Home रूबरू सामान्य “2018 में बाजार चढ़ना चाहिए, भले ही रफ्तार धीमी रहे”

“2018 में बाजार चढ़ना चाहिए, भले ही रफ्तार धीमी रहे”

JAN 02 , 2018
“2018 में बाजार चढ़ना चाहिए, भले ही रफ्तार धीमी रहे”
“2018 में बाजार चढ़ना चाहिए, भले ही रफ्तार धीमी रहे”
राकेश झुझुनवाला

राकेश झुनझुनवाला, जिन्हें अक्सर भारतीय शेयर बाजार का छलिया कहा जाता है, उभरते भारत को लेकर दृढ़तापूर्वक आशान्वित रहे हैं। तब भी जब स्टॉक मार्केट घोटालों में फंसकर बदनाम हो गया था। पढ़ाई-लिखाई से चार्टर्ड अकाउंटेंट आरजे (दोस्त उन्हें इसी नाम से जानते हैं) ने जब शुरुआत की तो सेंसेक्स 150 अंकों पर हुआ करता था। आज यह 33,700 के पार पहुंच चुका है और झुनझुनवाला 3.2 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ फोर्ब्स पत्रिका की फेहरिस्त में 54वें सबसे अमीर भारतीय हैं। 

2018 में बाजार की दिशा क्या होगी? इससे जुड़े मालिनी भूप्ता के सवालों का राकेश झुनझुनवाला ने अपने अंदाज में पूरी साफगोई से जवाब दियाः

बाजार के लिए 2018 कैसा रहेगा?

दुनिया भर के बाजारों में तेजी है और यही हाल भारतीय बाजार का है। बेशक, भारतीय अर्थव्यवस्‍था सुधार की ओर है और आगे 2018 में सुधार जारी रहने की उम्मीद है। 2017 में बाजार ने तगड़ी छलांग लगाई है और 2018 में बाजार चढ़ना नहीं चाहिए, इसकी कोई वजह मुझे दिखाई नहीं पड़ती। भले ही रफ्तार धीमी रहे।

2018 में कौन-से फैक्टर बाजार को दिशा देंगे?

बाकी चीजों के अलावा अमेरिकी ब्याज दरें, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के केंद्रीय बैंकों के कदम, मानसून, बैंकों के एनपीए का निपटारा, मुद्रास्फीति, राजकोषीय प्रबंधन, राज्यों के चुनाव, स्थानीय ब्याज दरें और घरेलू तथा विदेशी पूंजी का प्रवाह ऐसे फैक्टर हैं जो मार्केट को ड्राइव करेंगे।

क्या हम तेजी के चरम पर पहुंच चुके हैं?

अभी हम चरम पर नहीं पहुंचे हैं, लेकिन बुल रन जारी है।

क्या बरसों की नीतिगत जड़ता के बाद भारतीय अर्थव्यवस्‍था अब ऊंची विकास दर हासिल करने वाली है?

2010-2014 के बीच पूंजीगत व्यय, एनपीए, नीतिगत जड़ता और घोटालों की ज्यादतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्‍था सुस्त हो गई थी। इसमें सुधार के लिए उठाए गए कदमों का असर दिखने लगा है। मुझे अब इसमें संशय नहीं है कि हम ऊंची विकास दर के दायरे में पहुंच रहे हैं।

फर्मा और आइटी सेक्टर की चमक फीकी पड़ गई है। आने वाले साल में किन सेक्टरों में तेजी रहेगी?

मुझे लगता है आने वाले दिनों में फर्मा और आइटी सेक्टर उबर जाएंगे। भारतीय अर्थव्यवस्‍था से जुड़े बाकी कारोबारों से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

न्यू इंडिया’ में कौन-से सेक्टर चमकेंगे?

मैं किसी क्षेत्र-विशेष पर राय नहीं देता।

जब आप स्टॉक्स चुनते हैं तो क्या सोच रहती हैवैल्यू या ग्रोथ?

मेरा ऐसा कोई पूर्वाग्रह नहीं कि वैल्यू पर दांव लगाऊं या ग्रोथ पर। अगर कोई स्टॉक मेरे मापदंड पर खरा उतरता है, चाहे ग्रोथ हो या वैल्यू, तो मुझे वह खरीदना चाहिए। मैं मानता हूं कि हम क्या खरीदते हैं यह महत्वपूर्ण है, लेकिन हम किस वैल्यूएशन पर खरीदते हैं, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

आने वाले वर्षों में आप सेंसेक्स को कहां देखते हैं?

मुझे सेंसेक्स में चढ़ाव का रुझान दिख रहा है। मैं केवल दिशा का अनुमान लगा सकता हूं। यह कहां तक पहुंचेगा, कहना मुश्किल है।

क्या राजनीति भारतीय अर्थव्यवस्‍था के लिए जोखिम है?

राजनीति किसी भी समाज का अभिन्न अंग है। मुझे नहीं लगता कि यह भारतीय अर्थव्यवस्‍था के लिए कोई जोखिम है। लेकिन हमें देश की राजनीतिक बनावट पर नजर बनाए रखनी होगी।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से