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एक उम्र के बाद महिलाओं को जरूर कराना चाहिए ये टेस्ट

आउटलुक टीम - FEB 28 , 2019
एक उम्र के बाद महिलाओं को जरूर कराना चाहिए ये टेस्ट
एक उम्र के बाद महिलाओं को जरूर कराना चाहिए ये टेस्ट
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अक्सर ऐसा देखा गया है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी लापरवाह रहती हैं। उनका खुद का स्वास्थ्य परिवार में सबसे बाद में आता है। ऐसे में पहले से कुछ मेडिकल टेस्ट कराने की बात को बेहद कम ही अहमियत दी जाती है। हालांकि रेगुलर मेडिकल चेकअप सभी के लिए जरूरी है, इससे न केवल बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है बल्कि किसी बीमारी का संकेत मिलते ही तुरंत इलाज करना भी आसान हो जाता है।

तो आइए जानते हैं ऐसे कौन से टेस्ट हैं, जिन्हें हर महिला को एक उम्र के बाद जरूर कराना चाहिए-

थायराइड फंक्शन टेस्ट

ये ब्लड टेस्ट है, जाो हाइपोथायराइडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म का पता लगाने के लिए होता है। अगर रिजल्ट नॉर्मल आता है, तो साल में एक बार ये टेस्ट कराने को कहा जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में थायराइड डिसऑर्डर महिलाओं में तीन गुना ज्यादा आम है। भारत में हर 10 में से 1 व्यस्क हाइपोथायराइडिज्म से जूझता है।

35 साल की उम्र के बाद हाइपोथायराइडिज्म का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा कहा जाता है कि हर तीन में से एक हाइपोथायराइड पेशेंट को अपनी हालत के बारे में पता नहीं होता। डॉक्टर्स का भी ऐसा मानना है कि थॉयराइड की दिक्कत किसी भी उम्र में हो सकती है। 20 की उम्र के बाद रूटीन हेल्थ चेकअप में थॉयराइड टेस्ट करा लेना चाहिए।

कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी)

एनीमिया, इंफेक्शन और कुछ तरह के कैंसर का पता लगाने के लिए ये टेस्ट किया जाता है। ये टेस्ट 20 की उम्र के बाद भारतीय महिलाओं के लिए और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि भारत में ज्यादातर महिलाओं में आयरन की कमी देखी गई है, जिन्हें सप्लीमेंट दिए जाने की जरूरत है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे, 2016 में पाया गया था कि 53.2 फीसदी गैर-गर्भवती महिलाएं और 50.4 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं। 

पैप स्मीयर टेस्ट

इसके जरिए सर्विक्स में प्री-कैंसरकारक बदलाव का पता लगाया जा सकता है. ये टेस्ट 21 की उम्र के बाद खासकर सेक्सुअली एक्टिव हर महिला को कराने की सलाह दी जाती है।

30 की उम्र के बाद अगर लगातार 3 साल टेस्ट रिजल्ट नॉर्मल आते हैं, तो इसे हर 3-5 साल पर दोहराया जा सकता है। ऐसा बताया जाता है कि पैप स्मीयर टेस्ट एचपीवी टेस्ट के साथ होना चाहिए।

मैमोग्राम

40 की उम्र के बाद मैमोग्राफी बेहद अहम हो जाती है। अगर पिछली मैमोग्राफी नॉर्मल रही हो, तो 40 की उम्र के बाद महिलाओं को हर दो साल पर मैमोग्राफी करानी चाहिए, जिन महिलाओं में कैंसर का कोई पारिवारिक इतिहास रहा हो, उन्हें 20 साल की उम्र से ही हर 3 साल में जांच करानी चाहिए और ऐसी महिलाओं को 40 की उम्र के बाद हर साल ये जांच करानी चाहिए।

पेट का अल्ट्रासाउंड

स्‍पेेस्लिस्‍ट 30 की उम्र के बाद पेट का अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देती हैं। पेट का अल्ट्रासाउंड कराने से ओवेरियन और यूटरस कैंसर के मामले में कुछ संकेत मिल सकते हैं, जिसके बाद आगे और टेस्ट कराए जा सकते हैं।

लिपिड प्रोफाइल

इस टेस्ट से आपके दिल के सेहत का पता चलता है। इस ब्लड टेस्ट में आपके कुल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, एचडीएल और एलडीएल लेवल का पता चलता है। आमतौर पर टेस्ट रिजल्ट नॉर्मल आने के बाद हर 2 साल पर और अगर आप मोटापे, दिल से जुड़ी किसी बीमारी या डायबिटीज से ग्रस्त हैं, तो साल में एक बार ये टेस्ट कराने को कहा जाता है।

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