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भारतीय संस्कृति का यह विचलन !

देश की एकता और अखंडता के लिए अनिवार्य है कि सभी धर्म, समुदाय, संस्कृतियों के बीच साझा संवाद हो

बदलावों के बुनियादी बिंदु

मौजूदा घटनाक्रम ऐसे बदलाव और सवाल पैदा कर रहा है, जो हमारे देश में लोकतंत्र और समावेशी संस्कृति के लिए नए-नए संकट ला रहा है। इस पर विचार जरूरी है

महाबली की धोबी पछाड़

किंगमेकर कहलाने वाले ठाकरे परिवार के उद्धव मुख्यमंत्री बने, लेकिन शरद पवार ने दिखाया मराठा दमखम

इस ‘सामान्य’ में वादी बदहाल

स्थिति सामान्य होने के गृह मंत्री के दावे के विपरीत घाटी में पाबंदी बरकरार, तीन माह बाद भी मुख्यधारा के नेता हिरासत में

लोगों के मुद्दे और पार्टियों के और

मंदिर और आरक्षण के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश

धर्म, बाजार, राजनीति और संस्कृति का कुमेल

आज हिंदी प्रदेश सांस्कृतिक दृष्टि से सर्वाधिक संकटग्रस्त हैं, जिसकी जड़ें अस्सी के दशक से ही गहरने लगीं

जिन्ना को सही बताने की जिद

धर्म, संस्कृति, भाषा, सभी में ऐसे तत्च तेजी से घुल रहे हैं, जिससे साझी संस्कृति और विरासत खतरे में

तकनीक ने आसान बनाया जीवन

आम आदमी तक सूचनाओं की आसान पहुंच ने बदली तसवीर, अफवाहों से भी सतर्क किया

राशन की दुकान पर साहित्य

साहित्य और संस्कृति का दायरा सिकुड़ा तो विकृतियां पैदा हुईं और असली मुद्दों से ध्यान हट गया

‘कोई दूसरा नहीं’

संस्कृति, अपसंस्कृति, विकृति की विचित्र यात्रा की सुखभ्रांति

धर्म का पर्याय नहीं है संस्कृति

भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से ही साझी रही है, जब-जब इसे एकांगी बनाने की कोशिश हुई, देश बंट गया

मोबाइल फोन के जरिए संगीत क्रांति

संगीत में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन इससे संगीत की विविधता घटेगी या बढ़ेगी?

'मैक माफिया' नवाज

सप्‍तरंग

संस्कृति के सवाल

नई सहस्रा‌ब्दी के दूसरे दशक में उत्तर-स्मृति और सांस्कृतिक बदलाव के दौर पर लेखकों-संस्कृतिकर्मियों की राय

राजनीतिक मर्यादा का चीर हरण

ऐसी क्या संवैधानिक इमरजेंसी थी कि रातों-रात राष्ट्रपति शासन हटाकर नया मुख्यमंत्री बना दिया गया

फीस बढ़ाना जरुरत या साजिश?

फिर साबित हुआ कि विकास और ज्ञान की सरकारी परिभाषा में गांव-कस्बों के छात्र शामिल नहीं