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खिचड़ी की कहानी

NOV 06 , 2017

खिचड़ी स्वास्थ्यवर्धक है, ऐसा किसी से सुना है क्या। लेकिन स्वास्थ्य खराब होने पर खिचड़ी की शरण में सभी को जाना पड़ता है। खिचड़ी ऐसी छोटी-मोटी डिश नहीं है। खिचड़ी का एक समृद्ध इतिहास रहा है। दाल-चावल तो मुख्य सामग्री है ही लेकिन इसमें जो चाहे डाल कर पकाइए, खिचड़ी सभी को समाहित कर लेती है।

खिचड़ी एक नाम अनेक

गुजरात की राम खिचड़ी बोलिए, महाराष्ट्र की वलाची खिचड़ी, आंध्रप्रदेश की कीमा खिचड़ी, कर्नाटक-तमिलनाडु की बेसीभिली भात या राजस्थान का खिचड़ा। सब कुछ मिलजुल कर खिचड़ी ही बनती है। राजस्थान में चावल कम और बाजरा ज्यादा का खिचड़ा तो सर्दियों का पकवान है।

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खिचड़ी का इतिहास

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के एक सर्वे में प्रमाण मिले हैं कि 1200 ईस्वी से पहले भारतीय लोग दाल-चावल को मिला कर खाया करते थे। इसके अलावा मगध के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री और कूटनीति के लिए विख्यात चाणक्य ने भी खिचड़ी को संतुलित आहार बताया है। चाणक्य के अनुसार एक भाग चावल, एक चौथाई भाग दाल, हल्का नमक और घी के साथ खिचड़ी खाना फायदेमंद होता है।

मुगलों की पसंद खिचड़ी

बीरबल की प्रसिद्ध खिचड़ी के अलावा भी मुगलों के खिचड़ी खाने के किस्से हैं। कहा जाता है कि शाहजहां के काल में ही शाही बावर्ची खाने में कीमा खिचड़ी पकती थी। कहा जाता है कि मुल्ला नसीरुद्दीन ने पहली बार ‘खिचड़ी के चार यार, घी-दही-पापड़-अचार’ वाक्य बोला था।

खिचड़ी में सबका स्वागत है

खिचड़ी में सबसे ज्यादा चावल के साथ मूंग दाल का उपयोग होता है। लेकिन उत्तर प्रदेश में काली उड़द और दक्षिण भारत में काला चना डाल कर भी खिचड़ी पकाई जाती है। कश्मीर में साबुत मसालों के साथ तेजपत्ते का तड़का और उत्तर भारत में मटर, गाजर और फूलगोभी के साथ खिचड़ी बनाने का रिवाज है।

संक्रांति पर खास

गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश में संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने का खास रिवाज है। गुजरात में संक्रांति के दिन बनने वाली खिचड़ी में सब्जियां भी डाली जाती हैं। इस विशेष खिचड़ी को उंधियूं के साथ खाया जाता है। उंधियूं खूब सारी सब्जियों को मिला कर बनाया जाता है।  


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