कानून राष्ट्रीय कानून हो सकता है?”

शिअद-भाजपा सरकार ने पंजाब को जिस हाल में छोड़ा था, उसे देखते हुए स्थिति सुधरने में थोड़ा वक्त लगेगा। लेकिन मैंने इसे पूरा करने का वादा किया है

राजनीतिक समय में कविता

पुस्तक समीक्षा

इस आजादी के क्या मायने

डॉ. फारूक अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अगले कदम पर निर्भर होगी राज्य की राजनैतिक प्रक्रिया

गायब होते जा रहे विचार

आज सभी पार्टियों ने तात्कालिक स्वार्थों के लिए मूल्यों और आदर्शों को तिलांजलि दे दी है

लोकतंत्र का मखौल

दलबदलू विधायकों को छह साल के लिए अयोग्य ठहराया जाना चाहिए, ताकि वे दोबारा चुनाव न लड़ सकें

नियामक तंत्र की खामियां उजागर करता संकट

भारत के प्राइवेट बैंकों में कई सारी गंभीर समस्याएं हैं, इनमें से कइयों में कॉरपोरेट गवर्नेंस की दिक्कते हैं। यस बैंक, आइसीआइसीआइ बैंक और एक्सिस बैंक के प्रमुखों के विवाद इन बातों को पुख्ता करते हैं

उधार के ‘अच्छे दिन’!

किसानों का भ्रुगतान लटकाए रखकर चीनी मिलें ब्याज मुक्त पूंजी के बिजनेस मॉडल पर अच्छे दिन का मजा ले रही हैं और सरकार भी बेफिक्र है