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मैगज़ीन डिटेल

नाराज नागरिकों की आवाज

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर देश भर में विरोध का नजारा अन्ना आंदोलन जैसा, लेकिन सरकार से अभी भी कोई ठोस संकेत नहीं

बदलाव, जो सकारात्मक हों

नागरिकता कानून पर बहस और विरोध आगे भी जारी रहेगा, सुप्रीम कोर्ट भी इसकी वैधानिकता को परखेगा, इसलिए यह मुद्दा 2020 में भी बना रहेगा

बदला सियासत का रंग

खास तरह के भावनात्मक मुद्दे हुए खारिज तो भाजपा हुई पस्त, विपक्षी महागठबंधन को मिला बहुमत

अब झारखंड की राह पर सियासत

फिजा बदली तो उम्मीद बढ़ी कि एकजुट महागठबंधन यहां भी पड़ेगा भारी, बढ़ सकता है एनडीए में अलगाव

मजबूत हुई किलेबंदी

अशोक गहलोत साल भर में बहुमत का अंतर बढ़ाने में कामयाब, लेकिन आपराधिक घटनाओं से किरकिरी

चुनौतियों से निपटते बीता साल

कमलनाथ सरकार ने जनता पर मजबूत पकड़ कायम करके भाजपा का भय दूर किया

बघेल के चौके-छक्के

लेकिन पहले साल के बाद कई कड़ी चुनौतियां कर रही हैं इंतजार

रेत खनन पर सीएजी सख्त

सरकार बेफिक्र, अवैध खनन से पांच हजार करोड़ रु. की चपत, ‌हथिनीकुंड और कौशल्या बांध पर खतरा

बगावत से कमजोर

सुखबीर बादल के तीसरी बार अध्यक्ष बनने से वरिष्ठ नेता नाराज

इस उथल-पुथल से उपजे सवाल

नया कानून संविधान और भारत-विचार के विरुद्ध, वरना श्रीलंका, म्यांमार, भूटान के लोगों की चिंता कहां है

युवाओं की आवाज सुनिए

व्यक्तिगत आजादी और असंतोष के अधिकार खत्म करने वाले कानूनों को तत्काल बदलने की जरूरत

असमी आशंकाएं तो एकदम अलग

विभाजन के समय से समस्या झेल रहे असम में अपनी संस्‍कृति, पहचान, भाषा को लेकर हर धर्म के बहिरागतों का विरोध, वहां हिंदू-मुस्लिम एजेंडा नहीं

नागरिकता कानून जरूरी, लेकिन एनआरसी कैसे

मुसलमानों को भारत की तासीर से जोड़ने की पुरजोर कोशिश से ही अखंड भारत का सपना पूरा हो सकेगा

यह सरासर संविधान विरोधी

संविधान धर्म, देश, प्रताड़ना के प्रकार के आधार पर लोगों के वर्गीकरण की इजाजत नहीं देता

धर्मनिरपेक्ष नहीं रह गया भारत

संविधान धर्म के आधार पर भेदभाव करने की इजाजत किसी सरकार को नहीं देता

संघीय ढांचे में नागरिकता पर अराजकता

आधे से ज्यादा राज्यों द्वारा एनआरसी को लागू करने से इनकार करना, संवैधानिक संकट की दस्तक

सितारों के स्वर

बॉलीवुड में नागरिकता कानून पर कुछ फिल्मकारों ने तो खुलकर बोलने का जोखिम उठाया मगर बड़े सितारों ने चुप्पी को पॉलिटिकली करेक्ट माना

2019 सब कुछ जमीन पर

2019 सब कुछ जमीन पर

ना ! कहने की हिकमत

विश्व प्रतिरोध वर्ष

‘जीवित’ पुल: मेघालय की अनोखी देन

पेडों की जड़ों से बने पुलों को जर्मन शोधकर्ताओं ने बताया महत्वपूर्ण

“इस विघटनकारी एजेंडे से देश टूट जाएगा”

पूरे देश में एनआरसी लागू होता है तो अराजकता फैलेगी। यह देश को तोड़ेगा, संघीय ढांचे को तबाह करेगा। समझदारी यही है कि इस विचार को त्याग देना चाहिए

मुद्दा 2019 नागरिक प्रश्न

नए नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध ने देशव्यापी आंदोलन का रूप लिया, खड़े हुए कई सवाल

पुस्तक समीक्षा: कविता की सबसे विश्वसनीय इकाई

कविता की सबसे विश्वसनीय इकाई

भाई नीचे उतार दे

सप्‍तरंग

भारतीयता का वास्तविक स्वरूप

क्या नए नागरिकता कानून की अवधारणा भारत जैसे अनेक धर्मों, संस्कृतियों, भाषाओं, जीवन शैलियों से मिलकर बने विशाल देश में लागू की जा सकती है?

एनआरसी नहीं, बेरोजगार रजिस्टर की जरूरत

सरकार बार-बार बंटवारे की गलतियां दुरुस्त करने की बात कर उसके जख्मों को कुरेदकर ताजा कर रही है

इतिहास की गलतियों को सुधारने का रास्ता

नए कानून से भारतीय नागरिकों या मुसलमानों का कोई लेना-देना नहीं, इसलिए अफवाह फैलाना ठीक नहीं

यह महंगाई अच्छी है

देश के अधिकांश हिस्से में गोरक्षा की नीति नुकसानदेह रही, क्योंकि किसानों के लिए दूध नहीं देने वाले गोवंश को संभालना मुश्किल हो गया है

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