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इंटरव्यू- रानी भारती काल्पनिक, राबड़ी देवी नहीं: हुमा कुरैशी

लक्ष्मी देव राय - JUL 18 , 2021
इंटरव्यू- रानी भारती काल्पनिक, राबड़ी देवी नहीं: हुमा कुरैशी
रानी भारती के किरदार में हुमा कुरैशी

“हुमा कुरैशी ने करिअर की शुरुआत दिल्ली में थिएटर करते हुए की थी”

हुमा कुरैशी ने करिअर की शुरुआत दिल्ली में थिएटर करते हुए की थी। फिर वे मुंबई चली गईं और विज्ञापनों में काम किया। ऐसे ही आमिर खान के साथ एक विज्ञापन करते हुए उनके लिए फिल्मों का रास्ता खुला। इसके बाद गैंग्स ऑफ वासेपुर उनकी झोली में आई। गांव की अल्हड़ लड़की मोहसिना का किरदार उन्होंने करीने से निभाया। फिलहाल वे सोनी लिव पर आ रहे राजनैतिक ड्रामा महारानी की मुख्य भूमिका में दिख रही हैं। लक्ष्मी देब रॉय से बातचीत में वे बताती हैं कि क्या उनका यह किरदार वाकई राबड़ी देवी से प्रेरित है? संपादित अंश:  

महारानी में अपनी भूमिका पर आपका क्या कहना है? 

रानी भारती की भूमिका रोमांचक और चुनौतीपूर्ण थी। मैं हमेशा खुद को आगे बढ़ाते रहना पसंद करती हूं और कोशिश करती हूं कि दोहराव न हो। अपनी भूमिका पर लोगों की प्रशंसा सुनकर मुझे खुशी हुई। ‘आप बहुत अलग दिखती हैं। रानी भारती तो आपकी तरह नहीं दिखती!’ इससे मुझे लगता है कि मैंने कुछ सही किया है। इसका श्रेय मैं निर्देशक करण शर्मा, कहानी और पटकथा लेखक सुभाष कपूर और नंदन सिंह को देती हूं।

क्या महारानी राबड़ी देवी पर आधारित है?

नहीं। संदर्भ लिए गए हैं, लेकिन यह पूरी तरह काल्पनिक है। तुलना सही नहीं है। सिवाय इसके कि रानी भारती बिहार की महिला मुख्यमंत्री हैं, इसमें और कोई समानता नहीं है। मैंने 1990 के दशक में बिहार की एक महिला के तौर-तरीकों को अपनाया और आत्मसात किया जिसे, पशुओं और मवेशियों में, खाना पकाने, सफाई के साथ महमानों के लिए चाय बनाने में दिलचस्पी थी। रानी भारती कभी स्कूल नहीं गई, अपने गांव से बाहर नहीं निकली... यहां तक कि पटना भी नहीं गई। लेकिन वह बुद्धिमान है जो उनकी सबसे आकर्षक चरित्र विशेषता है।

आपने इस किरदार के बोलने के अंदाज पर खास मेहनत की? 

अमूमन मैं कोई बोली बार-बार सुनती हूं तो आसानी से नहीं भूलती। हमने दो हफ्ते की वर्कशॉप की और स्क्रिप्ट पर बारीकी से काम किया। इससे पहले मैं गैंग्स ऑफ वासेपुर में भी इसी तरह की बोली में डायलॉग बोल चुकी थी।

आप अलग-अलग तरह की भूमिकाएं चुन रही हैं।

खुद को कंफर्ट जोन से बाहर निकालना जरूरी है। मैं एक ही तरह की भूमिकाएं करती रहती हूं, तो बोर हो जाती हूं। इसलिए मैं कोशिश करती हूं कि खुद को न दोहराऊं। मुझे टाइपकास्ट होना पसंद नहीं है... इंडस्ट्री में यही होता है। अगर कोई आपको किसी निश्चित भूमिका में देख ले तो फिर वैसे ही रोल आपके पास आते रहते हैं। फिल्में स्वीकार करने में मैं बेहद सावधानी बरतती हूं। मुझे विविध भूमिकाएं करने में मजा आता है।

महारानी में आपका पसंदीदा एपिसोड क्या है? 

यह मैं कैसे बताऊं? तीसरे एपिसोड में रानी भारती का पहली बार राज्य विधानसभा में जाना मेरे पसंदीदा में से एक है। मेरे लिए भी यह पहली बार था कि मैं किसी विधानसभा भवन में कदम रख रही थी।

ओटीटी प्लेटफॉर्म के भविष्य के बारे में आपका क्या कहना है?

इसने अभिनेताओं को प्रतिभा दिखाने के लिए जगह दी है। मुझे बड़े पर्दे से प्यार है और मैं सिनेमाघरों के खुलने का इंतजार नहीं कर सकती। लेकिन हम आज जहां खड़े हैं, मुझे लगता है स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ही एकमात्र समाधान है। जिस तरह की कहानियां हम कर रहे हैं, उसे पारंपरिक थिएटर स्पेस में जगह नहीं मिलती। मुझे लगता है यह एक अच्छा संकेत है।

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