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एक फोटो रोज, जीवन में रहेगी मौज

MAY 01 , 2018

पहले कहावत होती थी, ‘एन एप्पल अ डे, कीप्स डॉक्टर अवे’ अब नए जमाने में यह बदल कर ‘वन क्लिक अ डे, कीप्स ब्लूज अवे’ हो गई है। यानी रोज एक सेब खाने से डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती। पर अब एक नई रीसर्च कह रही है कि हर दिन एक फोटो खींचने पर ब्लूज यानी अवसाद या उदासी पास नहीं फटकती।

मोबाइल से लगातार फोटो खींचने को अब तक लत माना जाता था। लेकिन इस लत के पीछे भी अब सकारात्मक पहलू सामने आ गया है। खुशनुमा जीवन के लिए यह लत फायदेमंद हो सकती है।

इस अध्ययन को करने वाले डॉ. लिज ब्रिवेस्टर लिसेस्टर विश्वविद्यालय में हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शेफिल्ड में डॉ. एंड्रयू कॉक्स के साथ मिल कर एक रेकॉर्ड मेंटेन किया कि लोग किस तरह की फोटो खींचते हैं। फिर इसे किसी को भेजने के लिए किस तरह का संदेश लिखते हैं और किसी और के फोटो पर कैसे जवाब देते हैं। उन्होंने दो महीने लगातार इस पर नजर रखी। तब डॉ. ब्रिवेस्टर और डॉ. कॉक्स ने पाया कि रोज फोटो लेने से लोगों में सकारात्मकता बढ़ती है।

ऐसे लोगों में खुद की परवाह की भावना बढ़ती है, ये लोग एक-दूसरे से बढ़िया संवाद कर पाते हैं और फोटो खींचने के खातिर ही सही हमेशा कुछ नया और अलग सा तलाशते रहते हैं। इससे लोगों को सकारात्मक रहने में मदद मिलती है।

इन्हीं में से एक प्रतिभागी ने बताया, ‘मेरी नौकरी बहुत तनावपूर्ण थी। काम इतना था कि सांस लेने की भी फुर्सत नहीं थी। बस तभी मेरा ध्यान एक छोटे से कीड़े की तरफ गया जो मेरे कंप्यूटर पर बैठा हुआ था। मैंने अपना सब काम छोड़ा और उसका फोटो लेने की कोशिश करने लगा। थोड़ी देर के लिए मेरा ध्यान काम पर से हट गया और जब मैंने उसकी फोटो खींच ली तो एक अलग तरह का संतोष मुझे महसूस हुआ। मुझे फोटो खींचना उपलब्धि की तरह लगा।

इसी तरह कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि एक फोटो खींचने के लिए उन्हें कई बार बहुत प्रयास करने पड़े और इससे उनकी दूसरे तरह के काम करने की क्षमता भी बढ़ी। इस आदत की वजह से कई लोगों से परिचय हुआ और समान रुचि वाले लोग खोजने में मदद मिली।

एक प्रतिभागी ने बताया कि उनके फोटो कुछ खास अच्छे नहीं होते थे। लेकिन कोई उस पर कमेंट करता था तो और अच्छा फोटो खींचने की प्रेरणा मिलती थी। लोगों ने माना कि दफ्तर के काम से इतर कुछ और करना और रोजमर्रा के जीवन को तनाव को कम करने में इस लत ने उनका बहुत साथ दिया।

इस अध्ययन के साथ कई प्रतिभागियों के अनुभव को एक हेल्थ जरनल ने प्रकाशित किया है।


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