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'इंटरनेट पर परोसी जा रही इस्‍लाम, जेहाद की गलत परिभाषा'

जमात-ए-उलेमा हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी मुसलमानों के रहने के लिए भारत को बेहतरीन देश मानते हैं, हालांकि उनके इस बयान से मुसलमानों में एक तबके ने तीखी प्रतिक्रया दी है। मौजूदा समय में आतंकवाद, युवा मुसलमान, भारत में असहिष्णुता, हिंदू नेताओं के मुसलमानों के खिलाफ आए दिन जहर उगलने जैसे मुद्दों पर आउटलुक की विशेष संवाददाता मौलाना महमूद मदनी से खास मुलाकात-
'इंटरनेट पर परोसी जा रही इस्‍लाम, जेहाद की गलत परिभाषा'

प्र. पेरिस में हुए आतंकी हमले के बाद आतंकी वारदतों में बच्चों को शामिल करने पर क्या कहेंगे?

नई पीढ़ी इंटरनेट के एक्सप्रेस-वे पर है। इंटरनेट के जरिये उसे जो परोसा जा रहा है, यह उसी के नतीजे हैं। उसके अच्छे नतीजे भी होते हैं और बुरे भी। ये बुरे नतीजे हैं। 

 

प्र. इस पीढ़ी को इंटरनेट के जरिये क्या गलत परोसा जा रहा है?

इस्लाम, कुरान और जिहाद की गलत परिभाषा, जो असलियत से अलग है। मौजूदा सिस्टम से लोगों को मायूसी हो रही है। नाउम्मीदी है। सेना कभी भी इस समस्या का हल नहीं हो सकती। सेना इसका अस्थाई हल है। स्थाई हल के लिए दुनिया को चाहिए कि उस विचारधारा का जवाब देना जिसकी वजह से लोग कट्टरपंथ की ओर जा रहे हैं। न्याय के दोहरे मयार दूर करने होंगे। 

 

प्र. आपने कहा कि भारत मुसलमानों के रहने के लिए सबसे महफूज मुल्क है। दादरी के अखलाक समेत तमाम घटनाएं, मुसलमानों को किराये पर घर न देना, हर दिन पाकिस्तान जाने को कहना, मुसलमान होना गुनाह है, सोचने पर मजबूर करना आदि, ऐसे माहौल में आपकी बात कहां तक सही है?

मैं इस बात से सहमत हूं। ऐसा माहैल बनाने वाले देशद्रोही और समाज के दुश्मन हैं। जब से केंद्र में नई सरकार आई है, खासतौर पर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि मुसलमान मायूस हो जाएं। लेकिन इसी माहौल की वजह से मुझे ऐसा कहना पड़ा कि भारत मुसलमानों का है और मुसलमान भारत के हैं। मुट्ठी भर लोग भारत की भारतीयता, भारत की सुंदरता, भारत की उदारता भारत से नहीं छीन सकते हैं। मुझे अटूट विश्वास है कि भारत के लोग सदियों की परंपरा के मुताबिक भारत को संभालकर रखेंगे। भारत की हजारों साल पुरानी गंगी-जमुनी तहजीब को टूटने नहीं देंगे। इसी विश्वास से कहता हूं कि मुसलमानों के रहने के लिए भारत से बेहतर कोई देश नहीं।

 

प्र. देश में असहिष्णुता पर बहस जारी है, आपका क्या कहना है?

बिल्कुल सही है। भारत में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है और केंद्र सरकार चुप है। केंद्र सरकार की चुप्पी और भारत को तोड़ने की ओर ले जाने वाली कोशिश करने वालों पर अंकुश न लगाने की नीति ने ऐसा माहौल पैदा किया है।

 

प्र. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि मुसलमान युवाओं को आतंकवाद की राह पर जाने से बचाने के लिए मुसलमान समुदाय से ही आवाज आए। इस पर क्या कहेंगे?

मैं इस बात से ही सहमत नहीं हूं। जो कट्टरवाद फैला है, आतंकवाद फैला है, वह इनकी ही देन है। इन्होंने ही ऐसे समूह तैयार किए, पैसा दिया, हथियार दिए, उन्हें खड़ा किया, लड़वाया, मुल्कों के मुल्क बरबाद कर दिए। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा भी कि ईराक में उनसे गलती हुई है। आप गलत रिपोर्ट बनाएंगे, गलती करेंगे, दस लाख लोग मारे गए, औरतें बेवा हो गईं, बच्चे यतीम हो गए। उसी जमीन पर फिर आपने आईएसआईएस को जिंदा कर दिया। और अब हमें बोल रहे हैं कि हम इनके खिलाफ बोलें। हम तो इनके खिलाफ खैर बोलेंगे ही क्योंकि आईएसआईएस का इस्लाम या मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं है। इसलिए बेहतर होगा कि ओबामा अपने गिरेबान में झांकें।

 

प्र. विश्वस्तर पर अगर आतंकवाद की बात हो रही है तो देश में हिंदू कट्टरवाद भी मुखर हो रहा है, इसपर क्या कहेंगे?

सही है। हिंदू युवाओं को कट्टरवाद की ओर जाने से रोकने की आवाज समाज से आनी ही चाहिए।   

 

प्र. योगी आदित्यनाथ,साध्वी प्राची,साध्वी रितंभरा,साध्वी निरंजना जैसों के मुसलमानों के खिलाफ बयानों को कैसे लेते हैं?    

ये लोग नफरत फैलाने वाले, देशद्रोही और गद्दार हैं।

 

प्र. देश में मुसलमानों को अलग-थलग करने की कोशिशें की जा रही हैं?

कोशिशें ही हैं, जो कामयाब नहीं होंगी।

 

प्र. आए दिन मुसलमानों को पाकिस्तान जाने की नसीहत दी जाती है, क्या कहेंगे?

भारत में बसने वाले दूसरे लोग बाए चांस इंडियन हैं, मुसलमान बाए च्वाइस इंडियन है। हमारे पास तो इस्लाम के नाम पर बनने वाले देश जाने का विकल्प था लेकिन हम नहीं गए। नापने लगें तो ज्यादा बड़ा भारतीय कौन हुआ? हमें पाकिस्तान जाने की नसीहत देने वालों को मेरा कहना है ‘इसी गली की हैं खाक से, यहीं खाक अपनी मिलाएंगे, न बुलाए आपके आए हैं, न निकाले आपके जाएंगे।’

 

 

        

 

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